सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को मुफ्त बिजली देने के वादे पर खरी-खोटी सुनाई है। कोर्ट ने इसे ‘फ्रीबी पॉलिटिक्स’ का हिस्सा बताते हुए कहा कि ऐसे वादे देश की अर्थव्यवस्था और विकास को नुकसान पहुंचाते हैं। ये बातें गुरुवार को हुई सुनवाई में सामने आईं, जब तमिलनाडु की पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी। इतना ही नहीं मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जब सब कुछ फ्री में ही दे दिया जाएगा तो लोग काम ही क्यों करेंगे?
मामला क्या है?
तमिलनाडु की DMK सरकार ने बिजली बोर्ड के जरिए ऐलान किया था कि राज्य में सभी उपभोक्ताओं को, उनकी आर्थिक स्थिति चाहे जो हो, फ्री बिजली दी जाएगी। इसी से जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में आई, जिसमें 2024 के इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स की एक धारा को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार और बाकी पक्षों को नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमलया बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने की।
कोर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, “इस तरह की लार्जेस (मुफ्तखोरी) बांटने से देश का आर्थिक विकास रुक जाएगा।” उन्होंने पूछा, “राज्य का फर्ज है मदद करना, लेकिन जो फ्रीबी ले रहे हैं, क्या उन्हें भी देखना नहीं चाहिए?” उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “हम जानते हैं कि कुछ राज्यों में बड़े जमींदार भी फ्री बिजली लेते हैं। लाइट जलाए रखते हैं, मशीनें चलाते हैं। अगर कोई सुविधा चाहिए तो उसके लिए पेमेंट करो। लेकिन ये पैसा आखिर कौन देगा? ये तो टैक्सपेयर्स का पैसा है!” कोर्ट ने ये भी कहा कि ज्यादातर राज्य राजस्व घाटे में चल रहे हैं, फिर भी फ्रीबी दे रहे हैं और विकास को नजरअंदाज कर रहे हैं।
फ्रीबी संस्कृति पर चिंता
चीफ जस्टिस ने कहा कि ये सिर्फ तमिलनाडु की बात नहीं है, बल्कि पूरे देश की समस्या है। “सभी राज्य ऐसा कर रहे हैं। ये प्लान्ड एक्सपेंडिचर है। बजट में प्रपोजल क्यों नहीं डालते और जस्टिफाई क्यों नहीं करते कि ये बेरोजगारी वालों के लिए खर्च है?” जस्टिस बागची ने भी कहा, “ये एक राज्य की बात नहीं, सभी राज्यों की है।” कोर्ट ने हाल की कुछ चुनावों का जिक्र किया, जहां वोट से ठीक पहले वेलफेयर स्कीम्स का ऐलान हो जाता है। CJI ने कहा, “हमें पता है कुछ राज्यों में हाल के चुनावों में क्या हुआ। वेलफेयर स्कीम्स अचानक घोषित कर दी जाती हैं।”
सब मुफ्त मिलेगा तो लोग क्यों काम करेंगे
चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि राज्य लोगों के लिए रोजगार के रास्ते खोलने पर फोकस करें, न कि फ्री में खाना, साइकिल या बिजली बांटने पर। उन्होंने कहा, “अगर सुबह से शाम तक फ्री खाना दो, फिर फ्री साइकिल, फिर फ्री बिजली तो लोग काम ही क्यों करेंगे? वर्क कल्चर का क्या होगा?” कोर्ट ने ये भी पूछा कि तमिलनाडु ने बिजली टैरिफ तय होने के बाद अचानक फ्री बिजली का फैसला क्यों लिया? इससे डिस्कॉम्स को टैरिफ और बजट एडजस्ट करने में दिक्कत हुई।
















