भारत की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल वित्तीय घोटालों के एक आरोपी को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। खास बात यह है कि इस मामले की सुनवाई करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली एक विशेष पीठ ने बेहद सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि साइबर अपराधी समाज के लिए परजीवी (Parasites) की तरह हैं, जो भोले-भाले लोगों की जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई को चट कर जाते हैं। चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला और आखिर क्यों मुख्य न्यायाधीश को इतनी कठोर टिप्पणी करनी पड़ी?
CJI ने क्यों की इतनी सख्त टिप्पणी?
दरअसल, पूरे भारत में साइबर क्राइम्स के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और ऐसे मामलों न्याय मिलना बहुत ही कठिन है। ऐसे ही एक केस में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आज मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आरोपी सहित उसके वकीलों को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने कहा, ‘तुम लोग परजीवी हो जो आम निवेशकों को धोखा देकर उनके करोड़ों रुपए ठग लेते हो। साइबर अपराधियों के लिए हमें बहुत कठोर होना ही पड़ेगा। तुम्हारे शिकार हमेशा पैन-इंडिया (पूरे भारत में) होते हैं। तुम किसी को तमिलनाडु में चूना लगाते हो और फिर जम्मू भाग जाते हो…। समाज का हित इसी में है कि तुम जैसे लोग जेल के अंदर ही रहें।’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि डिजिटल स्कैमर्स किस तरह देश के कानूनी ढांचे और राज्य की सीमाओं का दुरुपयोग करते हैं। कोर्ट ने बताया कि ये साइबर सिंडिकेट जानबूझकर अपने नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों (जैसे कॉलिंग सेंटर, बैंक खाते और पैसे निकालने के ठिकाने) को देश के अलग-अलग राज्यों और कोनों में बिखेर कर रखते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि किसी एक राज्य की स्थानीय पुलिस के लिए पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ना और तफ्तीश करना बेहद पेचीदा और मुश्किल हो जाए।
क्या था मामला?
पीठ ने अंबाला के एक बुजुर्ग दंपत्ति द्वारा मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र के बाद ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर स्वतः संज्ञान लिया था। इस बुजुर्ग दंपत्ति ने पत्र में अपने साथ हुई साइबर ठगी की एक ऐसी ही घटना का जिक्र किया था जिसमें उन्होंने अपनी जीवन भर की जमापूंजी गंवा दी थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे मामलों से निपटने के लिए कई निर्देश जारी करते हुए CBI को पूरे भारत में डिजिटल अरेस्ट के मामलों से कड़ाई से निपटने के लिए पूरी छूट दे दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया सख्त संदेश
अदालत ने कहा कि जब तक एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में सुराग ढूंढती है तब तक ये ठग डिजिटल माध्यमों से लूटी गई रकम को कहीं और ट्रांसफर कर देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के जरिए देश की सभी निचली अदालतों को एक बहुत बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। वह यह कि साइबर अपराधों को अब सामान्य या हल्के आर्थिक मामलों के रूप में नहीं देखा जा सकता। इन डिजिटल चोरियों का सामाजिक प्रभाव बड़ी डकैतियों जितना ही खतरनाक है। ऐसे मामलों में जमानत देने से पहले अदालतों को इसके समाज पर होने असर कोभी ध्यान में रखना होगा। इससे किसी और के इनके चंगुल में फंसने से बचाया जा सकेगा।
तेजी से बढ़ रहे हैं साइबर क्राइम्स
यह टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पूरे भारत में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से उछाल आया है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 से 2023 के बीच साइबर अपराध के मामलों में लगभग 63 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। यह संख्या 86000 के आंकड़े को पार कर गई है। इस सूची में कर्नाटक में सबसे अधिक साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए। इसके बाद तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान रहा। CJI की सख्त टिप्पणी का एक कारण यह भी है क्योंकि इससे अदालतों पर भी कम का बोझ बढ़ता जा रहा।
















