ईरान में हर 5 सेकंड में एक मौत : आवाजें हो रही शांत, परंतु विरोध नहीं! डॉक्टर्स से लेकर आम लोग शिकार
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ईरान में हर 5 सेकंड में एक मौत : आवाजें हो रही शांत, परंतु विरोध नहीं! डॉक्टर्स से लेकर आम लोग शिकार

ईरान में महंगाई और दमन के खिलाफ उठी आवाज़ को इस्लामी शासन ने बेरहमी से कुचला। हजारों मौतें, शोक तक पर पाबंदी और डॉक्टरों की गिरफ्तारी से दुनिया सन्न।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Jan 29, 2026, 11:53 pm IST
inविश्व

ईरान ने पिछले माह विरोध देखा। जनता महंगाई से त्रस्त होकर सड़कों पर उतरी। और खमैनी शासन के प्रति अपना गुस्सा खुलकर दिखाया। उन्होनें आजादी की मांग की और यह आजादी की मांग इतनी तेज थी कि सरकार हिल गई। इस्लामी सत्ता एकबारगी सहम गई और उसे लगा कि अब जैसे सब कुछ हाथ से निकल गया। जब आजादी के परवाने सड़कों पर उतरे तो उन्होनें परवाह नहीं की कि उनकी उम्र क्या है, उनका पेशा क्या है और उनका लिंग क्या है? उन्होनें बस उस ज़ुल्मोसितम से आजादी की मांग की जो इस्लामी शासन इतने वर्षों से उनपर ढा रहा था।

आजादी के दीवानों का ऐसा रूप और उत्साह देखकर ईरान की सरकार के होश फाख्ता तो हुए, मगर उसे अपनी क्रूरता पर यकीन था और फिर क्रूरता का वह नंगा नाच शुरू हुआ, जिसके वीडियो सामने आने के बाद विश्व हतप्रभ है। 400 शहरों में फैला आजादी के दीवानों का आंदोलन सरकार ने जब कुचलना शुरू किया तो उसमें उसने कुछ नहीं देखा। इंटरनेट के बहाल होने के बाद जो भी वीडियो सामने आ रहे हैं, वह दुख में भरने वाले हैं। ये वीडियो दिखा रहे हैं कि कैसे आम लोगों को सरकारी सुरक्षा बलों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।

वीडियो जो सोशल मीडिया और मीडिया पर हैं वे डराने वाले हैं। मानवाधिकार समूहों के अनुसार अभी तक कम से कम 6000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। परंतु ईरान इन्टरनेशनल पोर्टल के अनुसार अभी तक 36,500 के करीब लोग इस विरोध प्रदर्शन में अपनी जान गंवा चुके हैं। इस पोर्टल के अनुसार केवल दो ही दिनों में इतने लोग मारे गए हैं और यह सब इस्लामिक रीपब्लिक द्वारा चलाए जा रहे दमन चक्र के कारण हो रहा है। इसमें यह भी लिखा है कि हालांकि ये आँकड़े अंतिम नहीं है और ये बढ़ भी सकते हैं। 27 जनवरी की इस रिपोर्ट के अनुसार देश भर में हुए इस आंदोलन के दौरान महज 48 घंटों के दौरान ईरानी सरकारी अधिकारियों ने 36,500 लोगों को मरवा दिया है।

इसका अर्थ हुआ कि 18250 मौतें एक दिन में, 760 मौत प्रति घंटे और 13 मौत प्रति मिनट अर्थात हर 5 सेकंड में एक हत्या! हो रही है।

सरकार द्वारा शोक मनाने पर भी सख्ती

एक तरफ विद्रोह को कुचलने के लिए सरकार द्वारा विरोध प्रदर्शन करने वालों पर सख्ती हो रही है, गोलियां चलाई जा रही हैं तो वहीं दूसरी ओर ऐसी भी रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें यह कहा जा रहा है कि मरने वाले लोगों के परिजनों को शोक भी नहीं मनाने दिया जा रहा है।

iranintl.com के अनुसार मरने वाले लोगों के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें शोक सभाएं करने से रोका जा रहा है, समय पर अंतिम संस्कार नहीं करने दिया जा रहा है और सब कुछ चुपचाप करने के लिए कहा जा रहा है। ऐसा इसलिए कि जिससे विद्रोह का स्वर और न फैले!

बीबीसी ने भी रिपोर्ट्स दी हैं जिसमें कहा जा रहा है कि अस्पतालों के भीतर शवों के ढेर लगे हुए है और छतों पर हथियारबंद लोग हैं और सीसीटीवी को तोड़ा जा रहा है।

बीबीसी के इंस्टाग्राम पेज पर ऐसे तमाम वीडियोज़ हैं, जो डराने वाले हैं और जो वहाँ पर हो रही हिंसा को दिखाते हैं। एक वीडियो में सैकड़ों लाशों के ढेर में से एक आदमी अपने बेटे के शव खोज रहा है।

डेली मेल के अनुसार कार्यकर्ताओं का यह भी दावा है कि जो ईरानी प्रदर्शनकारी सरकार के सुरक्षा बलों द्वारा पकड़े जा रहे हैं, उन्हें जेल के गार्ड्स द्वारा मारा जा रहा है और ऐसा कहा जा रहा है कि उनकी मौत विरोध दबाने के दौरान हुई।

ईरानी मूल के ओलंपिक एथलीट कीमिया अलीज़दह ने सोशल मीडिया का सहारा यह साझा करने के लिए लिया था। उनसे तेहरान के वकील ने बात की थी और उनके अनुसार वे नागरिक जिन्हें दिसंबर में सरकार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था, अब उनकी हत्याएं की जा रही हैं।

इन तमाम मौतों को जेल के गार्ड्स द्वारा पिछले दिनों मारे गए के रूप में दर्ज किया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों का इलाज करने पर डॉक्टर्स को किया जा रहा गिरफ्तार

सोशल मीडिया के अनुसार ईरान में उन डॉक्टर्स को भी हिरासत में लिया जा रहा है, जो प्रदर्शनकारियों का इलाज कर रहे हैं। डॉक्टर नील स्टोन ने एक्स पर लिखा कि इस्लामिक शासन ने प्रदर्शनकारियों का इलाज करने को लेकर डॉक्टर्स को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया है और इन डॉक्टर्स में महिला और पुरुष दोनों ही हैं। ऐसी ही एक पोस्ट सोशल मीडिया पर है, जिसमें 23 वर्षीय मेडिकल छात्रा बहरन की कहानी बताई गई है। जो इन विरोध प्रदर्शन में घायल लोगों का इलाज करने के लिए घर से बाहर गई थी, मगर वह भी गोलियों की चपेट में आ गई और तीन गोलियों ने उसकी जान ले ली। कोई भी एम्बुलेंस नहीं पहुंची और अंतत: वह मर गई।

टोनी रॉबिन्सन ने डॉ अलीरेजा गोलचिनी की कहानी साझा की, जिन्हें घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।

दुर्भाग्य की बात यही है कि ईरान में बड़े पैमाने पर हत्याएं हो रही हैं, परंतु इन हत्याओं के केवल साक्षी ही लोग हो पा रहे हैं। ईरान के लोग अमेरिका और पश्चिम के देशों से गुहार लगा रहे हैं कि वे उनका साथ दें। लोग डॉक्टर्स की तस्वीर लगाकर अपील कर रहे हैं कि उनकी आवाज बनें। क्योंकि यह भी नहीं पता है कि इन डॉक्टर्स को गिरफ्तार करके कहाँ पर ले जाया गया है।

Topics: ईरान विरोध प्रदर्शनखमैनी शासनईरान हिंसाईरान आज़ादी आंदोलनडॉक्टरों की गिरफ्तारीIran protests massacreईरान में विरोध प्रदर्शनKhamenei regime violenceIran human rights abuseइस्लामी शासनIran freedom movementमानवाधिकार उल्लंघन
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