भारत और यूरोप मुक्त व्यापार संधि के कगार पर हैं। दावोस में यह खुलासा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने किया। उर्सुला का मानना है कि इस समझौते से 2 अरब लोगों का एक विशाल व्यापार ब्लॉक निर्मित होगा, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से को कवर करेगा। उन्होंने भारत को ‘तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था’ बताते हुए संधि को ऐतिहासिक बताया। उर्सुला का यह बयान देश की सबसे बूढ़ी पार्टी कांग्रेस के ‘युवराज’ के उस बयान को झुठलाता है, जो उन्होंने संसद के अहाते में खड़े होकर दिया था। राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर में सुर मिलाते हुए भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ (मृत अर्थव्यवस्था) कहा था। यह देश के लिए अपमानजनक था।
भारत-ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते की विदेशी अखबारों ने भी प्रशंसा की है। गल्फ न्यूज ने उर्सुला के बयान को विस्तार से प्रकाशित किया है। रिपोर्ट के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उर्सुला की तस्वीर भी छपी है। इसमें उर्सुला के हवाले से कहा गया है कि यूरोपीय संघ भारत के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। इस समझौते का कितना महत्व है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि उर्सुला ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया है। किसी विदेशी नेता द्वारा की गई यह प्रशंसा मोदी सरकार के वादे को मजबूत करती है कि भारत जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। यह देश के लिए गर्व की बात है।
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक के बीच यूरोपीय संघ की अध्यक्ष द्वारा यह कहना कि यह संधि दुनिया की सबसे बड़ी व्यापार संधियों में से एक होगी, बड़ी बात है। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘दावोस के बाद मैं भारत जाऊंगी। अभी भी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की कगार पर हैं। यह कदम दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और गतिशील महाद्वीपों में से एक, यानी भारत के साथ यूरोप को ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ प्रदान करेगा। आज यूरोप इस सदी की आर्थिक महाशक्तियों के साथ व्यापार करना चाहता है।’’ उनकी यह बात इस ओर संकेत करती है कि भारत महाशक्तियों में से एक है और तेजी से विकास कर रहा है। बता दें कि उर्सुला 25 जनवरी को तीन दिवसीय दौरे पर भारत आ रही हैं।
क्या है ईयू-भारत व्यापार समझौता
यूरोपीय संघ और भारत एक दशक से अधिक समय से व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसकी शुरुआत 2007 में हुई थी। लेकिन बाजार पहुंच, टैरिफ, डेटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा श्रम व पर्यावरण मानकों पर मतभेदों के कारण 2013 में यह बातचीत थम गई थी। साल 2022 में बातचीत औपचारिक रूप से फिर से शुरू हुई, क्योंकि दोनों पक्ष स्वाभाविक रूप से चीन पर निर्भरता कम करना चाहते थे। समझौते का लक्ष्य उत्पादों पर टैरिफ को न्यूनतम या खत्म करना, सेवाओं के लिए बाजार पहुंच को आसान बनाना, निवेश प्रवाह को बढ़ावा देना, डिजिटल व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, विनिर्माण और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।
वर्तमान में यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है, जबकि भारत ऑटोमोबाइल, विमानन, फार्मास्यूटिकल्स, लग्जरी सामान, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में यूरोपीय कंपनियों के लिए एक प्रमुख विकास बाजार है। यह संधि भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
















