आक्रमण के दिन गए, हम राममंदिर पर झण्डा फहराने वाले हैं : डाॅ. मोहन भागवत जी
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आक्रमण के दिन गए, हम राममंदिर पर झण्डा फहराने वाले हैं : डाॅ. मोहन भागवत जी

लखनऊ में गीता प्रेरणा उत्सव में RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि आक्रमण के दिन खत्म हुए, अब राम मंदिर पर झंडा फहराने का समय है। उन्होंने गीता, धर्म, कर्तव्य और भारत के विश्वगुरु बनने पर दिया बड़ा संदेश।

Written byShivam DixitShivam Dixit — edited by Shivam Dixit
Nov 23, 2025, 06:49 pm IST
inभारत, उत्तर प्रदेश, संघ @100

लखनऊ । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहन राव भागवत जी ने कहा कि आक्रमण के दिन चले गये, हम राम मंदिर पर झण्डा फहराने वाले हैं। अपने आप को जानो। हम देश के नाते क्या हैं उसको समझें। भारत विश्व गुरू था। अनेक राज्यों से मंडित था। चक्रवर्ती सम्राट होते थे। दुनिया का संबल भारत था।

दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव में उनका उद्बोधन

संघ के सरसंघचालक जी ने रविवार काे लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में श्रीकृष्ण जिओ गीता परिवार की ओर से आयोजित दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सरसंघचालक जी ने कहा कि हजार साल तक आक्रामकों के पैरें तले भारत रौंदा गया। पारतंत्र में जीना पड़ा। धर्मस्थलों की हानि हुई। जबरन मतांतरण होने लगा, तब भी भारत था। अब आक्रमण के दिन चले गये। अब हम राम मंदिर पर झण्डा फहराने वाले हैं।

गीता को जीवन में उतारने का संदेश

सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत में युगों युगों के जीवन के अनुभव से जो ज्ञान स्थिर हुुआ है, उसका सारांश हैं गीता। गीता को जीना है। गीता पठन का क्रम बनाना चाहिए। उन्हाेंने आह्वान किया कि रोज दो श्लोक पढ़ें और उस पर मनन करें। सार को अपने जीवन में लागू करें। जीवन की एक-एक कमी सुधारेंगे तो वर्षभर में हमारा जीवन गीतामय बनने की दिशा में अग्रसर होगा।

गीता हर परिस्थिति का समाधान देती है

सरसंघचालक जी ने कहा कि गीता पढ़नी चाहिए और समझनी चाहिए। हर बार आपको गीता में नई बात मिलती है। सदा सर्वदा हर परिस्थिति के उपाय गीता में मिलते हैं।

भारत दुनिया को मार्ग दिखाएगा

सरसंघचालक जी ने कहा कि आज सारी दुनिया जीवन के रणांगन में भयग्रस्त व मोहग्रस्त होकर रास्ता सूझने वाली अवस्था में है। जीवन में नीति नहीं, शांति नहीं, जीवन में संतोष नहीं, इसलिए जीवन में विश्राम नहीं। यह स्थिति है। सही रास्ता चाहिए। दुनिया को सही रास्ता भारत से मिलेगा। क्योंकि भारत की जीवन परम्परा ऐसी है। उसके प्रभाव के दिनों में उसने सारी दुनिया को सुख शांतिमय दुनिया बना दिया था।

अन्याय के सामने खड़े होने की प्रेरणा

सरसंघचालक जी ने कहा कि अन्याय असत्य के सामने जीने के बजाय क्षणभर जीना भी असंख्य कीर्ति प्रदान करता है। चन्द्रशेखर जैसे क्रान्तिकारियों के जीवन से हम युगों युगों तक प्रेरणा लेते रहेंगे। सफलता असफलता मायने नहीं रखती। मनुष्य के विचार उत्तम विचार चाहिए। अधिष्ठान ठीक चाहिए, कार्यकर्ता कुशल, ठीक कार्य पद्धति चाहिए। इन सबके साथ भाग्य की भी एक बात है। उसकी चिंता नहीं करना। अपना पुरूषार्थ पक्का करना। पुरूषार्थ से भाग्य बदलता है। यश अपयश की चिंता नहीं करना। लड़ना है तो दुश्मनी की खुन्न्नस से नहीं, धर्म के लिए लड़ना।

धर्म के लिए निष्काम कर्म आवश्यक

उन्हीने ने कहा कि छोटा कार्य जो निष्काम से किया गया हो वह धर्म है। धर्म यानि समाज की धारणा करने वाला धर्म। सबको जिलाने वाला धर्म। सबके कल्याण के लिए व्यक्तिगत हित की बलि देना पड़े तो भी पीछे नहीं रहना। इसलिए यश अपयश की चिंता न करते हुए हमें धर्म रक्षा के लिए लड़ना है। हम दुनिया को त्याग व सेवा का संदेश देंगे। इसलिए भक्ति पूर्वक कर्म करो। यही गीता का संदेश है।

गीता सभी के लिए है: स्वामी ज्ञानानन्द

गीता केवल साधु संन्यासियों के लिए नहीं: स्वामी ज्ञानानन्द कार्यक्रम में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने सभी को जिओ गीता से जुड़ने का आहवान करते हुए कहा कि दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव के माध्यम से समाज का जागरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गीता केवल साधु संन्यासियों के लिए नहीं अपितु जन—जन के लिए है। जल्द ही ब्रेन लिपि गीता के माध्यम से मूकबधिर समाज को उपलब्ध कराई जायेगी।

कर्मयोग के माध्यम से धर्म का संदेश: स्वामी परमात्मानन्द

कर्मयोग के माध्यम से धर्म की शिक्षा देती है गीता: स्वामी परमात्मानन्द स्वामी परमात्मानन्द ने कहा कि जब भारतीयों के ह्रदय में गीता प्रतिस्थापित होगी तभी भारत विश्वगुरू बनेगा। उन्होंने कहा कि गीता हमें धर्म की शिक्षा देती है। धर्म का अर्थ है कर्तव्य विशेष। गीता कर्मयोग के माध्यम से धर्म की शिक्षा देती है। आज कर्तव्य के बजाय अधिकार की बात ज्यादा हो रही है। कर्तव्य के प्रति अपने को समर्पित करना, यही गीता का संदेश है। कर्तव्य से विमुख व्यक्ति को कर्तव्यपरायण बनाना गीता का उद्देश्य है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जगदगुरू रामानुजाचार्य, स्वामी श्रीधराचार्य महाराज और रामचन्द्र दास ने भी अपने विचार रखे।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने सरसंघचालक डाॅ. मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गीता की प्रति भेंटकर स्वागत किया। कार्यक्रम के संयोजक मणि प्रसाद मिश्र ने स्वागत भाषण किया।

इन महानुभावों की भी रही उपस्थिति

इस अवसर पर जगद्गुरू विष्णु स्वामी सतुआ बाबा, महंत धर्मेन्द्र दास, स्वामी कौशिक चैतन्य, ब्रह्माकुमारीज की राधा बहन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा.कृष्ण गोपाल, संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन, अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख रामलाल, संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य प्रेम कुमार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल, पूर्व क्षेत्र प्रचारक शिव नारायण, प्रान्त प्रचारक कौशल, संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपा शंकर व हिन्दू आध्यात्मिक सेवा संस्थान के क्षेत्र संयोजक अमरनाथ प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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