महाराष्ट्र सरकार ने आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार पर रोक लगाने के लिए बड़ी कार्रवाई है। राज्य के गृह विभाग ने गुरुवार (6 अगस्त) को एक गजट अधिसूचना जारी कर आईएसआईएस, इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस (ISIS-K), हिज्ब-उल-मुजाहिदीन और अल-कायदा (AQIS) जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों, पत्रिकाओं, साहित्य तथा डिजिटल सामग्री की सभी प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया है। सरकार के मुताबिक, इन प्रकाशनों के जरिए युवाओं को गुमराह, आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। इस कार्रवाई का उद्देश्य राज्य और देश की सुरक्षा को मजबूत करना व युवाओं को कट्टरपंथी सोच से दूर रखना है।
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह कार्रवाई आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS), विभिन्न खुफिया एजेंसियों और साइबर निगरानी से मिली रिपोर्टों के आधार पर की गई है। जांच में पाया गया कि कई प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित साहित्य और सामग्री को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा था। इन प्रकाशनों के जरिए आतंकवादी संगठनों का समर्थन और हिंसक उग्रवाद का महिमामंडन किया जा रहा था। इसके साथ ही युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने, आतंकवादी संगठनों में भर्ती के लिए प्रेरित करने और चरमपंथी विचारधारा फैलाने का भी प्रयास किया जा रहा था।
114 कट्टरपंथी प्रकाशनों की प्रतियां जब्त
महाराष्ट्र सरकार ने यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 98(1) के तहत की है। इस आदेश के मुताबिक, आतंकवादी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी पब्लिकेशन की प्रतियां जब्त कर ली गई हैं। इतना ही नहीं, इस सामग्री के किसी भी रूप में प्रकाशन,वितरण, बिक्री, दिखाने, फैलाने या इकट्ठा करने पर भी रोक लगा दी गई है। अगर यह सामग्री कहीं पर भी पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।।
बैन किए गए संगठनों से जुड़े साहित्य
अधिसूचना में बताए गए साहित्य में, वॉइस ऑफ खुरासान मैगजीन, द रिवोल्यूशनरी रिसर्जेंस, कश्मीर किफा-रेजिलिएंस एंड करेज, द सोल ऑफ रेजिस्टेंस और नवाई गजवा-ए-हिंद जैसे पब्लिकेशन शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, इस कट्टरपंथी साहित्य का कुछ हिस्सा इस्लामिक स्टेट (ISIS), इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रोविंस (ISKP), हिज्ब-उल-मुजाहिदीन पीर पंजाल रेजिमेंट और अल कायदा (AQIS) जैसे बैन किए गए आतंकवादी संगठनों से जुड़ा है।
सोशल मीडिया पर आतंकवाद का दुष्प्रचार
महाराष्ट्र सरकार का आतंकवाद और कट्टरपंथी दुष्प्रचार के खिलाफ यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि आतंकवादी संगठन अब न केवल पारंपरिक तरीकों से बल्कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन मैगजीन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी अपनी सोच फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह की सामग्री केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं करती, बल्कि देश की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रकाशित पत्रिकाएं, दस्तावेज और डिजिटल सामग्री युवाओं का ब्रेनवॉश करने व हिंसक गतिविधियों के लिए उन्हें तैयार करने का माध्यम बन रही थीं। इसी वजह से इन प्रकाशनों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।

















