महाराणा प्रताप का जीवन लोककल्याण, आदर्श शासन और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा का उदाहरण है : सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत
October 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम संघ @100

महाराणा प्रताप का जीवन लोककल्याण, आदर्श शासन और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा का उदाहरण है : सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत

सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत का समाज कभी भी स्वेच्छा से पराधीनता स्वीकार करने वाला समाज नहीं रहा। जब-जब विदेशी आक्रांताओं ने इस भूमि पर अधिकार करने का प्रयास किया, तब-तब प्रतिरोध की अग्नि प्रज्ज्वलित हुई

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 17, 2026, 10:34 pm IST
inसंघ @100, राजस्थान
श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

उदयपुर। हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर गांधी ग्राउंड में प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के तत्वाधान में ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ का आयोजन हुआ। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत का इतिहास पराधीनता का नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध निरंतर चले संघर्ष, प्रतिरोध और आत्मगौरव का इतिहास है। हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो सेनाओं का युद्ध नहीं था, बल्कि राष्ट्रचेतना और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संपूर्ण समाज द्वारा लड़ा गया महासंग्राम था।

 

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथिगण

 

हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती समारोह में उन्होंने कहा कि युद्ध के उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों, समकालीन स्रोतों और स्वयं मुगल इतिहासकारों के वर्णनों से स्पष्ट होता है कि युद्ध के विभिन्न चरणों में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा। यदि युद्ध के बाद भी शत्रु भय और असुरक्षा की स्थिति में रहा, तो वास्तविक विजय किसकी थी, इसका निर्णय इतिहास स्वयं करता है।

उन्होंने युद्ध के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की सेना के पहले ही आक्रमण ने मुगल सेना को दूर तक पीछे हटने के लिए विवश कर दिया था। चेतक के अद्भुत पराक्रम, प्रताप की युद्धनीति और सैनिकों के आत्मबल ने सीमित संसाधनों के बावजूद विशाल साम्राज्य की सैन्य शक्ति को चुनौती दी। महाराणा प्रताप की सेना में केवल राजवंश या योद्धा वर्ग नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज खड़ा था। जाति, पंथ, क्षेत्र और सामाजिक भेदों से ऊपर उठकर समाज राष्ट्ररक्षा के लिए एकजुट हुआ था।

 

कार्यक्रम में उपस्थित जन समूह

राष्ट्र अपने वास्तविक नायकों को कभी नहीं भूलता

सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत का समाज कभी भी स्वेच्छा से पराधीनता स्वीकार करने वाला समाज नहीं रहा। जब-जब विदेशी आक्रांताओं ने इस भूमि पर अधिकार करने का प्रयास किया, तब-तब प्रतिरोध की अग्नि प्रज्ज्वलित हुई। उन्होंने बप्पा रावल, ललितादित्य, महाराणा प्रताप और अन्य वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आत्मा को पराजित करना किसी भी आक्रांता के लिए संभव नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि इतिहास को कई बार सत्ता के निकट रहने वालों ने अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया, जिसके कारण अनेक राष्ट्रीय नायकों के योगदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। हल्दीघाटी के युद्ध के संदर्भ में भी तथ्यों की पुनर्समीक्षा आवश्यक है। जिस महाराणा प्रताप की जयंती आज पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है, वही इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि राष्ट्र अपने वास्तविक नायकों को कभी नहीं भूलता।

“दुनिया में कहीं अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, जबकि महाराणा प्रताप का स्मरण आज भी जन-जन करता है। इतिहास का यह लोकनिर्णय स्वयं बताता है कि विजय किसकी हुई थी।”

भारत की शक्ति एकता, समरसता और आत्मविश्वास में निहित

उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप को ‘हिंदुआ सूरज’ यूं ही नहीं कहा गया। उन्होंने अपने धर्म, संस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनका जीवन सत्ता प्राप्ति का नहीं, बल्कि लोककल्याण, आदर्श शासन और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा का उदाहरण है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसा आदर्श स्थापित किया जो आज भी राष्ट्र जीवन को प्रेरणा देता है। सरसंघचालक ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी एकता, समरसता और आत्मविश्वास में निहित है। केवल संकट के समय ही नहीं, बल्कि सामान्य परिस्थितियों में भी समाज को संगठित और जागृत रहना होगा। स्वाभिमान और ‘स्व’ का भाव जब तक जीवित रहेगा, तब तक भारत हर चुनौती का सामना करते हुए विजय की नई गाथाएं रचता रहेगा। सभी नागरिक महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रोत्थान, समाज संगठन और विश्वकल्याण का संकल्प लें। भारत का उत्थान ही विश्व के कल्याण का मार्ग है और इसी दिशा में कार्य करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

हल्दीघाटी विजय का गौरव इतिहास की भ्रांतियों का करेगा अंत

समारोह में विशिष्ट अतिथि निम्बार्काचार्य श्रीजी श्याम शरण देवाचार्य जी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का महापर्व है। वर्षों से इतिहास के संबंध में फैलाई गई भ्रांतियों का निराकरण अब समाज के सामने हो रहा है और महाराणा प्रताप के वास्तविक गौरव को पुनः स्थापित किया जा रहा है।
मेवाड़ की भूमि शौर्य और भक्ति दोनों की पावन धरा है। एक ओर इस भूमि ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जैसे राष्ट्रनायक को जन्म दिया, वहीं दूसरी ओर भक्तिमती मीराबाई जैसी महान कृष्णभक्त को भी दुनिया को दिया। जब मातृभूमि और सनातन संस्कृति पर संकट आया, तब महाराणा प्रताप ने भगवान श्रीराम के “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” के आदर्श को आत्मसात करते हुए अपना सर्वस्व राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।

श्रीजी श्याम शरण जी ने कहा कि राष्ट्रभक्ति की यही चेतना समय-समय पर विभिन्न रूपों में प्रकट होती रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” की भावना के साथ मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने समाज से जाति, वर्ग और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश देती है।

हल्दीघाटी विजय का सत्य जन-जन तक पहुंचाना होगा

समारोह की अध्यक्षता करते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हल्दीघाटी युद्ध के वास्तविक इतिहास को जन-जन तक पहुंचाया जाए और उन भ्रांतियों का निराकरण किया जाए जो वर्षों से समाज में प्रचारित की जाती रही हैं। इस वर्ष महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पूर्ण होने का दुर्लभ संयोग बना है, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया है। उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप ने मुगल सेना को परास्त कर स्वाधीनता, स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया था।
उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच संघर्ष नहीं था, बल्कि विदेशी साम्राज्यवादी शक्तियों के विरुद्ध भारतीय अस्मिता की रक्षा का महान अभियान था। मेवाड़ ने कभी भी विदेशी सत्ता के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया और अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखा। समाज के सभी वर्ग अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर हल्दीघाटी विजय के ऐतिहासिक सत्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं।
उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रशासन, मीडिया, सामाजिक संगठनों एवं हजारों कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रचेतना के नवजागरण का ऐतिहासिक अभियान बताया।

प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने सभी का स्वागत करते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति व समिति के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केन्द्र का परिचय दिया। प्रताप गौरव केंद्र में श्रव्य दृश्य प्रदर्शनी से महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध में हार होने के विमर्श को तोड़ा गया है और महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध में विजय होने के विमर्श को स्थापित किया गया है। हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु: शती समारोह के तहत वर्ष भर हुए आयोजनों की जानकारी भी दी।

राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में मेवाड़-वागड़ के कई संत-महंतों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। मेवाड़ राजपरिवार के महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ भी उपस्थित रहे।

 

Topics: महाराणा प्रतापमहाराणा प्रताप महानहल्दीघाटी युद्ध 450 वर्षहल्दीघाटी विजयराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघसरसंघचालकमोहन भागवत
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

संघ पर लगे आरोपों से लेकर वंदे मातरम तक, श्री वी भागैय्या ने रखी अपनी बात

भारतीय किसान संघ के महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन में मंच पर पदाधिकारी।

‘हम भारत की नारियां वैभव लायेंगी’: दिल्ली में दिखा महिला किसानों का बुलंद हौसला, भारतीय किसान संघ ने किया सम्मान

सुशासन संवाद मुबंई में बोलते वी भागैय्या जी

सुशासन संवाद मुंबई: विश्वबंधुत्व से विश्वगुरु तक, संघ का वैश्विक दृष्टिकोण और हिन्दुत्व का संदेश

RSS Senior Pracharak MA Krishnan Passes Away

RSS के वरिष्ठ प्रचारक एम.ए. कृष्णन का निधन: सरसंघचालक जी और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने दी श्रद्धांजलि!

मणिपुर के उखरुल जिले में स्थापित ओझा शंकर विद्यालय। यह उन छात्रों के सहयोग से बना है, जिन्हें संघ प्रचारक श्री शंकर (भैयाजी) काणे ने पढ़ने के लिए महाराष्ट्र भेजा था। इसलिए इसका नामकरण उनके नाम पर किया गया है।

शिव भाव से जीव सेवा

सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने ओरिक्काई में कांची आचार्यों से की भेंट, वैदिक अनुष्ठानों और दंपती पूजन में लिया हिस्सा

Load More

ताज़ा समाचार

RSS Chief Dr Mohan Bhagwat Statement Borivali Mumbai Rashtra And Dharm Panchjanya News

भारतीय ज्ञान संपदा की संपूर्ण विश्व को जरुरत: बोरीवली में बोले सरसंघचालक जी- ‘भारत की ओर उम्मीद से देख रही दुनिया’

कल का मौसम: 3 अक्टूबर को देश के किन राज्यों में होगी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

PM मोदी से बोले कैप्टन मच्छार- हनुमानजी ने बचा लिया, जब भी दर्द में होता हूं ‘हनुमान चालीसा’ पढ़ता हूं

चित्र प्रतीकात्मक

उजड़ता पंजाब: 6 महीने में मां ने खोया दूसरा बेटा! नशे की ओवरडोज से सुनाम में युवक की मौत, परिजनों में हाहाकार

सांकेतिक चित्र

पंजाब बॉर्डर पर BSF की बड़ी कार्रवाई: तरनतारन में घुसपैठ कर रहे 2 पाकिस्तानी तस्कर ढेर, 1 अंधेरे का फायदा उठाकर फरार!

Rampur Tiraha Kand CM Pushkar Singh Dhami Tributes Uttarakhand State Activists Statue Panchjanya

रामपुर तिराहा सभा में CM धामी का बड़ा ऐलान: गांवों में लगेंगी आंदोलनकारियों की मूर्तियां, ई-लाइब्रेरी का होगा निर्माण!

Akhil Bharatiya Vyas Sangh Kashi National Convention Jagadguru Balak Devacharya Panchjanya

काशी में गरजा व्यास संघ: कन्वर्जन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z को राम भक्ति से जोड़ने का प्रस्ताव!

Uttarakhand Religious Tourism Record Pilgrims Badrinath Kedarnath Kainchi Dham CM Dhami Panchjanya

देवभूमि में टूटा रिकॉर्ड: उत्तराखंड में 1.16 करोड़ से अधिक पहुंचे श्रद्धालु, CM धामी बोले- अर्थव्यवस्था को मिली ताकत!

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

धर्म और राष्ट्र अलग नहीं…  दुनिया को भारत से है समाधान की उम्मीद: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

सड़क पर ब्रेकर बनाने के विवाद में RSS कार्यकर्ता की हत्या, दबंगों ने लाठी- डंडों से किया था हमला

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies