खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के चलते होर्मुज को ईरान ने बंद कर रखा है, लेकिन, उसने भारत समेत 5 देशों को इस क्षेत्र से गुजरने छूट दे रखी है। इसी क्रम में आज पेट्रोलियम उत्पाद लेकर दो व्यापारिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरे। खास बात ये है कि भारतीय नौसेना के युद्धपोत इनकी सुरक्षा के लिए तैयार खड़े हैं।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण जल मार्ग है, जहां से बहुत सारा तेल और गैस गुजरता है। हाल के अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद ईरान ने इस इलाके में सख्ती बढ़ा दी है। ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा है कि दुश्मन देशों के बंदरगाहों से जुड़े जहाजों के लिए स्ट्रेट बंद है। कल यानी 27 मार्च को तीन कंटेनर जहाजों को वापस भेज दिया गया, जब उन्होंने गुजरने की कोशिश की। ईरान का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के खुला होने का दावा झूठा था।
फिर भी ईरान ने कुछ जहाजों को पास करने की इजाजत दे दी है। कुल 26 जहाजों को अनुमति मिली, जिनमें ज्यादातर ग्रीस और चीन के मालिकाना हक वाले हैं। कुछ भारत, पाकिस्तान और सीरिया से जुड़े भी हैं। ये जहाज ईरान के तट के पास लारक द्वीप के आसपास वाले रास्ते से गुजर रहे हैं।
भारत के जहाजों की स्थिति
भारत के लिए ईंधन ले जा रहे दो मर्चेंट जहाज अभी होर्मुज स्ट्रेट क्रॉस कर रहे हैं। भारतीय नौसेना ने इनकी मदद के लिए युद्धपोत तैनात कर रखे हैं, ताकि कोई समस्या हो तो तुरंत सहायता मिल सके। इसके अलावा, पांच भारतीय झंडे वाले एलपीजी कैरियर भी तैयार खड़े हैं। ये दक्षिण-पश्चिम होर्मुज स्ट्रेट के पास, दुबई-रास अल खैमा के उत्तर में लंगर डाले हुए हैं। इनमें कुल 1.7 लाख टन से ज्यादा एलपीजी है। ये जहाज साथ-साथ निकलने की योजना बना रहे हैं। उम्मीद है कि दो जहाजों के बाद और भी जहाज इस रास्ते से गुजरेंगे।
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क्यों है यह महत्वपूर्ण
भारत को अपना बड़ा हिस्सा तेल और एलपीजी मध्य पूर्व से ही मिलता है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने या रुकावट आने से घरेलू बाजार पर असर पड़ सकता है, खासकर रसोई गैस और ईंधन की सप्लाई पर। इसलिए सरकार और नौसेना इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि जहाज सुरक्षित गुजरें।

















