गत 12 जनवरी को रांची में सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित हुई। इसमें समाज के विभिन्न संगठनों, जाति-बिरादरी एवं समुदायों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक का उद्देश्य समाज में व्याप्त समसामयिक समस्याओं पर संवाद स्थापित करना तथा सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर विचार करना था।
बैठक के प्रथम सत्र में समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यों की जानकारी दी। साथ ही समाज के सामने आ रही चुनौतियों को भी साझा किया। इनमें प्रमुख रूप से कन्वर्जन, घुसपैठ, नशाखोरी, अशिक्षा, अंधविश्वास, परस्पर सहयोग की कमी, लव-जिहाद जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए प्रश्नों एवं विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों में पूर्व नियोजित तरीके से चर्च से जुड़े लोगों का प्रवेश कराया गया तथा हिंदू धर्मगुरुओं को रोकने का प्रयास हुआ।
उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में तथाकथित ‘3-डी समस्या’ का उल्लेख किया, जिसमें ‘धर्मांतरण, डी.जे. संस्कृति और दारू’ को शामिल बताया। उन्होंने कन्वर्जन की समस्या को दूर करने के उपायों पर कहा कि समाज में परस्पर सहयोग, छुआछूत एवं जातिगत भेदभाव से दूरी, ऊंच-नीच की भावना त्यागने तथा हिंदू समाज की जनसंख्या सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उन्होंने घर-वापसी के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि धर्मजागरण समाज का कार्य है, जिसे समाज को स्वयं करना होगा।
जातिवाद पर उन्होंने कहा कि हमारा जन्म किस परिवार या जाति में होगा, यह हमारे हाथ में नहीं होता, फिर हम जातिवाद क्यों करते हैं? किसी भी जाति को नीचा या ऊंचा नहीं समझना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि दिव्यांग बच्चों को समाज के आर्थिक रूप से सक्षम परिवार गोद लें। समाज के विभिन्न समूह ऐसे बच्चों की सहायता करें। बांग्लादेशी घुसपैठ के विषय पर उन्होंने कहा कि घुसपैठ के माध्यम से लंबे समय तक राजनीतिक लाभ उठाया जाता रहा है। आज बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।
















