लद्दाख में कुछ माह पहले हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देने और उसके बाद हिंसा भड़कने के मामले में गिरफ्तार किए गए पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जेल से बाहर आ हए हैं। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत लगाई गई हिरासत को तुरंत प्रभाव से हटा दिया। अब वो जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह डिटेंशन लद्दाख में चल रहे आंदोलन के बीच हुई। वांगचुक उस समय भूख हड़ताल पर थे, जिसमें वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और सिक्स्थ शेड्यूल का संरक्षण मांग रहे थे। इससे ठीक दो दिन पहले, 24 सितंबर को लद्दाख में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। पुलिस को कंट्रोल करने के लिए फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए। प्रशासन ने वांगचुक पर भड़काऊ बयान देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था। एनएसए एक सख्त कानून है, जिसमें बिना ट्रायल के लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है।
डिटेंशन कितने समय चली?
वांगचुक करीब छह महीने, यानी लगभग 170 दिन जेल में रहे। एनएसए के तहत अधिकतम डिटेंशन की अवधि एक साल तक हो सकती है, लेकिन उन्होंने आधी अवधि भी पूरी नहीं की। केंद्र ने सेक्शन 14 के तहत अपने पावर का इस्तेमाल कर डिटेंशन आदेश को रद्द किया।
सरकार ने क्या कहा?
गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह फैसला “लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी भरोसे का माहौल बनाने” के लिए लिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि सरकार सभी पक्षों से “रचनात्मक और सार्थक बातचीत” चाहती है। उन्होंने ये भी नोट किया कि वांगचुक ने एनएसए की आधी अवधि पूरी कर ली थी, और अब डायलॉग के लिए बेहतर माहौल बनाने की जरूरत है।










