अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से संबंधित कथित चोरी के मामले पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस घटना में चोरी गई राशि तीन करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। उन्होंने उन समाचारों का भी खंडन किया, जिनमें उनके ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का दावा किया जा रहा था। स्वामी गोविंददेव गिरि ने स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो अपने पद से त्यागपत्र दिया है और न ही ऐसा करने का कोई विचार है।
ट्रस्ट के साथ खड़े रहने की अपील
पुणे स्थित अपने आश्रम में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ट्रस्ट से अलग होने का नहीं, बल्कि उसके साथ खड़े होकर व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने का है। उनके अनुसार, यदि किसी स्तर पर कोई कमी या त्रुटि हुई है, तो उसका समाधान ट्रस्ट के भीतर रहकर ही किया जा सकता है। चढ़ावे की सुरक्षा और गिनती को लेकर उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने हुंडी में प्राप्त होने वाले चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा का दायित्व बैंक को सौंपा था। ऐसे में गिनती के लिए नियुक्त कर्मचारियों का सत्यापन और उनकी पृष्ठभूमि की जांच करना भी बैंक की जिम्मेदारी थी। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया में हुई लापरवाही के लिए बैंक की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
स्वामी गोविंददेव गिरि ने यह भी जानकारी दी कि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए गठित तीन सदस्यीय समिति योग्य उम्मीदवारों का चयन करेगी, जिसके बाद ट्रस्ट तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए एक सीईओ की नियुक्ति करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पूरे प्रकरण से सीख लेते हुए ट्रस्ट अपनी व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि मंदिर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज, ऑडिट रिकॉर्ड और बहुमूल्य आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं।
















