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गुरुओं की परंपरा हमारी संस्कृति और मूल भावना का आधार : पीएम मोदी

गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर PM मोदी ने कुरुक्षेत्र में विशेष सिक्का व डाक टिकट जारी किया। ऑपरेशन सिंदूर, मुगल अत्याचार और सिख परंपरा पर दिया महत्वपूर्ण उद्बोधन

Written byShivam DixitShivam Dixit
Nov 25, 2025, 09:10 pm IST
inभारत, पंजाब, हरियाणा

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर कुरुक्षेत्र में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे गुरुओं की परंपरा राष्ट्र के चरित्र, संस्कृति और मूल भावना का आधार है। गुरु तेग बहादुर साहिब जी की स्मृति हमें ये सिखाती है कि भारत की संस्कृति कितनी व्यापक, उदार और मानवता केंद्रित रही है। उन्होंने ‘सरबत दा भला’ का मंत्र अपने जीवन से सिद्ध किया।

विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट का विमोचन

प्रधानमंत्री ने 9वें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस के अवसर पर आज कुरुक्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में एक विशेष सिक्का और स्मारक डाक टिकट जारी किया।

उल्लेखनीय है कि गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस के अवसर को भारत सरकार एक वर्ष तक चलने वाला स्मरण उत्सव मना रही है।

गुरु साहिब की निडरता और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख

प्रधानमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं ने हमें सिखाया है कि हमें बिना डरे और बिना किसी को डराए जीवन की हर चुनौती का सामना करना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उदाहरण है। आज का भारत ना डरता है, न रुकता है और ना ही झुकता है और साहस और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ता है।

युवाओं को नशे से सावधान रहने की सलाह

प्रधानमंत्री ने नौजवानों को नशे की आदत से सावधान किया और कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षा हमारे लिए इस दिशा में प्रेरणा और समाधान है। उन्होंने कहा कि युवा, समाज एवं परिवार को मिलकर इस लड़ाई को लड़ना होगा।

मुगल अत्याचार और गुरु तेग बहादुर जी के संघर्ष का वर्णन

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मुगलों के अत्याचार और उसके खिलाफ संघर्ष की सिख परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में गुरु तेग बहादुर जी जैसे व्यक्तित्व विरले ही होते हैं। उनका जीवन, त्याग और चरित्र हमारे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। मुगल आक्रांताओं के कश्मीरी हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण कराने पर गुरु साहिब ने उन्हें कहा कि वे औरंगजेब को साफ-साफ कहें ‘यदि श्री गुरु तेग बहादुर इस्लाम स्वीकार कर लें, तो हम सब इस्लाम अपना लेंगे।’

गुरु साहिब का अद्भुत साहस और बलिदान

उन्होंने कहा, “इन वाक्यों में श्री गुरु तेग बहादुर जी की निडरता की पराकाष्ठा थी। मुगल शासकों ने उन्हें प्रलोभन भी दिए लेकिन श्री गुरु तेग बहादुर अडिग रहे। उन्होंने धर्म और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। गुरु साहिब को डिगाने के लिए उनके सामने उनके तीन साथियों भाई दयाला जी, भाई सतीदास जी, भाई मतिदास जी की निर्ममता से हत्या की गई, लेकिन गुरु साहिब अटल रहे। उनका संकल्प अटल रहा। उन्होंने धर्म का रास्ता नहीं छोड़ा। तब की अवस्था में गुरु साहिब ने अपना शीश धर्म की रक्षा को समर्पित कर दिया।”

सिख परंपरा के संरक्षण पर सरकार के प्रयास

प्रधानमंत्री ने इस दौरान उनकी सरकार की ओर से सिख परंपरा के संरक्षण और उसको बढ़ावा देने की सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुगलों ने वीर साहेबजादों के साथ क्रूरता की सीमाएं पार कर दी थी। उन्हें दीवार में चुनवा दिया गया था, लेकिन उन्होंने कर्तव्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। इन्हीं आदर्श के सम्मान के लिए हम हर साल 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के तौर पर मनाते हैं।

गुरुओं की परंपरा को राष्ट्रीय उत्सवों में स्थान

उन्होंने कहा, “हमारे गुरुओं की परंपरा, हमारे राष्ट्र के चरित्र, हमारी संस्कृति और हमारी मूल भावना का आधार है। मुझे संतोष है कि पिछले 11 वर्षों में हमारी सरकार ने इन पावन परंपराओं को, सिख परम्परा के हर उत्सव को राष्ट्रीय उत्सव के रूप में भी स्थापित किया है।”

तीर्थों को आधुनिक रूप से जोड़ने की पहल

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार गुरुओं के हर तीर्थ को आधुनिक रूप से जोड़ने में का प्रयास कर रही है। इसमें करतारपुर कॉरिडोर, हेमकुंड साइट में रोपवे और प्रोजेक्ट, आनंदपुर साहिब में विरासत-ई-खालसा संग्रहालय शामिल है। हमने गुरुजनों की गौरवशाली परंपरा को अपना आदर्श मानकर इन सारे कामों को पूरी श्रद्धा के साथ किया है।

जोड़ा साहिब से जुड़े पवित्र क्षण का उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने उनके कैबिनेट सहयोगी हरदीप सिंह पुरी के परंपरा से सहेजे गए ‘जोड़ा साहिब’ को पटना साहिब सौंपने की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “मुझे इन पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ के सामने अपना शीश नवाने का अवसर मिला। मैं इसे गुरुओं की विशेष कृपा मानता हूं कि उन्होंने मुझे इस सेवा का, इस समर्पण का और इस पवित्र धरोहर से जुड़ने का अवसर दिया।”

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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