तमिलनाडु के मदुरै जिले में तिरुपरनकुंद्रम गांव के लोग दीप स्तंभ पर दीपक जलाने की अनुमति न मिलने पर अपने घरों के सामने दीये जलाकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे अधिकारियों से अपील कर रहे हैं कि तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के ऊपर दीपथून (पवित्र दीपक स्तंभ) पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति दी जाए।
समाचार एजेंसी एएनआई ने इसका वीडियो भी जारी किया है, जिसमें दो बच्चियां अपने घरों के बाहर रंगोली के ऊपर दीये रखकर जला रही हैं। कुछ दिन पहले मदुरै में दीपाथून पर दीप जलाने की इजाजत न मिलने को एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली थी। मृतक की पहचान पूर्णचंद्रन के रूप में हुई थी। पुलिस के अनुसार, आत्महत्या करने से पहले उसका एक ऑडियो सामने आया था, जिसमें उसने दीप जलाने की अनुमति न मिलने को लेकर गहरा तनाव होने की बात कही थी।
भगवान मुरुगन के छह पवित्र आश्रयों में से एक
तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी भगवान मुरुगन के छह पवित्र आश्रयों में से एक है। इस पहाड़ी पर एक प्राचीन चट्टान को काटकर गुफानुमा मंदिर बनाया गया है। यह तमिलनाडु के श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय से एक तीर्थस्थल रहा है। इससे कुछ ही दूरी पर एक दरगाह है। मंदिर और दरगाह की दूरी मात्र 3 किलोमीटर की है। मंदिर और दरगाह ने 1920 में पहली बार पहाड़ी पर कानूनी अधिकार को लेकर चुनौती दी थी।
क्या है कार्तिगई दीपम
दरअसल, कार्तिगई दीपम एक प्राचीन पर्व है। इसे भगवान मुरुगन के जन्मोत्सव के रूप में तमिल महीने कार्तिगई की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष 3 दिसंबर को दीप प्रज्ज्वलन के मौके पर न केवल वहां दीप जलाने से रोका गया, बल्कि श्रद्धालुओं पर पुलिस ने लाठियां भी बरसाईं। इसके बाद कार्तिगई दीपम प्रज्ज्वलित करने की मांग को लेकर लोगों ने अनशन भी किया।
पहाड़ी सुब्रमण्यस्वामी मंदिर की
एक सिविल कोर्ट ने पहले फैसला दिया था कि दरगाह से जुड़े कुछ क्षेत्रों को छोड़कर यह पहाड़ी सुब्रमण्यस्वामी मंदिर (देवस्थानम) की है। इस फैसले ने पहाड़ी के स्वामित्व का निपटारा तो कर दिया, लेकिन इसमें रीति-रिवाजों, परंपराओं और दीपम की परंपरा का उल्लेख नहीं किया गया था। इसके बाद मंदिर के पवित्र स्तंभ में दीप (कार्तिगई दीपम) जलाने की इजाजत देने वाले जस्टिस जीआर स्वामीनाथन का फैसला आया। विपक्ष ने एक न्यायाधीश के स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार को चुनौती देते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग लाने का प्रस्ताव रखा है। बीजेपी ने मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस स्वामीनाथन के फैसले को सही ठहराते हुए विपक्ष के महाभियोग लाने की आलोचना की थी।
वक्फ बोर्ड ने बताया मुस्लिमों की संपत्ति
हाल ही में तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के ऊपर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ को मुस्लिमों की संपत्ति बताया था। वक्फ बोर्ड ने मद्रास हाईकोर्ट में दावा किया था कि पत्थर का स्तंभ सिकंदर बादशाह दरगाह के अधीन आता है। जबकि यह दरगाह सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के बहुत बाद 17वीं शताब्दी में बनी थी।
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