देहरादून। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में देश के पहले अग्निवीर पुनर्रोजगार सेल द्वारा प्रत्येक सैनिक के लिए रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। अग्निवीर योजना को लेकर जारी विपक्ष की राजनीति को पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल ने निराधार, तथ्यहीन, गैरजरूरी और भ्रम फैलाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि दिसंबर-जनवरी में आने वाले पहले दो बैचों में सैन्य सेवा से पास आउट होने वाले लगभग 1200 अग्निवीरों के पुनर्रोजगार के लिए सेल तैयारी कर रहा है।
देश के पहले विशेष अग्निवीर पुनर्रोजगार सेल की दी विस्तृत जानकारी
पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए बनाए गए अपने तरह के देश के पहले विशेष सेल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इंडियन आर्मी किसी भी योजना को व्यापक परीक्षण और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शुरू करती है। ऐसी ही एक योजना अग्निपथ (अग्निवीर) योजना है, जिसकी देश और सेना दोनों को आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि सकारात्मक तरीके से देखा जाए तो आने वाले दिनों में इसके परिणाम पूरी तरह सामने आ जाएंगे, जब 25 फीसदी अग्निवीर सेना में रिटेन हो जाएंगे और 75 फीसदी प्रशिक्षित, कुशल एवं अनुशासित मानव संसाधन समाज में आएगा।
उन्होंने बताया कि इन्हीं अग्निवीरों को उचित रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद 17 जुलाई को राज्य में ‘अग्निवीर पुनर्रोजगार सेल’ स्थापित करने की घोषणा की है। यह सेल सीधे तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय के अंतर्गत कार्य करेगा। इसके अतिरिक्त इसमें सेना के एक सेवानिवृत्त कर्नल, राज्य सरकार के एक अनुभवी अधिकारी तथा विशेषज्ञों की टीम होगी। यह सेल केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तथा कॉर्पोरेट समूहों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रत्येक अग्निवीर को उचित रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।
अग्निवीर, नियोक्ता और सेल के बीच होगा समन्वय
उन्होंने बताया कि इस योजना के तीन महत्वपूर्ण हिस्से हैं। एक तरफ अग्निवीर होंगे, जो चार वर्ष की सेवा पूरी करके आएंगे, दूसरी तरफ रोजगार देने वाली संस्थाएं होंगी और तीसरी तरफ यह सेल होगा, जो अग्निवीरों और रोजगार देने वाली संस्थाओं के बीच समन्वय का कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि अग्निवीरों के पास सैन्य सेवा का व्यापक अनुभव होगा, लेकिन जब वे नागरिक समाज में आएंगे तो उन्हें कुछ अतिरिक्त कौशलों की भी आवश्यकता होगी। उन कौशलों को प्रमाणित करने तथा आवश्यक प्रशिक्षण देने का कार्य भारतीय सेना कर रही है। वहीं रोजगार देने वाली संस्थाओं में केंद्रीय अर्धसैनिक बल, असम राइफल्स, केंद्र सरकार के विभिन्न विभाग, राज्य सरकार के विभाग तथा कॉर्पोरेट संस्थान शामिल होंगे। कॉर्पोरेट क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप अग्निवीरों की दक्षता विकसित करने पर भी विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि ‘अग्निवीर री-एम्प्लॉयमेंट सेल’ का उद्देश्य अग्निवीरों और नियोक्ताओं के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना है।
दिसंबर और जनवरी में आने वाले पहले दो बैचों की तैयारियां शुरू
उन्होंने कहा कि अगले पांच महीनों बाद 31 दिसंबर को जब अग्निवीरों का पहला बैच आएगा, तो उसे पूरी तैयारी के साथ रिसीव करने के लिए सेल को तैयार किया जा रहा है। इसमें कुछ युवा आगे की पढ़ाई करना चाहेंगे, जबकि कुछ स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ना चाहेंगे। ऐसे सभी युवाओं के लिए भी अग्निवीर पुनर्रोजगार सेल आवश्यक कार्रवाई करेगा।
उन्होंने जानकारी दी कि चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भारतीय सेना के अग्निवीरों का पहला बैच 31 दिसंबर को बाहर आएगा। इसके बाद एक माह का उनका साइलेंट पीरियड रहेगा और फिर निर्धारित 25 प्रतिशत अग्निवीरों को पुनः सेना में रिटेन किया जाएगा। इसी प्रकार दूसरा बैच 31 जनवरी को आएगा। कुल मिलाकर उत्तराखंड के लगभग 1200 से अधिक अग्निवीर इस अवधि में सेवा पूरी कर वापस आएंगे। इससे पहले भारतीय नौसेना के अग्निवीरों का पहला बैच 21 नवंबर को पास आउट होगा। उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन उनके पुनर्रोजगार की भी समुचित व्यवस्था की जाएगी।
विपक्ष के आरोपों को बताया निराधार और तथ्यहीन
वहीं उन्होंने विपक्ष एवं कांग्रेस द्वारा अग्निवीर योजना को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह निराधार एवं तथ्यहीन बताया। उन्होंने आग्रह किया कि राष्ट्रहित के इस महत्वपूर्ण विषय पर सभी लोगों को दलगत राजनीति से ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दूरदर्शी एवं प्रभावी योजना को लेकर जिस प्रकार भ्रम और झूठ फैलाने का प्रयास विपक्ष द्वारा किया जा रहा है, वह सफल नहीं होगा। क्योंकि देश की जनता को भारतीय सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा विश्वास है तथा उनका यह भरोसा शीघ्र ही धरातल पर साकार होता दिखाई देगा।















