अमेरिका के दोगले व्यवहार के चलते एक बार फिर से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है। साथ ही दो टूक कह दिया है कि यह फैसला अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए ब्लॉकेड को हटाने तक रहेगा। आईआरजीसी ने इस पानी के रास्ते पर सख्त नियंत्रण लगा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला कुछ यूं है कि ईरान ने 4 मार्च 2026 को अमेरिका-इजराइल के हवाई हमलों के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया था। शुक्रवार को इसे फिर से खोलने की घोषणा की गई। यह 10 दिन के सीजफायर के बाद हुआ, जो पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच हुआ था। लेकिन शनिवार को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने एक टैंकर पर गोली चलाई। कोई रेडियो वार्निंग नहीं दी गई थी। टैंकर और उसके क्रू सुरक्षित बताए गए। एक भारतीय झंडे वाले जहाज को भी रोका गया।
ईरान की सेना ने कहा कि स्ट्रेट अब पहले जैसी स्थिति में लौट गया है और यह सशस्त्र बलों के सख्त नियंत्रण में है। खत्म अल अनबिया कमांड ने बयान दिया कि जब तक ईरान से आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर खतरा है, स्थिति वैसी ही रहेगी।
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ईरान का पक्ष
ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतिबजादे ने कहा कि अमेरिका ईरान पर घेराबंदी नहीं लगा सकता, जबकि ईरान अच्छे इरादे से सुरक्षित आवाजाही की कोशिश कर रहा है। IRGC ने कहा कि अमेरिका की कोई भी प्रतिबद्धता तोड़ने पर उचित जवाब दिया जाएगा। संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अभी भी बहुत दूरी बाकी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका को ईरानी जहाजों के लिए पूरी आजादी सुनिश्चित करनी होगी, तभी रास्ता खुला रहेगा।
अमेरिका का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर ब्लॉकेड तब तक पूरा जोर से जारी रहेगा, जब तक ईरान के साथ स्थायी शांति समझौता नहीं हो जाता। उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए अस्थायी सीजफायर को भी आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, जो बुधवार को खत्म होने वाला है।
क्यों दोबारा से बंद हुआ होर्मुज
ईरान के द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह से बंद किए जाने को लेकर जानकारों का कहना है कि ये अमेरिका के दोगलेपन के कारण हुआ है। असल में अमेरिका को ईरान के तेल से मतलब है। उसे इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ता है कि होर्मुज खुले या बंद रहे। वो तो बस ईरान के साथ किसी भी कीमत पर डील करना चाहता है। ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति के तहत अमेरिका ने नेवी नाकेबंदी नहीं हटाई और इसी कारण ईरान ने भी दोबारा से होर्मुज को बंद कर दिया।
ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि उनके जहाज यहां से नहीं गुजरते हैं। उन्हें कोई फर्क भी नहीं पड़ता है कि ये खुला रहे या बंद हो जाए।

















