तीस जुलाई को महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले में युवाओं ने विशाल ‘राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा’ निकाली। इस यात्रा के माध्यम से युवाओं ने अपनी एकजुटता दिखाई। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित पेपर लीक मुद्दे की आड़ में फैलाई गई अराजकता, हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियों और देश के वीर सैनिकों के अपमान के विरोध में महाराष्ट्र के रत्नागिरि में जनाक्रोश देखने को मिला। इसके विरोध में ‘संविधान सम्मान मंच’ के बैनर के अंतर्गत हजारों नागरिकों और युवाओं ने एकजुट होकर विशाल ‘राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा’ निकाली। इस मौन पदयात्रा में बड़ी संख्या में युवाओं और नागरिकों ने भाग लेकर राष्ट्रहित, संविधान के सम्मान और देश के सांस्कृतिक स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपनी अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया।
यह पदयात्रा मारुति मंदिर से शुरू होकर आंबेडकर प्रतिमा स्थल पर समाप्त हुई। मौन पदयात्रा में शामिल लोग अपने हाथों में तिरंगे और संविधान के प्रति सम्मान प्रकट करती पट्टिकाएं लिए हुए थे। यह जनसैलाब बिना किसी नारे के शांत एवं अनुशासित तरीके से मौन धारण कर शहर की मुख्य सड़कों से गुजरा। इस अवसर पर उपस्थित प्रबुद्धजनों और युवाओं ने संविधान की मर्यादा बनाए रखने की शपथ ली।
संविधान सम्मान मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में जिस तरह से असामाजिक तत्वों ने धार्मिक भावनाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों को ठेस पहुंचाने का काम किया, उसने पूरे देश में आक्रोश फैलाया है।
समापन सभा में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि देश का संविधान जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, वहीं राष्ट्र की अखंडता, सेना के सम्मान और धार्मिक सद्भाव की रक्षा का कर्तव्य भी सिखाता है। इस अवसर पर छात्र प्रतिनिधि अजिंक्य केसकर ने कहा कि इस पदयात्रा का आयोजन उन प्रवृत्तियों के विरोध में किया गया है, जो नीट परीक्षा के मुद्दे को बहाना बनाकर देश में अराजकता फैला रही हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रही हैं। जबकि छात्र प्रतिनिधि और महापौर शिल्पा सर्वे ने कहा कि जेन जी पीढ़ी राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति जागरूक है और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर दक्षिण रत्नागिरि जिले के भाजपा अध्यक्ष प्रशांत यादव ने कहा कि रत्नागिरि में इस मौन पदयात्रा के माध्यम से नागरिकों ने संविधान और राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की है। यह किसी एक पार्टी का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि अंतर्धार्मिक सद्भाव, समावेशिता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाली एक पहल है। विभिन्न मतों, समाजों और राजनीतिक विचारधाराओं का एक साथ होकर संविधान के मूल्यों को संरक्षित करने का संकल्प इस पदयात्रा के माध्यम से व्यक्त किया गया।

















