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हिंदू पैसे से बनेंगे मुसलमान डॉक्टर ! कटरा में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड

कटरा में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष से एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई शुरू हो रही है। इस कॉलेज को 50 सीट आवंटित हुई हैं। इनमें से 49 सीट मुसलमान छात्रों को और केवल एक सीट हिंदू छात्र को मिली है। गुस्साया हिंदू समाज जम्मू, कटरा, उधमपुर आदि स्थानों पर कर रहा प्रदर्शन

Written byअरुण कुमार सिंहअरुण कुमार सिंह
Nov 26, 2025, 07:50 pm IST
inभारत, विश्लेषण, धर्म-संस्कृति, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, दिल्ली

‘लाल किले के पास 10 नवंबर को जिहादी डॉ. उमर नबी बट ने अपनी कार में विस्फोट कर खुद को तो उड़ाया ही, उसने अन्य 16 लोगों की भी जान ले ली। इस विस्फोट का षड्यंत्र रचने के आरोप में कुछ अन्य डॉक्टर पकड़े गए हैंं। जांच एजेंसियों के हवाले से ऐसी खबरें रोज आ रही हैं कि देश में लगभग 200 डॉक्टर आतंकी गतिविधियों में लिप्त हो सकते हैं। इनमें से अधिकतर जम्मू-कश्मीर के हैं।
इसी बीच श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा कटरा में संचालित मेडिकल कॉलेज में एम.बी.बी.एस. में नामांकन की खबरें आईं। इसके अनुसार कुल 50 सीट में से 49 सीट मुसलमान छात्रों को दी गई हैं। हिंदू छात्र केवल एक है। जैसे ही यह खबर फैली हिंदू संगठन दंग रह गए। लोग सवाल उठाने लगे कि हिंदुओं के दान से चलने वाले मेडिकल कॉलेज में यह क्या हो रहा है! जन भावनाओं को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद ने इसका विरोध किया और मांग की कि यह नामांकन रद्द होना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री बजरंग बागड़ा ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा है, “श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षणिक संस्थाएं माता वैष्णो देवी को अर्पित भक्तिमय चढ़ावों से वित्त-पोषित हैं। इसलिए यहां की हर गतिविधि में माता के प्रति श्रद्धा एवं हिंदू सांस्कृतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति होनी चाहिए।” उन्होंने यह भी लिखा है, “हमें यह ज्ञात हुआ है कि श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एक्सीलेंस मेडिकल कॉलेज के प्रथम ‘बैच’ में 50 छात्रों में से मात्र छह छात्र हिंदू हैं, जबकि 44 छात्र मुस्लिम हैं। (जब यह पत्र लिखा गया गया था, उस समय छात्रों की संख्या यही थी।) साथ ही नर्सिंग महाविद्यालयों के शिक्षकों में से अधिकांश मुस्लिम अथवा ईसाई हैं। ये तथ्य न केवल धार्मिक आस्था के विपरीत हैं, बल्कि स्थानीय एवं हिंदू समाज की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाते हैं।

माता वैष्णो देवी जी के इस पावन संस्थान की प्रवेश व्यवस्था में धार्मिक संवेदनशीलता, सांस्कृतिक विरासत और भावी समाज की अपेक्षाओं का भी उचित समायोजन होना आवश्यक है। साथ ही इन समस्त संस्थानों में हिंदू शिक्षक एवं कर्मचारी ही नियुक्त होने चाहिए।” श्री बागड़ा ने अपने पत्र में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 10 अक्तूबर को दिए गए एक निर्णय की भी चर्चा की है। इसमें कहा गया है कि मंदिर निधि तथा उससे जुड़े संसाधनों का उपयोग हिंदू धार्मिक, सांस्कृतिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए ही निर्धारित होना चाहिए।

अनेक स्थानों पर प्रदर्शन

विश्व हिंदू परिषद के इस पत्र के बाद कटरा सहित जम्मू-कश्मीर के अनेक हिस्सों में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के विरुद्ध प्रदर्शन होने लगे। इस समाचार के लिखे जाने तक प्रदर्शन हो रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि चूंकि यह मेडिकल कॉलेज हिंदुओं के पैसे से चल रहा है इसलिए इसमें केवल और केवल हिंदू छात्रों का नामांकन हो। सनातन धर्म सभा, जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष पुरुषोत्तम दधीचि कहते हैं, “श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सभी संस्थानों में 90 प्रतिशत सीटें सनातन समाज के लिए आरक्षित हों। ऐसा नहीं होने पर हिंदू समाज उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।”

उधमपुर में प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करने वाले पवन खजूरिया की मांग है, “श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के संस्थानों में प्रवेश नीति श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुकूल होनी चाहिए। वर्तमान में जो छात्र यहां नामांकन करा रहे हैं, इसमें उनका कोई दोष नहीं है। यह नीतिगत दोष है। आने वाले समय में इसमें सुधार करना ही होगा। अन्यथा हिंदू चुप नहीं रहेंगे।”

इस प्रकरण पर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चूंकि नीट के जरिए ये छात्र आ रहे हैं इसलिए बोर्ड उसमें कुछ नहीं कर पा रहा है, लेकिन अगले वर्ष से ऐसा न हो, उसका तरीका भी ढूंढा जा रहा है।

पवित्रता भंग होने का डर

बता दें कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड नर्सिग कॉलेज, अस्पताल के साथ ही अनेक शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करता है। लगभग 600 करोड़ रुपए खर्च कर एक मेडिकल कॉलेज भी बनाया गया है। इसी वर्ष इसे मान्यता मिली है और इसमें एम.बी.बी.एस. की 50 सीटें आवंटित की गई हैं। पहले ‘बैच’ के लिए नामांकन चल रहा है। इस रिपोर्ट के लिखने तक 36 छात्रों ने नामांकन करा लिया है, ये सभी मुसलमान हैं।

हिंदुओं को इस बात पर भी आपत्ति है कि कॉलेज के छात्रावास में मुसलमान छात्रों के रहने से वहां की पवित्रता भंग होगी। बता दें कि श्री माता वैष्णो देवी के पांच किलोमीटर के क्षेत्र में मांस और मदिरा के सेवन पर रोक है। विश्व हिंदू परिषद, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रांत सह मंत्री करण सिंह कहते हैं, “जो मुसलमान छात्र वैष्णो देवी क्षेत्र में रहेंगे, वे मांस नहीं खाएंगे और मदिरा नहीं पिएंगे, इसकी गारंटी क्या है। वे अपने कमरों में या छात्रावास परिसर में नमाज भी पढ़ेंगे। इससे हिंदुओं की भावनाएं आहत होंगी। इसलिए यह नामांकन प्रक्रिया रद्द होनी चाहिए। हिंदुओं का पैसा केवल और केवल हिंदू समाज पर खर्च होना चाहिए।”

बोर्ड का इतिहास

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की स्थापना अगस्त, 1986 में जम्मू-कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। बोर्ड के अध्यक्ष जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल होते हैं। नियमानुसार कभी उपराज्यपाल हिंदू न हों तो वे बोर्ड की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उसके लिए और किसी हिंदू को ही अध्यक्ष बनाना होगा। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य है श्री माता वैष्णो देवी जी के पवित्र तीर्थस्थल और उससे जुड़ी भूमि व भवनों सहित उसकी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और प्रशासन सुनिश्चित करना। यात्रा का प्रबंधन और तीर्थस्थल का प्रशासन श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा किया जाता है। एक अनुमान के अनुसार हर वर्ष लगभग एक करोड़ हिंदू वैष्णो देवी की यात्रा करते हैं और उनसे बोर्ड को लगभग 700 करोड़ रुपए की आय होती है।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल कहते हैं, “जिस श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का अध्यक्ष कोई हिंदू ही हो सकता है, लेकिन वही बोर्ड अपने यहां मुस्लिम कर्मचारी भी रखता है। यह कौन कर रहा है और क्यों कर रहा है, हिंदू समाज को बताना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा, “हमें विश्वास है कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड सम्मानपूर्वक इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र ही प्रवेश और नियुक्ति संबंधी नीतियों की समीक्षा करेगा, ताकि संस्थान की धार्मिक प्रतिबद्धता, संतुलन और भक्तों और समाज की अपेक्षाएं समान रूप से संरक्षित हों।”

ये नाम हैं दाखिला सूची में

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चिकित्सा महाविद्यालयों में एम.बी.बी.एस. और बी.डी.एस. में नामांकन के लिए ‘दी जे.के. बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेस एक्जामिनेशंस’ ने दो सूचियां जारी कीं। पहली सूची में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेज के लिए 50 छात्रों के नाम थे। इनमें 42 मुसलमान और आठ हिंदू छात्र थे। ये नाम हैं- नासिर अयूब खान, मेहरान अहमद सूफी, मानित सर्वस्व, मेहरान मंजूर नेगुरु, साकिब अहमद डार, जुनैद अहमद शाह, मिनहाल बिंट नाजिर, समीर सिंह संधू, मौजिन गनी, मेहरुसा रियाज, अक्षिता आनंद, उमैर हुसैन खान, रुतबा नासिर, अकिला फारुख, साकिब फारुख, खुशिबा मुश्ताक, फलक जान, स्वस्तिक शर्मा, मोहम्मद इलहाम, जैद याकूब, सही सगीर, नबी नाजिर लोन, हदीद जिलानी मीर, आरिफ अशरफ डार, उबेर एबनी मोहम्मद, शेख अफनान अफसर, शाजिया शैफी, उज्बा नाजिर, उस्मान बशीर मीर, मोहम्मद कामरान भट्ट, वृद्धि महाजन, अनमोल परिहार, राबिया तनवीर, दिरायत परवेज, मुताहिर अयूब, अफीफा हसन, इखलास हुसैन बनी, शूजा शौकत, सोबिया गुलजार, बिल्किश मंजूर, दानिश युसूफ बनी, शेख मोहम्मद देम, मोहम्मद जैद, संकल्प गुप्ता, अफसाना नबी, मलिहा मुजफ्फर मट्टू, आबरु फारुख, लुबना एजाज, बोधा नवसीन और दिव्यांशी।

ऐसा माना जाता है कि इन नामों के बाहर आने के बाद अधिकतर हिंदू छात्रों ने नामांकन कराने से मना कर दिया। फिर 18 नवंबर को दूसरी सूची जारी की गई। इसमें ये नाम शामिल हैं-
अदिति ठाकुर, सदाफ शैफी, अलीना मीर, आमिर परवेज, मोहम्मद अलताफ डार, सुहैब बशीर नायकू, सुहैब शौकत नायक, मिसबाह, यूनिजा हिलाल, सुलेमान रुनियाल, मोहम्मद शैफ उल्ला मलिक, फरहद हामिद खान, तब्बशुम युसूफ, आयशा जुल्फिकार, शाहिदा शदाब और रक्सन आरा। इस सूची में शामिल छात्रों के नाम देखकर आप खुद तय कर सकते हैं कि श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेज में कितने हिंदू छात्र चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले हैं।

 

300 से अधिक मुस्लिम कर्मचारी

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में लगभग 2,000 लोग विभिन्न पदों पर काम करते हैं। सूत्रों ने बताया कि इनमें से करीब 300 मुसलमान कर्मचारी हैं, जिनमें 100 स्थाई और शेष अनुबंध पर हैं। ये लोग वैष्णो देवी क्षेत्र में ही रहते हैं और अपने मजहबी कर्म भी करते हैं। हिंदू समाज काफी समय से इन कर्मचारियों को हटाने की मांग कर रहा है।

Topics: शिक्षा और क्षेत्रकटराजम्मू-कश्मीरधार्मिक संवेदनशीलतामेडिकल कॉलेजजिहादी डॉ. उमर नबी बटहिंदू समाजउग्र आंदोलनसांस्कृतिक विरासतसंघ परिवारपाञ्चजन्य विशेषश्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्डसनातन धर्म सभामंदिर निधि
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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