
इस्राएली बमबारी से ध्वस्त हुआ बेरूत का एक उपनगरीय इलाका
इस्राएल की सक्रिय मदद से अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग दसवें दिन में प्रवेश कर चुकी है तो दूसरी तरफ इस्राएल ने लेबनान में भी मोर्चा खोला हुआ है। यहीं से जिहादी संगठन हिज्बुल्लाह इस्राएल पर मिसाइलें दाग रहा है। लेकिन इस्राएल ने इसका मुंहतोड़ जवाब देते हुए लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे जहां इस इस्लामी जिहादी संगठन को कड़ी चोट पड़ी है वहीं अब वह गाजा में सक्रिय हमास की तरह, आम जनता के बीच छिपने को भी तरसा दिया गया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस्राएल की कोशिश लेबनान को एक नई सूरत देने की है जिसमें हिज्बुल्लाह को आम जनता से अलग करके मार मारना है। हिज्बुल्लाह ने वर्षों से इस्राएल को सताया हुआ है और ईरान व अन्य इस्लामी देशों की इस्राएल से जंग में उनकी तरफ से इस्राएल के ठीक पड़ोस में बैठकर उसके रिहायशी इलाकों को निशाना बनाता आ रहा है।
अपने इसी एजेंडे पर चलते हुए पिछले एक हफ्ते में इस्राएली सेना ने लेबनान में बड़े पैमाने पर बमबारी करके लोगों को पलायन के लिए मजबूर कर दिया है। बमबारी में अभी तक लगभग 400 लोगों की मौत हुई है। लेबनान की राजधानी बेरूत सहित सभी शहरों पर बमबारी की गई है। इतना ही नहीं, दक्षिणी लेबनान में इस्राएली सैनिक लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
इस्राएल गढ़ेगा लेबनान की नई सूरत
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इस्राएल लेबनान की नई सूरत गढ़ता दिख रहा है, आगे चलकर जिसके परिणाम 2024 के युद्ध और उससे पहले 2006 के संघर्ष से अलग हो सकते हैं। उन युद्धों में भी लोगों का विस्थापन, बड़े पैमाने पर मौतें और बेरूत के दक्षिणी उपनगरों का विनाश हुआ था।
लेबनानी विश्लेषक और लेखक माइकल यंग का कहना है कि इस्राएल लेबनान की जनसांख्यिकी में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, ताकि हिज्बुल्लाह पर दबाव डाल सके और उस जिहादी गुट को उसे समर्थन देने वालों से अलग कर सके।
जैसा कि सब जानते हैं, गत 28 फरवरी को इस्राएल और अमेरिका ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को निशाना बनाया था, जिससे बाद से ईरान पर लगातार हमले जारी हैं। इसके बाद, 2 मार्च से हिज्बुल्लाह ने एक साल से अधिक समय बाद पहली बार इस्राएली सैन्य ठिकानों पर हमला किया। उसके अनुसार, यह खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए किया गया था।
हिज्बुल्लाह के हमले के जवाब में इस्राएल ने 2024 के युद्धविराम को ‘समाप्त हुआ’ कहकर दक्षिणी लेबनान के सभी नागरिकों को लितानी नदी के उत्तर जाने और बेरूत के दक्षिणी उपनगरों को खाली करने का फरमान सुनाया था। लेबनान में कई लोगों का मानना है कि वह युद्धविराम मोटे तौर पर एकतरफा ही रहा था। अब हिज्बुल्लाह रोजाना इस्राएली सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। फिलहाल वह पूर्वी बेका घाटी तथा दक्षिणी लेबनान से लड़ाई लड़ रहा है।
आगे बढ़ती इस्राएली सेना
लेबनानी सेना के एक स्रोत के अनुसार, इस्राएली सेना दक्षिणी लेबनान के निर्जन क्षेत्रों में कुछ किलोमीटर अंदर तक घुस आई है। यह 2024 युद्धविराम के बाद से कब्जे वाले पांच बिंदुओं से इतर स्थान है। वहां की आबादी में डर है कि इस बार इस्राएल पीछे नहीं हटने वाला है।
लेबनान में राजनीतिक विश्लेषक रबीह दंदचली का कहना है कि रणनीतिक रूप से, यहां लंबे समय तक कब्जा रखना इस्राएल के हित में नहीं होगा। इस तरह का कब्जा हिज्बुल्लाह की तर्ज पर नया प्रतिरोध पैदा कर देगा। फिर भी, विश्लेषक मानते हैं कि इस्राएल की कार्रवाइयां क्षेत्र को अपनी सत्ता के अधीन लाने की कोशिश ही हैं, ताकि भविष्य के वास्तविक या काल्पनिक खतरों को कुचला जा सके। इससे लेबनान-इस्राएल संबंध और हिज्बुल्लाह की ताकत को चोट जरूर पहुंचेगी।
जिहादी गुटों से मुक्त हों इलाके
लेबनान पर जारी इस्राएल के हमले युद्ध समाप्ति के बाद राजनीतिक शर्तें लगाने की स्थिति में आने से जुड़ी हो सकती हैं। 1976 के गुप्त ‘रेड लाइन्स समझौते’ में अमेरिकियों की मध्यस्थता से इस्राएल और सीरिया ने तय किया था कि सीरिया अवाली नदी के दक्षिण में नहीं जाएगा। अनुमान है कि इस्राएल लितानी से अवाली तक के क्षेत्र को हथियारबंद समूहों से मुक्त कराना चाहता है। लेबनान के सामाजिक मामलों की मंत्री हनीन सैय्यद ने बताया है कि इस्राएल के तीखे हमलों के बाद 5,17,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें से 117,228 सरकारी आश्रयों में शरण पा चुके हैं।
यहां बता दें कि 2023-2024 युद्ध से पहले जिहादी गुट हिज्बुल्लाह की लेबनान में जबरदस्त ताकत थी, लेकिन उस जंग में उसका सैन्य नेतृत्व, जिसमें महासचिव हसन नसरल्लाह शामिल था, मारा गया। उसके बाद लेबनानी सरकार ने संगठन को प्रतिबंधित किया था। जिहादी हिज्बुल्लाह इस वक्त गत 40 साल में सबसे कमजोर स्थिति में है। इस्राएल अब बड़े पैमाने पर विस्थापन से उसे उसके शिया समुदाय के समर्थन वाले आधार से काटने की कोशिश कर रहा है। इस्राएल ने गत 5 मार्च को दक्षिणी लेबनान के लोगों को लितानी के उत्तर में जाने का और 6 मार्च को दहियेह शहर खाली करने का आदेश दिया था। ये दोनों क्षेत्र हिज्बुल्लाह के मुख्य समर्थन वाले इलाके हैं। इनके अलावा पूर्वी बेका घाटी भी हिज्बुल्लाह का मजबूत गढ़ बताई जाती है।
गाजा जैसा हाल होगा!
इस्राएल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने साफ घोषणा की थी दहियेह का हाल गाजा के खान यूनिस जैसा हो जाएगा। वहां अगर भारी बमबारी से इलाका रहने लायक नहीं बचा, तो यह हिज्बुल्लाह को उसके आधार से उखाड़ फेंकने का एक संकेत ही होगा। इस्राएल का यह नीतिगत फैसला दिखता है कि हिज्बुल्लाह को उसके आधार, बेरूत और लेबनानी समाज से अलग करना जरूरी है।
लेबनानी अमेरिकन यूनिवर्सिटी के राजनीतिक वैज्ञानिक इमाद सलामे का कहना है कि दक्षिणी लेबनान, बेका घाटी के हिस्सों और दक्षिणी उपनगरों से आबादी को निकालकर इस्राएल जनसांख्यिक पैटर्न बदल रहा है। बहुत से लेबनानियों को डर है कि यह कहीं 1982—2000 के कब्जे वाले हालात की वापसी न हो।