अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने हाल ही में एक विधेयक भारी बहुमत से पारित किया है। इसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रावधान है। भारत भी उन पांच देशों में शामिल है जिन पर यह लागू हो सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा है कि अगर यह लागू हुआ तो भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर असर पड़ सकता है। अमेरिका भारतीय माल का सबसे बड़ा बाजार है।
बिल क्या कहता है और आगे क्या होगा
सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव पास किया है। यह विधेयक सितंबर में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में जाएगा। अगर वहां भी पास हो गया तो राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा। हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा। यह बिल मुख्य रूप से यूक्रेन पर रूस के हमले के जवाब में लाया गया है। मकसद रूस को आर्थिक रूप से दबाव में लाना है। बिल में कहा गया है कि जो देश रूसी कच्चा तेल या गैस बड़े पैमाने पर खरीदते रहेंगे, उनके माल पर अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। यह टैरिफ 100 प्रतिशत तक हो सकता है।
भारत क्यों प्रभावित हो सकता है
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूस से काफी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है। जीटीआरआई के अनुसार 2026 में भारत ने रूस से करीब 40.08 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा है। चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। इस सस्ते तेल की वजह से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम ज्यादा नहीं बढ़े और महंगाई कुछ हद तक काबू में रही।
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लेकिन, अब अगर अमेरिकी बिल कानून बन जाता है और भारत रूसी तेल खरीदता रहता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद बहुत महंगे पड़ सकते हैं। नतीजा यह हो सकता है कि उनकी बिक्री मुश्किल हो जाए और निर्यात घटे।
GTRI की क्या राय है?
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि चीन भारत से ज्यादा रूसी तेल खरीदता है, फिर भी भारतीय माल पर टैरिफ का खतरा ज्यादा है। वजह यह है कि चीनी सामान की किस्में ज्यादा हैं और अमेरिका में उनकी मांग भी मजबूत है। भारतीय निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ सकता है क्योंकि अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है।
बिल अभी कानून नहीं बना है। प्रतिनिधि सभा में चर्चा सितंबर में होनी है। अगर वहां भी मंजूरी मिल गई और राष्ट्रपति ने साइन कर दिया, तभी यह लागू होगा। फिलहाल GTRI ने यही आशंका जताई है कि रूसी तेल खरीद जारी रखने की स्थिति में भारतीय निर्यात को झटका लग सकता है।















