नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक को भारत का आंतरिक विधायी मामला बताया है और कहा कि इस पर निर्णय देश की संसद लेती है। मंत्रालय का बयान अमेरिकी सांसद सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एफसीआरए को लेकर जताए जा रहे विरोध पर आया है। मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका सहित अन्य देशों में भी इस तरह के कानून मौजूद हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकार वार्ता में विधेयक पर एक अमेरिकी सांसद की टिप्पणी पर उक्त बातें कहीं। प्रवक्ता ने कहा, “हमने एफसीआरए पर टिप्पणियां देखी हैं। भारत से संबंधित विधायी मामले हमारे आंतरिक मामले हैं जिन पर देश की संसद द्वारा निर्णय लिए जाते हैं। मैं यह भी बताना चाहूंगा कि संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई ऐसे देश हैं जो विदेशी निधियों के प्रवाह को विनियमित करते हैं।”
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी कांग्रेस सदस्य रिले मूर ने हाल ही में एक पोस्ट में भारत के प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की आलोचना की थी।














