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भारतीय वायुसेना के बढ़ते कदम और परमवीर निर्मल जीत सिंह सेखों

वायुसेना ने लगभग 40 सुखोई, Su-30MKI लड़ाकू विमानों को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस कर परिचालन में शामिल कर लिया है।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
Oct 8, 2026, 05:17 pm IST
inरक्षा
भारतीय वायुसेना

भारतीय वायुसेना

भारतीय वायुसेना का 94वां स्थापना दिवस 8 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस वर्ष के वायुसेना दिवस की थीम ‘भारतीय वायुसेना – अचूक, अभेद्य और सटीक’ रखी गई थी। वायुसेना ने लगभग 40 सुखोई, Su-30MKI लड़ाकू विमानों को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस कर परिचालन में शामिल कर लिया है। वायुसेना ने हाल ही में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जिसमें 40 से अधिक देशों के फाइटर जेट्स और एयरक्रू ने हिस्सा लिया। इस अभ्यास में अमेरिकी F-35, राफेल, सुखोई-30MKI और स्वदेशी तेजस जैसे अत्याधुनिक विमानों ने एक साथ आसमान में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।

विश्व में भारतीय वायुसेना की गणना चौथे नंबर पर होती है

ग्लोबल फायरपावर डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एयरफोर्स को विश्व की सबसे शक्तिशाली वायु सेना माना गया है। इसके बाद रूस और चीन की वायुसेना का नंबर है। चौथे नंबर पर भारतीय वायु सेना है। भारतीय वायु सेना को दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली वायु सेना का दर्जा ऐसे ही नहीं मिला। भारतीय वायु सेना के पास 2229 विमान हैं। 53 फाइटर जेट, 899 हेलीकॉप्टर और 831 सहायक विमान हैं। शक्ति का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि आपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल के एक हमले से ही पाकिस्तान ने सरेंडर कर दिया।

वायुसेना का आदर्श वाक्य

“नभ:स्पृशं दीप्तम्”(Touch the sky with glory)” यही भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य है। भारतीय वायुसेना का भगवद्गीता से भी गहरा रिश्‍ता है, क्‍योंकि इसका आदर्श वाक्‍य ‘नभ:स्‍पृशं दीप्‍तम्’ गीता के 11वें अध्‍याय से ही लिया गया है। महाभारत के महायुद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र की युद्धभूमि में भगवान श्री कृष्‍ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिए थे, यह उसी का अंश है। भगवान श्री कृष्‍ण, अर्जुन को अपना विराट रूप दिखा रहे हैं और भगवान का यह विराट रूप आकाश तक व्याप्त है जो अर्जुन के मन में भय और आत्म-नियंत्रण में कमी उत्पन्न कर रहा है। इसी तरह भारतीय वायुसेना राष्ट्र की रक्षा में वांतरिक्ष शक्ति का प्रयोग करते हुए शत्रुओं का दमन करने का लक्ष्य करती है।

उपर्युक्त आदर्श के आलोक में भारतीय वायुसेना के महारथी फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह ने सन् 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तानी वायुसेना के आक्रमण की धज्जियां उड़ाईं थीं। विवाह का उत्सव मनाने को, कोई चुनता है, सौंदर्य स्थल, कोई चुनता है, हिल स्टेशन आलीशान होटल और विदेश के पर्यटन स्थल, परंतु बिरले ही होते हैं वो, जो विवाह का जश्न मनाने को चुनते हैं जंग के गलियारे।”

इस कड़ी में परमवीर निर्मल जीत सिंह सेखों का नाम अग्रणी और अमर रहेगा। फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों ने अपने विवाह का उत्सव मनाने के लिए मैदान-ए-जंग को चुना। साथ ही 1971 के युद्ध में पाक के कई लड़ाकू विमानों को ध्वस्त कर भारत की जीत सुनिश्चित कर दी थी। सेखों का जन्म 17 जुलाई 1943 को लुधियाना, पंजाब, ब्रिटिश भारत में सेखों जाट सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम फ्लाइट लेफ्टिनेंट तारलोक सिंह सेखों था। उन्हें 4 जून 1967 को पायलट अधिकारी के रूप में भारतीय वायुसेना में सम्मिलित किया गया था।

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान वह भारतीय वायुसेना की “द फ्लाइंग बुलेट” 18वीं स्क्वाड्रन में काम कर रहे थे। 14 दिसम्बर 1971 को श्रीनगर हवाई अड्डे पर पाकिस्तान वायु सेना के एफ-86 जेट विमानों द्वारा 26वीं स्क्वाड्रन पीएएफ बेस पेशावर से हमला किया।

सुरक्षा टुकड़ी की कमान संभालते हुए फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह वहां पर 18 नेट (Gnat) स्क्वाड्रन के साथ तैनात थे। जैसे ही हमला हुआ सेखों अपने विमान के साथ स्थिति में आ गए और तब तक फ्लाइंग लेफ्टिनेंट घुम्मन भी कमर कस कर तैयार हो चुके थे। एयरफील्ड में सुबह काफी धुंध  थी। सुबह 8 बजकर 2 मिनट पर चेतावनी मिली थी कि दुश्मन आक्रमण पर है।

निर्मलसिंह तथा घुम्मन ने तुरंत अपनी उड़ान का संकेत दिया और उत्तर की प्रतीक्षा में दस सेकेंड के बाद बिना उत्तर उड़ान का निर्णय लिया। ठीक 8 बजकर 4 मिनट पर दोनों वायु सेना अधिकारी दुश्मन का सामना करने के लिए आसमान में थे। उस समय दुश्मन का पहला F-86 सेबर जेट एयर फील्ड पर गोता लगाने की तैयारी कर रहा था।

एयरफील्ड से पहले घुम्मन के जहाज ने रनवे छोड़ा था। उसके बाद जैसे ही निर्मलजीत सिंह का नेट(Gnat) उड़ा, रन वे पर उनके ठीक पीछे एक बम आकर गिरा। घुम्मन उस समय खुद एक सेबर जेट का पीछा कर रहे थे। सेखों ने हवा में आकर दो सेबर जेट विमानों का सामना किया, इनमें से एक जहाज वही था, जिसने एयरफील्ड पर बम गिराया था। बम गिरने के बाद एयर फील्ड से कॉम्बैट एयर पेट्रोल का सम्पर्क सेखों तथा घुम्मन से टूट गया था।

एयरफील्ड धुएं और धूल से भर गई थी, जो उस बम विस्फोट का परिणाम थी। इस सबके कारण दूर तक देख पाना कठिन था। तभी फ्लाइट कमांडर स्क्वाड्रन लीडर पठानिया को नजर आया कि कोई दो हवाई जहाज मुठभेड़ की तैयारी में हैं। घुम्मन ने भी इस बात की कोशिश की कि वह निर्मलजीत सिंह की मदद के लिए वहां पहुंच सकें लेकिन यह सम्भव नहीं हो सका।

तभी रेडियो संचार व्यवस्था से निर्मलजीत सिंह की आवाज़ सुनाई पड़ी…

“मैं दो सेबर जेट जहाजों के पीछे हूँ…मैं उन्हें जाने नहीं दूँगा…”

उसके कुछ ही क्षण बाद नेट(Gnat) से आक्रमण की आवाज आसपान में गूंजी और एक सेबर जेट आग में जलता हुआ गिरता नजर आया। तभी निर्मलजीत सिंह सेखों ने अपना सन्देश प्रसारित किया…

“मैं मुकाबले पर हूँ और मुझे मजा आ रहा है। मेरे इर्द-गिर्द दुश्मन के दो सेबर जेट हैं। मैं एक का ही पीछा कर रहा हूँ, दूसरा मेरे साथ-साथ चल रहा है।”

इस सन्देश के जवाब में स्क्वाड्रन लीडर पठानिया ने निर्मलजीत सिंह को कुछ सुरक्षा सम्बन्धी हिदायत दी। इसके बाद नेट(Gnat) से एक और धमाका हुआ जिसके साथ दुश्मन के सेबर जेट के ध्वस्त होने की आवाज़ भी आई। उनका निशाना फिर लगा और एक बड़े धमाके के साथ दूसरा सेबर जेट भी ढेर हो गया।

कुछ देर की शांति के बाद फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों का सन्देश फिर सुना गया। उन्होंने कहा…

“शायद मेरा जेट भी निशाने पर आ गया है…घुम्मन, अब तुम मोर्चा संभालो।”यह निर्मलजीत सिंह का अंतिम सन्देश था और वह वीरगति को प्राप्त हो गए। उन्होंने ने 6 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों का सामना किया, जिसमें दो को मार गिराया था और वीरगति तक 4 को उलझाए रखा था।

निर्मल जीत सिंह सेखों को मरणोपरांत उनके अदम्य साहस और वीरता के लिए, सन् 1972 में सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र दिया गया। परंतु ये मार्मिक पंक्तियाँ भावुक भी कर देती हैं –

“मेहंदी भी कहां छूटी थी, घूंघट भी कहां उतरा था।
संगम था अभी अधूरा, कर्तव्य के लिए प्रियतम बिछुड़ा था।
प्रतीक्षा थी,उन कोमल आँखों को प्रियतम के लौटने की ।
देखा तो तिरंगे में, लिपटकर परमवीर आ गया।”

विशाल है भारतीय वायुसेना के शौर्य का इतिहास

भारतीय वायुसेना के शौर्य का इतिहास विस्तृत है, इसलिए सारांश में प्रसिद्ध अभियान देना समीचीन होगा। “द्वितीय विश्वयुद्ध, सन् 1947 का भारत-पाक युद्ध, कांगो संकट, गोवा मुक्ति संग्राम,सन् 1962 का भारत-चीन युद्ध, सन् 1965 का भारत-पाक युद्ध, 1971 का बांग्लादेश मुक्ति युद्ध, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन पुतला, ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन कैक्टस, कारगिल युद्ध, सर्जिकल स्ट्राइक” और ऑपरेशन सिंदूर इत्यादि।

भारतीय वायु सेना के पास अद्भुत एवं अद्वितीय आयुध हैं, परंतु जिनकी सार्वजनिक चर्चा होती है उन्हें ही प्रस्तुत करना उचित होगा। प्रमुख युद्धक विमान-राफेल, सुखोई-30,मिराज 2000, जगुआर, तेजस, इल्युशिन आई एल 78, बोइंग सी 17 – ग्लोब मास्टर 3 लॉकहीड मार्टिन सी – 130 जे सुपर हरक्युलिस। शेष वायुसेना के गुप्त शस्त्रों की चर्चा यहां सामरिक दृष्टि से उचित नहीं हैं। विश्व में भारत के पायलट सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।

नारी शक्ति को समान अधिकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भगीरथ प्रयास से भारतीय वायु सेना में नारी शक्ति को समान अधिकार मिला। फलस्वरूप स्क्वाड्रन लीडर वीरांगना अवनी चतुर्वेदी, ‘सुखोई’ लड़ाकू विमान उड़ाकर, भारत की प्रथम महिला फाईटर पायलट बनीं, तो वहीं फ्लाईट लेफ्टिनेंट वीरांगना शिवांगी सिंह, राफेल फाईटर जेट उड़ाने वाली पहली और एकमात्र महिला पायलट बनीं।

आस्था पूनिया ने जुलाई 2025 में विशाखापत्तनम में विंग्स ऑफ गोल्ड प्राप्त कर भारतीय नौसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव इन्होंने हासिल किया है। हाल ही में स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ वायुसेना का प्रतिष्ठित ‘फाइटर कॉम्बैट लीडर’ कोर्स पूरा करने वाली देश की पहली महिला बन गई हैं।मोहना सिंह जितरवाल ने इन्होंने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस को उड़ाकर और ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ स्क्वाड्रन का हिस्सा बनकर इतिहास रचा है। वर्तमान में भारतीय वायु सेना में 25 से अधिक वीरांगनाएं फाईटर पायलट हैं। यही तो है एक भारत, समरस भारत और श्रेष्ठ भारत की निशानी।

 

 

Topics: वायुसेना दिवसभारतीय वायुसेना स्थापना दिवसनिर्मलजीत सिंह सेखोंवायुसेना
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
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