ईरान: युद्ध के दौरान भी नागरिकों का कत्लेआम, अब 18 साल के संगीतकार को फांसी पर लटकाया
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ईरान: युद्ध के दौरान भी नागरिकों का कत्लेआम, अब 18 साल के संगीतकार को फांसी पर लटकाया

मानवाधिकार समूहों का कहना है कि फांसी मनमाने तरीके से दी गई है क्योंकि लोगों को जबरन उठाया जा रहा है और फिर जुल्म कुबूल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Apr 3, 2026, 06:52 pm IST
inविश्व
आमिर हुसैन हतमी

आमिर हुसैन हतमी

ईरान जहां एक ओर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध में उलझा हुआ है तो दूसरी ओर उनका भी कत्लेआम जारी है, जिन्होंने ईरानी सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में हिंस्सा लिया था। अब 18 वर्षीय संगीतकार आमिर हुसैन हतमी को मौत के घाट उतार दिया गया है। उसे फरवरी 2026 में छह अन्य लोगों के साथ मौत की सजा सुनाई गई थी।

उस पर भी यह आरोप था कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम किया है। उसने इजरायल और अमेरिका की ओर से एक सैन्य केंद्र में प्रवेश कर विरोध प्रदर्शनों के दौरान वहां रखे गए हथियारों को नष्ट करने का प्रयास किया था। आमिर को 2 अप्रैल को घेजल हेसार जेल में फांसी दे दी गई।

मानवाधिकार समूहों का आरोप

मानवाधिकार समूहों का कहना है कि फांसी मनमाने तरीके से दी गई है क्योंकि लोगों को जबरन उठाया जा रहा है और फिर जुल्म कुबूल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ऐम्निस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि मुकदमा निष्पक्ष तरीके से नहीं चलाया गया और उसे गिरफ्तारी के एक ही महीने के भीतर मौत की सजा सुना दी गई। सोशल मीडिया पर एक बार फिर से इस फांसी को लेकर लोगों का आक्रोश दिख रहा है। परंतु यह और भी हैरान करने वाली बात है कि ईरान में नागरिकों को फांसी दी जा रही है, परंतु मीडिया में इन हत्याओं पर कोई विमर्श नहीं है।

सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स यह भी दावा कर रहे हैं कि आमिर ने फांसी से पहले अपने ही गाने की कुछ पंक्तियां गाई थीं। इनका हिन्दी में अर्थ है-

“ओ! हमारे आँसू कुछ नहीं है, हमारी हंसी कुछ नहीं है,
हमारे नुकसान और लाभ कुछ नहीं हैं,
केवल तुम्हारा आलिंगन ही बचता है, और हर चीज कुछ भी नहीं है!”

An 18-year-old Iranian, Amir Hossein Hatami, was executed today by the Islamic regime in Iran

Before his execution, Hatami reportedly sang lines of his song:

“Ah, our tears are nothing, our laughter is nothing
Our loss and gain are nothing
Only your embrace remains… everything… pic.twitter.com/XpkMPFMyRI

— Visegrád 24 (@visegrad24) April 2, 2026

प्रतिभाशाली युवाओं की लगातार मौतें

ईरान में प्रतिभाशाली युवाओं को मौत की सजा दी जा रही है और वजह यह है कि उन्होंने सरकार के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया था। उनके मुकदमे भी निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रहे हैं। आमिर महज 18 वर्ष के थे, जब उन्हें फांसी दे दी गई। उनके साथ के चार और लोगों को फांसी के लिए किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है।

ईरान की सरकार का बयान

ईरानी सरकार का कहना है कि जब जनवरी में सरकार विरोधी आंदोलन हो रहा था तो आमिर और उसका समूह सैन्य केंद्र की दीवारों पर चढ़ा, और वहां पर तोड़फोड़ की और आग लगा दी। वहाँ से हथियार और गोलाबारूद भी चुराने का प्रयास किया।

जबरन कबूलनामा लिखवाया

मानवाधिकार समूहों का कहना है कि आमिर और उसके समूह से जबरन कबूलनामा लिखवाया गया। उसमें यह लिखा था कि आमिर ने कहा कि उसका मकसद इस्लामिक गणराज्य को उखाड़ फेंकना था और यही कारण है कि उसने इन दंगों में भाग लिया था।

अधिकारियों ने उसे मोहरबह अर्थात अल्लाह के खिलाफ जंग और जियोनिस्ट की ओर से काम करने के रूप में आरोपित किया। आमिर के परिवार का कहना है कि जब यह आंदोलन चल रहे थे तो आमिर और उनके जैसे कई युवाओं और किशोरों को सादा कपड़ों में कुछ लोगों ने (जैसा कि लोगों का आरोप है कि वे सरकार की सेना के थे) ने उस परिसर की ओर धकेला, उन्हें फंसाया और फिर दरवाजे बंद कर दिए। इसके बाद खुद ही वहां पर आग लगा दी कि जिससे उन्हें गिरफ्तार करने का आधार बन जाए।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि दरवाजे पहले से ही खुले हुए थे और आग लगी हुई थी। आमिर पर पहले पत्थरबाजी का आरोप था। दिसंबर और जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में वह चौथे ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें फांसी दे दी गई है। 19 मार्च को अधिकारियों जिन तीन लोगों को फांसी पर लटकाया था, उनमें 19 वर्षीय सालह मोहम्मदी भी थे, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पहलवान थे।

जहां एक ओर ईरान के पक्ष में भारत में कविताएं लिखी जा रही हैं, ईरान के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग पैसे इकट्ठा कर रहे हैं कि वहाँ पर भेज दिया जाए तो वहीं दूसरी ओर ईरान सरकार के इन कदमों पर कोई प्रश्न भी नहीं उठा रहा है कि आखिर किशोरों को फांसी क्यों? जबकि वे भी ईरानी हैं और वे भी मुस्लिम ही हैं!

 

Topics: ईरान युवा हत्याAmir Hossein Hatami iranमानवाधिकार उल्लंघनईरान फांसी विवादआमिर हुसैन हतमीईरान सरकार विरोध प्रदर्शनइस्लामिक गणराज्य ईरानअल्लाह के खिलाफ जंग
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