पश्चिम एशिया यानि कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया ऊर्जा संकट खड़ा है। इसी क्रम में बांग्लादेश में इन दिनों ईंधन की कमी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यहां पेट्रोल और डीजल की किल्लत इतनी गहरी है कि पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। लोग डर के मारे ज्यादा से ज्यादा ईंधन खरीद रहे हैं, जिसे पैनिक बाइंग कहते हैं। इस वजह से स्टॉक और तेजी से घट रहा है। इस बीच भारत ने अपने पड़ोसी की मदद के लिए आगे आते हुए वहां 5000 टन जल डीजल भेज रहा है।
बांग्लादेश में केवल दो दिन का डीजल
बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) के मुताबिक, देश में डीजल का स्टॉक सिर्फ दो हफ्ते का बचा हुआ है। सामान्य दिनों में रोजाना करीब 12,000 टन डीजल की जरूरत पड़ती है, लेकिन अभी सिर्फ 9,000 टन ही सप्लाई हो पा रही है। सरकार ने स्थिति संभालने के लिए ईंधन बेचने पर रोजाना की लिमिट लगा दी है – जैसे मोटरसाइकिल वालों को 2 लीटर, कार वालों को 10 लीटर, एसयूवी के लिए 20-25 लीटर और ट्रकों के लिए भी तय मात्रा। लेकिन कई पंप वाले इस नियम को तोड़कर ज्यादा बेच रहे हैं, ताकि ज्यादा कमाई हो सके।
ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने पूरे देश में सख्त चेकिंग शुरू कर दी है। ऊर्जा मंत्रालय ने रविवार को स्पेशल अभियान चलाया, जिसमें स्टॉक की जांच की गई। कई जगहों पर मोबाइल कोर्ट भेजे गए, जहां कार्यकारी मजिस्ट्रेट के साथ छापेमारी हुई। ढाका में कुछ फिलिंग स्टेशन चेक किए गए – जैसे सिटी फिलिंग स्टेशन तेजगांव में, जो खाली मिला। वहां बताया गया कि नई खेप आने पर ही काम शुरू होगा। वहीं क्लीन फ्यूल स्टेशन पूरी तरह नियमों का पालन कर रहा था।
इसे भी पढ़ें: ईरान युद्ध का असर: तेल संकट से पाकिस्तान-बांग्लादेश में स्कूल बंद, भारत में LPG सिलेंडर संकट गहराया
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
इस बीच भारत ने बांग्लादेश की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ऊर्जा सहयोग का समझौता है। इसी के तहत आज (10 मार्च 2026) पाइपलाइन से 5,000 टन डीजल बांग्लादेश पहुंच रहा है। यह डीजल असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी से आ रहा है और पारबतीपुर बॉर्डर के रास्ते बांग्लादेश में प्रवेश करेगा। बीपीसी के चेयरमैन मुहम्मद रेजानुर रहमान ने एएनआई को फोन पर इसकी पुष्टि की।
समझौते के अनुसार, भारत हर साल बांग्लादेश को पाइपलाइन से 1 लाख 80 हजार टन डीजल सप्लाई करेगा। हर छह महीने में कम से कम 90,000 टन का टारगेट है। बीपीसी को उम्मीद है कि अगले दो महीनों में ही वे इस छह महीने का पूरा कोटा ले लेंगे। यह पाइपलाइन दोनों देशों के बीच ईंधन सप्लाई को आसान और सस्ता बनाती है, क्योंकि पहले ट्रेन या ट्रक से लाना पड़ता था।
















