केरल में स्थानीय निकाय चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में कई नए समीकरण उभरते दिख रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के अभ्युदय के बाद अब कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में नई सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
यूडीएफ में बन रहे नए समीकरण
कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में अंदर ही अंदर नया समीकरण बनता दिख रहा है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में कांग्रेस पार्टी के बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इस पार्टी से सी एस मोहम्मद कोया 70 के दशक में राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में कांग्रेस पार्टी के राज्य में गिरते चुनावी प्रदर्शन के कारण अंतर्द्वंद चल रहा है और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग इस बार यूडीएफ के अंदर मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी करने का मन बना रही है। विगत विधानसभा चुनाव में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का प्रदर्शन संतोषप्रद रहा था। मगर कांग्रेस पार्टी के बुरे प्रदर्शन के कारण यूडीएफ सरकार बनाने से पिछड़ गई थी। कांग्रेस के लिए सबसे दुखदायी तथ्य रहा था कि कांग्रेस पार्टी की सीटें 2021 में पांच साल विपक्ष में रहने के बावजूद भी कम हो गई थी।
मुस्लिम और ईसाई हैं यूडीएफ के कोर वोटर
यूडीएफ का वोट केरल में मुख्यतः क्रिस्चियन और मुस्लिम समाज से बनता है। क्रिस्चियन वर्ग कांग्रेस पार्टी के कारण और मुस्लिम वर्ग इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कारण यूडीएफ के साथ जुड़ता है। अभी हाल में ही संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनाव में मुस्लिम वर्ग का मत पहले की तरह इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को मिला, मगर कांग्रेस पार्टी को क्रिस्चियन वर्ग का मत नहीं मिला। केरल स्थानीय निकाय चुनाव नतीजे पर वक्फ का पूरा असर देखने को मिला है। मुनंबम पारंपरिक रूप से कांग्रेस पार्टी नीत यूडीएफ का गढ़ था। इस चुनाव में ये भाजपा के पाले में चला चली गई। मुनंबम क्रिस्चियन बाहुल्य है और यहाँ से भाजपा की जीत यह दर्शाती है कि क्रिस्चियन वर्ग अब भाजपा की और मुड़ रहा है और आगामी विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर भाजपा के लिए मतदान कर सकता है। मुनंबम की हार ने कांग्रेस पार्टी को यूडीएफ गठबंधन में काफी पीछे लेकर खड़ा कर दिया है।
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पी विजयन से नजदीकी कांग्रेस पर भारी
इतना ही नहीं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग गांधी परिवार और केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन के बीच आपसी सौहार्दपूर्ण संबंध से परेशान है। मुस्लिम लीग को लगता है कि गांधी परिवार और पी विजयन में एक प्रकार का साठगांठ है। इस साठगांठ के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी कमजोरी से चुनाव लड़कर विजयन को मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने में मदद करेगी वहीं, लोकसभा चुनाव में एलडीएफ कमजोरी से चुनाव लड़कर वायनाड लोकसभा की सीट और केरल की 20 सीटों में अधिकतम सीटे कांग्रेस पार्टी के पाले में डालने में मदद करेगी। विगत दो लोकसभा चुनावों 2019 और 2024 में कांग्रेस पार्टी को सर्वाधिक सीट केरल राज्य से ही मिली है। अतएव इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग चाहती है कि आगामी 2026 के केरल विधानसभा चुनाव में मुख्य भूमिका में उनकी पार्टी रहे।
2021 विधानसभा चुनाव में यूडीएफ गठबंधन दलों का प्रदर्शन

केरल के विगत 2021 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 93 सीटों पर चुनाव लड़कर महज 21 सीटें जीती थी। वहीं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 25 सीटों पर चुनाव लड़कर 15 सीटे जीतने में कामयाब हुई थी। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का कांग्रेस पार्टी और यूडीएफ गठबंधन के अन्य दलों के अपेक्षा सीट जितने की दर काफी अच्छी रही थी।
















