"यह है घोर असहिष्णुता" : हैदराबाद यूनिवर्सिटी में बौखलाए वामपंथियों ने नीरजा माधव को घेरा, लगाए मोदी और RSS विरोधी नारे
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“यह है घोर असहिष्णुता” : हैदराबाद यूनिवर्सिटी में बौखलाए वामपंथियों ने नीरजा माधव को घेरा, लगाए मोदी और RSS विरोधी नारे

हैदराबाद विश्वविद्यालय में सेमिनार के दौरान लेखिका नीरजा माधव द्वारा सनातन संस्कृति और थर्ड जेंडर पर विचार रखने पर वामपंथी छात्र संगठनों ने किया घेराव, गाड़ी रोककर की हिंसक नारेबाजी

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jan 21, 2026, 11:37 pm IST
in भारत, तेलंगाना

हैदराबाद । सनातन संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रति घृणा की एक अफसोसनाक मिसाल विगत दिनों 20 जनवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित सेमिनार में देखने को मिली, जहां प्रख्यात लेखिका नीरजा माधव को विरोध और हिंसक नारेबाजी का सामना करना पड़ा।

थर्ड जेंडर विषय पर व्याख्यान के लिए आमंत्रण

उल्लेखनीय है कि डॉ. नीरजा माधव को थर्ड जेंडर विमर्श पर व्याख्यान देने हेतु हैदराबाद विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया गया था। वहां पहुंचने पर आयोजकों ने भारतीय संस्कृति की प्रखर चिंतक नीरजा माधव से अनुरोध किया कि वे भारतीय संस्कृति पर भी अपना एक व्याख्यान दें।

भारतीय संस्कृति और थर्ड जेंडर पर व्याख्यान

‘भारतीय संस्कृति और थर्ड जेंडर’ विषय पर व्याख्यान देने के बाद प्रश्न उत्तर काल में उपस्थित कुछ छात्रों ने होमो सेक्सुअल और लेस्बियन पर आधारित प्रश्न करते हुए कहा कि मनुस्मृति में समलैंगिकता का संदर्भ है जिसके आधार पर उन्हें कानूनी मान्यता मिली है।

मनुस्मृति और समलैंगिकता पर जवाब

उनके प्रश्न का जवाब देते हुए नीरजा माधव ने जब कहा कि लेस्बियन और होमोसेक्सुअलिटी किसी की मानसिक आवश्यकता हो सकती है और आपकी अपनी इच्छा भी हो सकती है लेकिन यह थर्ड जेंडर जैसी समस्या नहीं है। थर्ड जेंडर प्रकृति के एक क्रूर मजाक के कारण अभिशप्त जीवन जीते हैं।

मनुस्मृति पढ़ने पर सवाल

नीरजा माधव ने सभागार में उपस्थित छात्रों से यह भी पूछा कि आप लोगों में से ओरिजिनल मनुस्मृति को किसने पढ़ा है, कृपया हाथ उठाएं। कोई हाथ नहीं उठा। किसी ने नहीं पढ़ा था। नीरजा माधव ने कहा कि किसी भी पुस्तक, ग्रंथ या शास्त्र का खंडन करने से पहले उसका अध्ययन करना आवश्यक होता है।

सत्र समाप्ति के बाद उग्र विरोध

सत्र समाप्त होने के 1 घंटे के भीतर ही विश्वविद्यालय के आइसा और एसएफआई संगठन के सैकड़ो छात्रों ने हाथों में बैनर लहराते हुए नारे लगाते हुए नीरजा माधव की कार को घेर लिया और उनसे माफी मांगने की जिद करने लगे।

माफी मांगने से इनकार और नारेबाजी

नीरजा माधव ने कार से निकलकर उनकी इस मांग का प्रतिरोध किया और कहा कि जब मैंने कोई गलत बात कही ही नहीं तो फिर किस बात के लिए माफी? यह तो संभव ही नहीं है कि मैं माफी मांगू। मैंने जो भी बातें कही हैं, वह सत्य कहीं है। आपकी असहमति हो सकती है। इस पर छात्र उग्र होकर मोदी विरोधी, संघ विरोधी नारे लगाने लगे।

सुरक्षाकर्मियों द्वारा सुरक्षित निकासी

15-20 मिनट के अंदर वहां विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में आए और नीरजा माधव की कार को सुरक्षित निकलवाया।

हैदराबाद विश्वविद्यालय का पूर्व रिकॉर्ड

यह भी ज्ञातव्य है कि हैदराबाद विश्वविद्यालय प्रायः किसी भी भारतीय संस्कृति के लेखक या वक्ता को वामपंथी विचारधारा के लोगों ने मंच से कुछ बोलने नहीं दिया है। यह पहला अवसर था जब नीरजा माधव ने डंके की चोट पर वहां मंच से आइसा और एसएफआई के छात्रों के बीच भी भारतीय संस्कृति की बातें पुरजोर ढंग से रखीं।

हिंदी भाषा को लेकर विवाद

इतना ही नहीं, प्रश्न काल के दौरान एक छात्रा ने जब उनसे अंग्रेजी में प्रश्न करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि आप हिंदी की विद्यार्थी हैं तो मुझसे हिंदी में बात करिए। इस पर भी उस छात्रा ने प्रतिरोध किया।

निंदनीय घटना पर प्रतिक्रिया

घटना की निंदा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि यह घोर असहिष्णुता का परिचायक है कि एक लेखक की अभिव्यक्ति की आजादी भी छीन ली जाए। भारतीय विश्वविद्यालयों में इस प्रकार की मानसिकता को पनपने देना यानी राष्ट्र को कमजोर करना है।

उन्होंने कहा संविधान की बात करना और उसका पालन करना दो भिन्न बातें हैं। वामपंथियों से सच हजम नहीं होता इसलिए वे हिंसा पर उतर आते हैं।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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