तमिलनाडु में एक हिन्दू व्यक्ति को उसके ही घर में पूजा करने से रोककर डीएमके की सरकार ने अपनी सनातन विरोधी मानसिकता को उजागर किया। इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सरकार या अधिकारी किसी अंधविश्वास के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकते। यह मामला चेन्नई के एननोर इलाके में एक व्यक्ति के घर में रखी गई हिंदू मूर्तियों से जुड़ा है।
मामला क्या था?
मामला चेन्नई के एननोर इलाके के रहने वाले व्यक्ति ए. कार्तिक का है, जिन्होंने अपने घर में देवी शिवशक्ति दक्षिणेश्वरी, विनायक और वीरभद्र की मूर्तियां स्थापित की थीं। यह पूजा मुख्य रूप से निजी थी। कुछ इच्छुक पड़ोसी और भक्त भी इसमें शामिल हो सकते थे। इलाके में कुछ अप्राकृतिक मौतें हुईं तो स्थानीय लोगों ने इन मौतों को मूर्तियों और पूजा से जोड़ दिया। लोगों की शिकायतों पर स्थानीय प्रशासन ने मूर्तियां जब्त कर लीं और तहसीलदार कार्यालय में रख दीं। प्रशासन का कहना था कि घर को मंदिर में बदल दिया गया था, बिना इजाजत के। साथ ही रात के समय पूजा होने से शोर और परेशानी हो रही थी।
कोर्ट में क्या हुआ?
कार्तिक ने प्रशासन के खिलाफ कोर्ट का रुख किया और मूर्तियां वापस मांगी। अप्रैल 2025 में हाई कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई को गलत ठहराया और मूर्तियां लौटाने का आदेश दिया। लेकिन अधिकारी आदेश का पालन नहीं कर रहे थे, तो कार्तिक ने अवमानना याचिका दायर की।
जज ने क्या कहा?
जस्टिस डी. भरथ चक्रवर्ती ने इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य अंधविश्वास या गलत धारणाओं के आधार पर काम नहीं कर सकता। अगर कोई व्यक्ति अपने घर में मूर्ति रखकर शांति से पूजा करना चाहता है, या कुछ इच्छुक दोस्त-पड़ोसियों को बुलाकर पूजा करता है, तो बहुमत की ताकत से या अंधविश्वास के चलते उसे रोका नहीं जा सकता। जज ने कहा, “भगवान या मूर्ति कभी किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाती। ऐसी मान्यताएं सिर्फ अंधविश्वास हैं, जो न भक्ति से मेल खाती हैं और न ही विज्ञान से।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान राज्य को यह जिम्मेदारी देता है कि वह लोगों में वैज्ञानिक सोच पैदा करे। अधिकारियों को ऐसे अंधविश्वास के आगे नहीं झुकना चाहिए। अगर कोई निर्माण बिना इजाजत का हुआ है, तो उसके लिए अलग से कानूनी कार्रवाई हो सकती है, लेकिन पूजा रोकने का आधार नहीं बन सकता।
कोर्ट का फाइनल फैसला
कोर्ट ने मूर्तियां तुरंत वापस करने का निर्देश दिया। कार्तिक को तहसीलदार कार्यालय से मूर्तियां लेने की इजाजत दी गई। लेकिन कुछ शर्तें भी लगाई गईं कि लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं होगा। कोई शोर-शराबा या पड़ोसियों को परेशानी नहीं होगी। इसके साथ ही पब्लिक से चंदा या पैसे नहीं इकट्ठा किए जाएंगे। वहीं कुछ असामाजिक तत्वों ने मूर्तियां वापस करने पर हिंसा की धमकी दी थी, जिसे देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पुलिस की सुरक्षा भी दी जाएगी।

















