एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका की कार्यशैली को लेकर एक पाठ रखा, जिस पर बवाल खड़ा हो गया है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वकीलों का कहना है कि न्यायपालिका के भ्रष्टाचार को पढ़ाना गलत है।
किताब में क्या लिखा है
किताब का नाम है ‘Exploring Society: India and Beyond’ (भाग 2)। इसमें एक अध्याय है ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ यानी ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’। इस अध्याय में न्यायपालिका के कामकाज के साथ-साथ उसकी चुनौतियों का भी जिक्र किया गया। उन चुनौतियों में मुख्य रूप से दो बातें बताई गईं – मुकदमों का बहुत बड़ा बैकलॉग (जो जजों की कमी, जटिल प्रक्रियाओं और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से है) और न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार। किताब में यह भी लिखा कि जज आचार संहिता से बंधे होते हैं और शिकायतों के लिए CPGRAMS जैसी व्यवस्था है।
यह सामग्री बच्चों को न्याय व्यवस्था की हकीकत से रूबरू कराने के इरादे से लिखी गई लगती है, लेकिन इसमें न्यायपालिका को लेकर इस्तेमाल किए गए शब्दों ने विवाद खड़ा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में मामला कैसे पहुंचा
मंगलवार को इंडियन एक्सप्रेस में इस अध्याय की खबर छपी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे को तुरंत उठाया। उन्होंने कहा कि कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पढ़ाना गलत है और यह संस्था की इमेज को नुकसान पहुंचाता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया।
CJI सूर्यकांत ने काफी सख्त लहजे में कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता और गरिमा को ठेस पहुंचाने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने इसे “गहरा और सोचा-समझा कदम” बताया और कहा कि बार और बेंच दोनों ही इस बात से परेशान हैं। CJI ने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति या संस्था पृथ्वी पर न्यायपालिका को कलंकित नहीं कर सकती, और वे इसकी इजाजत नहीं देंगे।
NCERT की तरफ से क्या हुआ
विवाद बढ़ते ही NCERT ने तुरंत एक्शन लिया। किताब सोमवार को जारी हुई थी और NCERT काउंटर से सिर्फ 38 प्रतियां बिकीं। मंगलवार से बिक्री पूरी तरह रोक दी गई। NCERT ने उन 38 खरीदारों से संपर्क किया और किताबें वापस मांग लीं। 16 किताबें वापस मिल चुकी हैं। बाकी के लिए UPI या बैंक डिटेल्स मांगकर कोशिश की जा रही है।
NCERT ने अपनी वेबसाइट से किताब हटा दी और वितरण पर रोक लगा दी। बुधवार को NCERT ने आधिकारिक माफी जारी की। इसमें कहा गया कि अध्याय में कुछ अनुचित सामग्री और फैसले की गलती अनजाने में शामिल हो गई। यह पूरी तरह गलती से हुई और न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानते हुए वे इसकी इजाजत नहीं देते। किताब को वापस लिया जा रहा है और उपयुक्त अधिकारियों से सलाह लेकर अध्याय को फिर से लिखा जाएगा।
















