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‘सारथी’ होंगे समृद्ध

‘भारत टैक्सी’ डिजिटल परिवहन क्षेत्र में एक नई और महत्वपूर्ण पहल है। यह मात्र टैक्सी एप नहीं, बल्कि सहकारिता आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रयोग है। इस मॉडल के माध्यम से टैक्सी चालकों को केवल श्रमिक नहीं, प्लेटफॉर्म का मालिक बनाने का प्रयास है

Written byनागार्जुननागार्जुन
Mar 18, 2026, 05:58 pm IST
inभारत, विज्ञान और तकनीक

भारत में पिछले एक दशक में एप आधारित टैक्सी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, खासकर 2010 के बाद। स्मार्टफोन और इंटरनेट के प्रसार के बाद एप आधारित ओला और उबर जैसी कंपनियों ने यात्रियों को ऑन-डिमांड सुविधा प्रदान कर शहरी परिवहन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। ओला-उबर जैसे प्लेटफॉर्म ने लाखों चालकों को रोजगार दिया और यात्रियों के लिए यात्रा को सुविधाजनक बनाया। लेकिन समय के कई समस्याएं भी सामने आईं, जैसे चालकों से ऊंची कमीशन दरें, उनकी आय में अस्थिरता और कंपनियों का बढ़ता प्रभुत्व। इन्हीं चुनौतियों के बीच केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने सहकारिता मॉडल पर आधारित ‘भारत टैक्सी’ नाम से एक नई एप आधारित टैक्सी सेवा की योजना बनाई।

इस योजना को ‘सहकार से समृद्धि’ नीति के अंतर्गत विकसित किया गया है। इसकी स्थापना 8 प्रमुख राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं के सहयोग से की गई है, जिनमें अमूल, इफ्को, नाबार्ड और नेफेड शामिल हैं। इसका उद्देश्य सहकारिता के सफल मॉडल को डिजिटल परिवहन क्षेत्र में लागू करना है। प्रारंभिक चरण में इसे दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के कुछ शहरों में शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्सी चालकों को आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना तथा तकनीक के जरिए ऐसा परिवहन तंत्र बनाना है, जिसमें चालक, उपभोक्ता और सरकार, तीनों के हित सुरक्षित हों। ऐसी व्यवस्था जो चालकों को स्वामित्व, लाभ वितरण में पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान करे, ताकि कॉरपोरेर्ट प्लेटफॉर्म पर उनकी निर्भरता खत्म हो और वे अपने व्यवसाय का मालिक बनें।
‘भारत टैक्सी’ एक स्वदेशी और चालक केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका राइड अलॉटमेंट प्रणाली निकटतक चालक को राइड प्रदान करेगा। इसमें कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। इस प्लेटफॉर्म को मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के साथ भी एकीकृत किया जा सकता है, ताकि यात्रियों को ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ मिल सके।

इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस प्लेटफॉर्म का संचालन एक सहकारी संस्था द्वारा किया जाता है, जहां चालकों को ‘सारथी’ कहा जाता है। वे इस प्लेटफॉर्म के सदस्य और शेयरधारक होते हैं। इस प्लेटफॉर्म का संचालन सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड नाम बहु-राज्य सहकारी संस्था करती है, जिसे 2025 में स्थापित किया गया था। यह मॉडल भारत के प्रसिद्ध सहकारी संस्थान अमूल से प्रेरित है, जिसने किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।

एप की आवश्यकता क्यों पड़ी?

दरअसल, एप आधारित टैक्सी सेवाओं ने शुरुआत में चालकों को अच्छा अवसर दिया, लेकिन समय के साथ इसमें कई समस्याएं सामने आईं। इनमें प्रमुख है उच्च कमीशन दर। ओला और उबर कई बार 20-35 प्रतिशत तक कमीशन लेते हैं। साथ ही, डायनामिक प्राइसिंग का नियंत्रण इन कंपनियों के पास ही होता है, जिससे वे मनमाना किराया तय करती हैं। लेकिन इसका लाभ चालकों को नहीं मिलता।

नतीजा, शुरुआत में ये कंपनियां चालकों को जो प्रोत्साहन देती थीं, आगे चलकर धीरे-धीरे कम होती गईं और चालकों की आय में गिरावट आई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एप आधारित कंपनियां बिना किसी स्पष्ट कारण के उनका अकाउंट बंद कर सकती हैं। इसके अलावा, डेटा और एल्गोरिद्म पर कंपनियों का नियंत्रण भी एक बड़ा कारण है। वास्तव में यह पूरी व्यवस्था कंपनी के एल्गोरिद्म पर निर्भर करती है। इन समस्याओं ने ड्राइवरों को अपने प्लेटफॉर्म की जरूरत महसूस कराई। ‘भारत टैक्सी’ का विचार इन्हीं चिंताओं से निकला है, जिनमें कहा गया कि एप आधारित टैक्सी प्लेटफॉर्म पर चालकों का शोषण हो रहा है। इस अवधारणा के पीछे तीन प्रमुख प्रेरणाएं हैं- सहकारिता आंदोलन, प्लेटफॉर्म कोऑपरेटिव आंदोलन और चालक यूनियन व सामाजिक संगठन।

भारत में सहकारिता आंदोलन का लंबा इतिहास रहा है। अमूल और इफ्को जैसी संस्थाओं ने साबित किया है कि सहकारिता मॉडल बड़े पैमाने पर सफल हो सकता है। दुनिया भर में डिजिटल प्लेटफॉर्म को सहकारी मॉडल पर चलाने की अवधारणा को ‘प्लेटफॉर्म कोऑपरेटिव’ कहा जाता है। कई शहरों में टैक्सी चालक संगठनों ने कॉरपोरेट प्लेटफॉर्म के विकल्प के तौर पर एक स्वदेशी एप विकसित करने का सुझाव दिया था। इस प्रकार, ‘भारत टैक्सी’ का विचार किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक-आर्थिक आंदोलन का परिणाम है, जिसकी अवधारणा सहकारिता आंदोलन, चालक यूनियन और नीति विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तावित की गई है।

ऐसे काम करेगा एप

सहकारिता सिद्धांतों पर आधारित इस मॉडल में हर चालक सहकारी संस्था का सदस्य होगा, जिसके लिए उसे मामूली शेयर राशि देनी पड़ती है, जबकि प्रमुख निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। इसमें प्रत्येक सदस्य को समान मताधिकार मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें कमीशन न्यूनतम है, जबकि लाभ का बड़ा हिस्सा चालकों में बांटा जाता है और कुछ हिस्सा प्लेटफॉर्म के विकास में निवेश किया जाता है। इसके अलावा, तकनीक का उपयोग पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यही नहीं, चालक ‘भारत टैक्सी’ के साथ काम करते हुए अन्य प्लेटफॉर्म पर भी काम कर सकते हैं। इस प्रकार ‘भारत टैक्सी’ डिजिटल प्लेटफॉर्म कोऑपरेटिव का एक उदाहरण है।

दूसरी ओर, उबर और ओला जैसी एप आधारित कंपनियों में चालक केवल सेवाएं देते हैं। लेकिन ‘भारत टैक्सी’ में चालक प्लेटफॉर्म की नीतियां तय करने में भाग ले सकते हैं। चूंकि इस पहल का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि चालकों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। इसलिए इसमें कमीशन न्यूनतम रखा गया है। साथ ही, सहकारी संस्था उन्हें स्वास्थ्य, बीमा, पेंशन योजना जैसी सुविधाएं भी दे सकती हैं। इस एप में एल्गोरिद्म में पारदर्शिता से राइड अलॉटमेंट और किराया निर्धारण भी पारदर्शी होगा, जो उबर-ओला जैसे एप में नहीं है।

इसके अलावा, उबर-ओला की तरह किसी चालक का अकाउंट भी मनमाने तरीके से बंद नहीं किया जा सकता। चालकों के कौशल विकास के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं। कुल मिलाकर इस पहल से केवल चालकों ही नहीं, यात्रियों को भी लाभ होगा। ‘भारत टैक्सी’ के आने के बाद एप आधारित परिवहन सेवाओं में प्रतिस्पर्धा आएगी। कमीशन कम होने पर किराया भी 30 प्रतिशत तक घट सकता है। वहीं, मालिक होने के कारण चालक अपनी गुणवत्ता भी बनाए रखने का प्रयास करेंगे। स्थानीय जरूरतों के अनुसार सेवा विकसित की भी जा सकती है।

‘भारत टैक्सी’ का मॉडल आकर्षक है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है पूंजी की कमी। इसके विपरीत कॉरपोरेट कंपनियों के पास बड़े निवेशक होते हैं, जिससे उनके लिए एप का तकनीकी विकास (जैसे एप को उन्नत करना और एल्गोरिद्म विकसित करना) आसान हो जाता है। इस लिहाज से ‘भारत टैक्सी’ को सफल बनाने के लिए उन्नत तकनीकी ढांचे की आवश्यकता पड़ेगी।

इसमें जीपीएस आधारित लोकेशन सिस्टम, डिजिटल भुगतान, डेटा विश्लेषण, क्लाउड सर्वर शामिल हैं। तभी यह प्लेटफॉर्म आधुनिक एप सेवाओं से प्रतिस्पर्धा कर सकता है। इसके अलावा, बाजार में पहचान बनाने में भी कठिनाई हो सकती है, जबकि ओला-उबर के पास पहले से बड़ा ग्राहक आधार है। लेकिन यह भी तय है कि सरकार, चालक संगठन और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे तो ‘भारत टैक्सी’ न केवल विकल्प बन सकती है, बल्कि देश के शहरी परिवहन क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।

कुल मिलाकर, ‘भारत टैक्सी’ का प्रभाव केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह तीन प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसमें लाखों चालकों को रोजगार, जिसमें सम्मानजक आय शामिल है। इसके अलावा, इसमें कमाई का बड़ा हिस्सा स्थानीय समुदाय में रहता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोकतांत्रिक नियंत्रण स्थापित होता है। यदि यह मॉडल सफल रहा तो भारत में सहकारिता आंदोलन को डिजिटल युग में नई दिशा देने के साथ लाखों चालकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

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