असम में अवैध घुसपैठ का इतिहास : जानिए नेहरु और Congress की वोट बैंक की नीति और उसके Side Effect
July 22, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

असम में अवैध घुसपैठ का इतिहास : जानिए नेहरु और Congress की वोट बैंक की नीति और उसके Side Effect

असम में अवैध घुसपैठ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और विभाजनकालीन राजनीति को लेकर Gopinath Bordoloi, Jawaharlal Nehru, Muhammad Ali Jinnah और अन्य नेताओं की भूमिका पर आधारित विश्लेषण

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by Shivam Dixit
Feb 25, 2026, 05:22 pm IST
in भारत, असम, विश्लेषण

विदेशी घुसपैठ किसी ख़ास प्रदेश या इलाके के लिए नहीं वरन पूरे भारत के लिए बहुत बड़ा अभिशाप है. असम उन प्रदेशों में हैं जिसने इसकी कीमत सबसे ज्यादा कीमत चुकाई है. असम में घुसपैठ और उसकी वजह से हुए मुस्लिम जनसंख्या के विस्फोट के पीछे एक बहुत बड़ी साजिश थी जो आजादी के तत्काल बाद ही शुरू हो गई थी. इसका लक्ष्य पूरे असम को पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में मिलाने का था. मुस्लिम लीग की इस साज़िश को विफल करने में गोपीनाथ बोरदोलोई की भूमिका अहम थी. वही जवाहरलाल नेहरू की इस समस्या को नज़रअंदाज करना भी परेशान करनेवाला हैं.

गोपीनाथ बोरदोलोई का संघर्ष और दूरदृष्टि

असम में घुसपैठियों के खिलाफ पहली जंग लड़ने वाले भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई थे. बोरदोलोई कांग्रेस के नेता थे.भारत माता के इस महान सपूत को भारत रत्न भी कांग्रेस की सरकार ने नहीं बल्कि 1998 में एनडीए की वाजपेयी सरकार ने दिया था. स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ बोरदोलोई ने 1930 के दशक में ही असम की संस्कृति को बचाने का अभियान चलाया था. बोरदोलोई पहले ऐसे नेता थे जो असम में होने वाले जनसांख्यिकी परिवर्तन की साज़िश को पहचान गए थे. दरअसल उस दौर में जिन्ना की मुस्लिम लीग अंग्रेज सरकार की मदद से बाहरी मुसलमानों को असम में बसा रही थी जिसका बोरदोलोई ने जमकर विरोध किया था. 1938 में जब बोरदोलोई पहली बार असम के मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने मुस्लिम लीग द्वारा बसाए गए लोगों को बाहर निकालने की मुहिम चलाई.बोरदोलोई जानते थे कि असम में मुसलमानों की आबादी को बढ़ाकर जिन्ना की मुस्लिम लीग एक दिन असम को पूर्वी पाकिस्तान में मिलाने की योजना पर काम कर रही है.

कैबिनेट मिशन योजना और असम का संकट

बोरदोलोई का डर सही निकला. दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद मार्च 1946 में ब्रिटिश सरकार ने अपने तीन मंत्रियों को कैबिनेट मिशन पर भारत भेजा. कैबिनेट मिशन का मकसद भारत की आजादी और नई सरकार बनाने का रास्ता निकालना था.भारतीय नेताओं के साथ लंबी बातचीत के बाद कैबिनेट मिशन ने एक योजना प्रस्तुत किया जिसके मुताबिक भारत में एक केंद्र सरकार होगी और उसके नीचे राज्यों के तीन समूह ए, बी और सी होंगे. ग्रुप ए और ग्रुप बी को लेकर तो कोई समस्या नहीं थी, लेकिन ग्रुप सी में पूर्वी भारत के दो राज्य यानी बंगाल और असम को एक साथ मिला कर रख दिया गया. समस्या यह थी कि असम और बंगाल की आबादी को पूरी तरह से मिला देने पर यह ग्रुप सी मुस्लिम बहुल समूह बन जाता था. इससे बंगाल के साथ-साथ असम पर भी हमेशा के लिए मुस्लिम लीग का प्रभाव हो जाता जबकि असम में उस समय 70% आबादी हिंदुओं की थी. लेकिन दुर्भाग्य से असम की समस्या की अनदेखी करते हुए कांग्रेस ने कैबिनेट मिशन के प्लान को स्वीकार कर लिया. लेकिन गोपीनाथ बोरदोलई ने अपनी पार्टी यानी कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ जाकर पूरे असम में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए.बोरदोलोई की इस ज़िद के आगे ना केवल गांधी जी को झुकना पड़ा बल्कि कांग्रेस ने कैबिनेट मिशन के प्लान को ही रिजेक्ट कर दिया और इस तरह गोपीनाथ बोरदोलई की दूरदृष्टि ने असम को पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनने से बचा लिया.दुर्भाग्य की बात है कि उनके इस महान योगदान से देश के ज्यादातर लोग अनजान हैं.

सर सैयद मोहम्मद सादुल्लाह की भूमिका

असम को मुस्लिम बहुल राज्य बनाने के सूत्रपात करने वाले और इस काम को आगे बढाने वाला सर सैयद मोहम्मद सादुल्लाह था जिसे नॉर्थ ईस्ट का जिन्ना कहा जाता था. दरअसल 1940 के दशक में असम में मुस्लिम लीग की प्रांतीय सरकार थी और इसके मुखिया मुस्लिम लीग के बड़े नेता सैयद मोहम्मद सादुल्लाह थे. सादुल्लाह ने बड़ी तादाद में बाहरी मुसलमानों को असम में बसाया था. उसकी योजना असम को मुस्लिम बाहुल्य बनाकर पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में मिलाना था.सादुल्लाह ने अनाज उत्पादन बढ़ाने के नाम पर बाहरी मुस्लिम किसानो को असम में बड़े पैमाने पर बसाया था. दरअसल यह अन्न उत्पादन योजना नहीं बल्कि Muslim आबादी बढ़ाव योजना थी जिसका जिक्र तत्कालीन वॉइस लॉर्ड वेवल ने भी किया था.

संविधान सभा और सादुल्लाह की नियुक्ति

जिन्ना का यह अनुयायी सर सैयद मोहम्मद सादुल्लाह पाकिस्तान बनवाने के बाद पाकिस्तान नहीं गया बल्कि आखिरी सांस तक असम में ही रहा.मोहम्मद सादुल्लाह ने पहले तो असम में मुसलमान बसाए, फिर पाकिस्तान बनवाया और जब भारत आजाद हो गया तो सादुल्लाह पाकिस्तान ना जाकर भारत की संविधान सभा का सदस्य बन गया.आजादी के महज 14 दिन बाद 29 अगस्त 1947 को नेहरू सरकार ने मोहम्मद सादुल्लाह को भारत की संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी का सदस्य भी बना दिया जिसके चेयरमैन डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर थे.

स्वतंत्रता के बाद भी जारी रही घुसपैठ

आजादी के बाद भी असम में जनसांख्यिकी परिवर्तन का खेल यथावत जारी रहा.आजादी के तत्काल बाद भी अवैध मुस्लिम घुसपैठ के खिलाफ असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई का संघर्ष जारी रहा.पूर्वी पाकिस्तान यानी वर्तमान बांग्लादेश से बड़ी तादाद में मुसलमान असम आ रहे थे क्योंकि उन्हें असम को एक मुस्लिम राष्ट्र बनाना था.असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई ने आजादी के सिर्फ 9 महीने बाद देश के गृह मंत्री सरदार पटेल को एक पत्र लिखा था.5 मई 1948 को बोरदोलोई के पत्र का मजमून हैं कि आदरणीय सरदार पटेल जी असम में हिंदू शरणार्थियों का आना तो समझ में आता है लेकिन बड़ी संख्या में मुस्लिम शरणार्थियों के आने से बहुत बड़ी मुसीबत पैदा हो रही है. हमें यह ध्यान में रखना होगा कि विभाजन के पहले पाकिस्तान की असम में रुचि थी.हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यदि असम को भारत का अंग बनाए रखना है तो मुस्लिम घुसपैठ को रोकने के लिए हमें बल प्रयोग की अनुमति दी जाए. असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई के इस पत्र से साफ हो जाता है कि आजादी के कुछ दिनों बाद ही पूर्वी पाकिस्तान यानी वर्तमान बांग्लादेश से मुस्लिम घुसपैठिए असम में दाखिल होने लगे थे.

नेहरू-पटेल पत्राचार और विवाद

1950 आते-आते असम में मुस्लिम घुसपैठियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ने लगी जिस कारण सरदार पटेल बहुत चिंतित थे. इस बारे में उन्होंने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू को एक पत्र लिखा था.जवाहरलाल नेहरू ने इस समस्या को टालने के लिए एक अलग ही मोड़ दे दिया.नेहरू का 1 अक्टूबर 1950 को सरदार पटेल के पत्र का जवाब सिलेक्टेड वक्स ऑफ जवाहरलाल नेहरू की सीरीज टू के वॉल्यूम 15 के पेज नंबर 36 पर प्रकाशित हैं. इस पत्र में नेहरू लिखते हैं प्रिय बल्लभ भाई आपने पूर्वी पाकिस्तान से असम आने वाले मुस्लिम अप्रवासियों के बारे में मुझे पत्र लिखा था. हमें इनके प्रवेश पर रोक लगाने की कोशिश करना चाहिए.नेहरू आगे लिखते हैं कि ऐसे व्यक्तियों यानी मुस्लिम घुसपैठियों की संख्या बहुत ज्यादा दिखाई नहीं देती है.आपके भेजे गए कागजात के मुताबिक किसी एक दिन इनकी यानी मुस्लिम घुसपैठियों की संख्या 120 थी. सामान्य तौर पर यह रोजगार ढूंढने वाले लोगों की भी आवाजाही है. इस पत्र से स्पष्ट होता हैं की नेहरू गुपचुप तरीके से मुस्लिम जनसंख्या बढ़ाकर अपने वोटबैंक को मजबूत करना चाहते थे.

मोइनुल हक चौधरी और बाद की राजनीति

1950 में असम में पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई का निधन हो गया और इसके कुछ दिन बाद सरदार पटेल भी नहीं रहे. ये दोनों नेता और कुछ समय तक जीवित होते तो इस समस्या का उसी समय समाधान हो जाता.असम में घुसपैठ को रोकने वाला कोई नहीं था.इसी दौर में असम कांग्रेस में मोइनुल हक चौधरी का उदय हुया. मोइनुल हक चौधरी आजादी से पहले मुस्लिम लीग के नेता हुआ करते थे और मुस्लिम लीग के यूथ फ्रंट के महासचिव होने के साथ-साथ कुछ समय के लिए मोहम्मद अली जिन्ना के प्राइवेट सेक्रेटरी भी रहा था. आजादी से पहले मोइनुल हक चौधरी ने जिन्ना से वादा किया था की वो असम को पाकिस्तान को सौंप देंगे.उनका वादा कागजों में दर्ज है. आजादी के बाद मोइनुल हक चौधरी मुस्लिम लीग छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गया और असम कांग्रेस के बड़े नेता और भारत के पूर्व राष्ट्रपति फकरुद्दीन अली अहमद का दामन थाम लिया. मोइनुल हक चौधरी पांच बार विधायक बने और 1967 में असम सरकार में मंत्री भी बनाये गए. लेकिन सबसे हैरानी की बात है कि जिन्ना के इस अनुयायी को 1971 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने मंत्रिमंडल में मोइनुल हक चौधरी को देश का औद्योगिक विकास मंत्री बना दिया.

मोइनुल हक चौधरी की असम की सोच का जिक्र असम के पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एस के सिन्हा की एक रिपोर्ट मिलता हैं जो उन्होंने 8 नवंबर 1998 को भारत सरकार को सौंपी थी. इस रिपोर्ट में उन्होंने विस्तार से असम में होने वाली अवैध घुसपैठ पर प्रकाश डाला है. इस रिपोर्ट में लेफ्टिनेंट जनरल सिन्हा मोइनुल हक चौधरी के बारे में लिखा हैं कि जब देश के बंटवारे की मांग हो रही थी तो यह माना जा रहा था कि पूर्वी पाकिस्तान में बंगाल के साथ-साथ असम को भी मिला लिया जाएगा. मोहम्मद अली जिन्ना के निजी सचिव मोइनुल हक चौधरी जो आजादी के बाद असम में मंत्री बने और बाद में केंद्र सरकार में भी मंत्री पद पर रहे उन्होंने जिन्ना से कहा था कि हम असम को चांदी की थाली में रखकर आपको सौंप देंगे. जिन्ना ने भी कहा था कि असम मेरी जेब में है.वोट बैंक की लालच में असम में बड़ी संख्या में अवैध मुस्लिम घुसपैठियों को बसाया गया था. जिन्ना की मुस्लिम लीग से आजादी के बाद कांग्रेस में आए मोइनुल हक चौधरी जैसे नेताओं के सर पर कांग्रेस के पुराने और वरिष्ठ नेता फकरुद्दीन अली अहमद का हाथ था.आरोप तो यह भी है कि उस घुसपैठ को फकरुद्दीन अली अहमद का समर्थन प्राप्त था. यह वही फकरुद्दीन अली अहमद हैं जो बाद में देश के राष्ट्रपति बने और उन्होंने ही इंदिरा गांधी के कहने पर 1975 में बतौर राष्ट्रपति देश में इमरजेंसी थोपी थी.

बी.के. नेहरू और अन्य आरोप

सिर्फ लेफ्टिनेंट जनरल एस के सिन्हा ही नहीं बल्कि नेहरू परिवार के सदस्य और 1968 से 1973 तक असम के राज्यपाल रहे ब्रजकिशोर नेहरू ने अपनी किताब नाइस गाइस फिनिश सेकंड में यह आरोप लगाया है कि जब-जब उन्होंने असम में घुसपैठ की समस्या उठाया तो उसे फकरुद्दीन अली अहमद जैसे नेताओं ने मुसलमानों पर अत्याचार बताकर इंदिरा सरकार से खारिज करवा दिया. बी के नेहरू अपनी इस किताब नाइस गाइस फिनिश सेकंड के पेज नंबर 543 पर लिखते हैं कि मेरे कार्यकाल के दौरान अवैध घुसपैठियों को निकालने के प्रयास शुरू हुए थे लेकिन फकरुद्दीन अली अहमद, मोइनुल हक चौधरी और डी के बरुआ ने दिल्ली में जाकर यह शोर मचाया कि असम में मुसलमानों पर अत्याचार किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने इस शोर का समर्थन किया क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान से आए मुसलमान कांग्रेस के लिए वोट बैंक थे.

Topics: कैबिनेट मिशन योजनाविभाजन इतिहासAssam illegal infiltration historyGopinath Bordoloi role AssamJawaharlal NehruNehru on Assam immigrationपूर्वी पाकिस्तानJinnah Assam planMuhammad Ali JinnahCabinet Mission Assam controversyअवैध घुसपैठEast Pakistan migration issueSardar Vallabhbhai Pateldemographic change in Assam analysisAssamजनसांख्यिकी परिवर्तनGopinath Bordoloi
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

बिहू, माजुली की वैष्णव संस्कृति को यूनेस्को मान्यता दिलाने की दिशा में असम सरकार का बड़ा कदम…

अमित शाह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री

भारत की स्मार्ट बॉर्डर प्रणाली सबसे आधुनिक होगी, अवैध घुसपैठ है जनसांख्यिकीय परिवर्तन का प्रमुख कारण : अमित शाह

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

भारत के संसाधन सिर्फ भारतीयों के लिए: अवैध घुसपैठ पर मोदी सरकार की सख्ती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नेहरू को पीछे छोड़ PM मोदी इतिहास रचने की दहलीज पर

विशेष रिपोर्ट : अभेद्य द्वार, निर्णायक वार

Somnath Temple History

सोमनाथ अमृत महोत्सव: बार-बार टूटा, फिर भी नहीं झुका सोमनाथ मंदिर

Load More

ताज़ा समाचार

1996 Dausa Bus Bomb Blast Case Supreme Court Verdict Rajasthan News Abdul Hamid Justice Panchjanya

14 मौतें, 30 साल का इंतजार और फिर निराशा: आतंक के बाद भी छूट रहे हैं आतंकी, दौसा बस ब्लास्ट केस के फैसले पर बड़े सवाल!

Puri Rath Yatra Hera Panchami Gundicha Temple Adap Mandap Darshan Lord Jagannath Mata Laxmi Panchjanya

पुरी रथयात्रा: हेरा पंचमी पर गुंडिचा मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जानिए क्यों माता लक्ष्मी ने तोड़ा महाप्रभु का रथ

Delhi Sansad Chalo Violence Leaked WhatsApp Chats CJP JNU Sansad Chalo Briar BitChat Panchjanya

“मौत हुई तो सरकार पर बढ़ेगा प्रेशर”: CJP ‘संसद चलो’ प्रदर्शन में हिंसा की साजिश? लीक व्हाट्सएप चैट्स में बड़ा खुलासा

Delhi Jantar Mantar Protests vs National Sentiment Skyroot Vikram 1 Parliament Indian Democracy Panchjanya

क्या जंतर-मंतर पर जुटती भीड़ ही देश का सच है? जानिए विरोध प्रदर्शन और ‘राष्ट्रीय भावना’ के बीच का पूरा फर्क!

जंतर-मंतर से ग्राउंड रिपोर्ट

“लाइट, कैमरा और आंदोलन”: छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर फिर एक्टिव हुई टूलकिट? जानिए जंतर-मंतर के पीछे का पूरा सच!

Punjab and Haryana High Court PIL against Sacrilege Law 2026

पंजाब के अबोहर में लहराया भाजपा का परचम: हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा हुए चुनाव में AAP को झटका, मेयर पद पर कब्जा!

Foreign Tourists Praise India Safety Over London Phone Theft Medical Tourism Free Rabies Vaccine Digital Payment UPI Panchjanya

“लंदन से ज्यादा सुरक्षित है भारत”, विदेशी महिला पर्यटक ने सोशल मीडिया पर शेयर किया आंखों देखा सच!

प्रतीकात्मक चित्र

Madarsa Scandal: कागजों पर चल रहे मदरसे, हिंदुओं के बच्चों का दिखाया दाखिला, MP के मदरसों में बाल अधिकारों का उल्लंघन

Explainer। भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, नेपाल ने 1 रुपए के सिक्के से हटाया ‘कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा’

Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami Haridwar Kanwar Yatra 2026 Review Meeting Mela Bhawan Panchjanya

कांवड़ यात्रा 2026: 30 जुलाई से शुरू होगी यात्रा, हरिद्वार में सीएम धामी ने दिए सुरक्षा और सुविधाओं के सख्त निर्देश!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies