खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है, जिससे दुनियाभर में तेल और गैस का संकट पैदा हो गया है। इस स्थिति पर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने हाल ही में एक नौसेना सम्मान समारोह में पश्चिम एशिया के चल रहे संघर्ष पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से इस इलाके में 20 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं। इसके अलावा करीब 1900 जहाज फंस गए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इससे पहले संघर्ष शुरू होने से पहले यहां रोजाना औसतन 130 जहाज गुजरते थे। अब यह संख्या घटकर सिर्फ 6-7 रह गई है। एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि युद्ध की वजह से समुद्री रास्ते अब पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गए हैं। पहले समुद्र सिर्फ व्यापार के लिए थे, लेकिन अब ये रणनीतिक मकसदों और विवादों का मुख्य मैदान बन चुके हैं। इससे पूरे विश्व के व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। खासकर भारत जैसे देशों के लिए, जो ऊर्जा का बड़ा आयातक है, यह स्थिति काफी चिंताजनक है।
हमलों और फंसने की वजह
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन, बिना चालक वाले सिस्टम और माइन्स की वजह से बिना औपचारिक नाकेबंदी के भी महत्वपूर्ण चोकपॉइंट्स जैसे होर्मुज को प्रभावित किया जा सकता है। संघर्ष शुरू होने के बाद से 20 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं। इन हमलों की वजह से करीब 1900 जहाज इलाके में फंस गए हैं।
जहाजों की यह फंसावट सिर्फ व्यापार को नहीं रोक रही, बल्कि उन पर सवार नाविकों की दिनचर्या और सुरक्षा को भी प्रभावित कर रही है। कई जहाज लंबे समय से रुके हुए हैं, जिससे सामान्य समुद्री गतिविधियां ठप पड़ गई हैं।
समुद्री सुरक्षा पर जोर
नौसेना प्रमुख ने इस मौके पर नौसेना की तैयारियों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन स्तर पर चपलता और दूरदृष्टि, यूनिट स्तर पर लड़ाकू तैयारियां और व्यक्तिगत स्तर पर साहस व पेशेवर उत्कृष्टता की बहुत जरूरत है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र भी किया, जिसमें पाकिस्तान में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय नौसेना समुद्री रास्ते से कार्रवाई के लिए तैयार थी, लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया।

















