अमेरिका-इजरायल मिलकर ईरान पर लगातार हमला कर रहे हैं। उसके सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत तमाम शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया गया है। इस बीच दुनिया पर युद्ध को खत्म करने के लिए दबाव बनाने की नीयत से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने धमकी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब बंद है। अगर कोई जहाज गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स और नौसेना के जवान उस जहाज में आग लगा देंगे। ईरान के इस कदम का असर, भारत समेत दुनियाभर के देशों पर होने वाला है।
इस खबर की पुष्टि खुद ईरानी मीडिया ने की है। साथ ही ईरान ने अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करने का भी ऐलान किया है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका का दावा है कि उसने अभी तक कोई बड़ा हमला नहीं किया, लेकिन ईरान इसे अपने ऊपर हमले के तौर पर देख रहा है।
जहाजों में लगा देंगे आग
इब्राहिम जबारी ने कहा, ‘स्ट्रेट बंद कर दिया गया है। अगर कोई गुजरने की कोशिश करेगा, तो रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के बहादुर जवान और नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देगी।’ इससे पहले शनिवार को ही ईरान ने जहाजों को संदेश भेजकर रास्ता बंद करने की बात कही थी, लेकिन अब यह धमकी और साफ हो गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम
यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का ऊर्जा व्यापार इसी पर टिका है। यहां से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। इसे बंद होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार रुक सकता है, तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।
इसे भी पढ़ें: ट्रंप की धमकी: ईरान पर ‘बड़ा वाला’ हमला आने वाला है, खामेनेई के बाद अब क्या?
भारत पर क्या होगा असर
भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। इनमें से बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर। यह तेल ज्यादातर होर्मुज जलडमरूमध्य से ही गुजरता है। अगर रास्ता बंद रहा, तो भारत की ऊर्जा सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई चढ़ेगी और सरकार पर राजकोषीय दबाव बढ़ेगा। आयात बिल बढ़ने से चालू खाते का घाटा भी बड़ा हो सकता है।
भारत के ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से अच्छे रिश्ते हैं। ऐसे में कूटनीति और समुद्री सुरक्षा दोनों तरफ से बैलेंस बनाना जरूरी है। अगर तनाव बढ़ता रहा, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तुरंत उछलेंगी। इसका असर महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत और शेयर बाजार पर भी दिखेगा। दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से आता-जाता है।















