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Sheikh Hasina को फांसी तो तय थी, ट्रिब्यूनल ने की कोरी भरपाई, खुद ही आरोप लगाए, खुद ही सजा सुनाई

पांच आरोपों में दी गई सजा, हसीना देश से बाहर हैं इसलिए आगे क्या कार्रवाई होगी, फिलहाल कहना मुश्किल है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Nov 17, 2025, 03:42 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
बांग्लादेश के मुख्य लोक अभियोजक ताजमुल इस्लाम शेख हसीना के विरुद्ध पांच आरोप पढ़कर सुनाते हुए (फाइल चित्र)

बांग्लादेश के मुख्य लोक अभियोजक ताजमुल इस्लाम शेख हसीना के विरुद्ध पांच आरोप पढ़कर सुनाते हुए (फाइल चित्र)

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ‘युद्ध अपराधों’ सुनवाई करते आ रहे अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 ने आज सुबह हसीना के विरुद्ध 453 पृष्ठ का फैसला पढ़ना क्या शुरू किया, नतीजे की बाबत हर एक की जबान पर बस यही सुनाई दे रहा था कि हसीना को बेशक फांसी दी जाएगी। और हुआ भी वही। करीब ढाई बजे हसीना पर दायर ‘पांच आरोपों’ के लिए ट्रिब्यूनल ने अपना आखिरी फैसला सुनाया। कड़े से कड़े फैसले की मांग तो पहले से की ही जा रही थी लिहाजा हसीना के साथ, उनके पूर्व सहयोगी असदुज्जमां खान कमाल के खिलाफ पिछले साल जुलाई में उस इस्लामी देश में हुए ‘छात्र विद्रोह’ के दौरान ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ में दोषी पाए जाते हुए फांसी की सजा दी।

उल्लेखनीय है कि शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के अलावा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया गया था। लेकिन अब्दुल्ला चूंकि सरकारी गवाह बन गया था इसलिए उसे सिर्फ 5 साल की सजा सुनाई गई है। न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मोजुमदार की अध्यक्षता वाला तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण ने यह फैसला सुनाया है।

यहां बता दें कि आरोप के अनुसार, 78 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री हसीना ने ‘छात्र विद्रोह को दबाने के लिए एक घातक कार्रवाई का आदेश’ दिया था। इस आरोप पर मुकदमे का सामना करने के लिए उन्होंने भारत से वापस लौटकर न्यायाधिकरण के सामने प्रस्तुत होने के ‘आदेशों की अवहेलना’ की, जिसके कारण पिछले साल 5 अगस्त को उन्हें पद से हटा दिया गया था।

आखिर शेख हसीना पर ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ मामले में वे पांच आरोप हैं क्या? इन आरोपों में ‘हत्या को रोकने में विफलता’ का आरोप भी शामिल है, जो बांग्लादेशी कानून के तहत मानवता के विरुद्ध अपराध माना जाता है। उन्होंने अभियुक्तों के दोषी पाए जाने पर ‘मृत्युदंड की मांग’ की है।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (File Photo)

अभियोजकों ने न्यायाधिकरण से यह भी अनुरोध किया था कि यदि तीनों अभियुक्त दोषी पाए जाते हैं तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाए और उसे पीड़ितों के परिवारों में बांट दिया जाए। हालांकि, बचाव पक्ष ने उनके बरी होने की उम्मीद जताई है। उधर पूर्व प्रधानमंत्री हसीना सभी आरोपों से इनकार कर चुकी हैं।

बांग्लादेश के नागरिकों को उम्मीद है कि ट्रिब्यूनल द्वारा सुनाए जाने वाले फैसले का बांग्लादेश टेलीविजन और निजी चैनलों पर सीधा प्रसारण किया जाना था, लेकिन इसमें ट्रिब्यूनल ही अंतिम फैसला ​लेगा। हसीना ट्रिब्यूनल में तीन अन्य मामलों का भी सामना कर रही हैं, जिनमें से दो जबरन गायब होने के हैं और एक 2013 में मोतीझील के शापला छतर में कथित सामूहिक हत्याकांड से संबंधित है।

गत 2 जुलाई को ट्रिब्यूनल ने हसीना को एक स्थानीय नेता के साथ फोन पर बातचीत के दौरान न्यायाधिकरण के बारे में की गई टिप्पणियों के लिए ‘अदालत की अवमानना’ ​​करने पर छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायाधिकरण ने महीनों तक उन पर सामूहिक हत्याओं का आदेश देने का आरोप लगाते हुए गवाहियां सुनीं।

पिछले साल हुए विद्रोह के बाद, हसीना के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों का आरोप लगाते हुए जांच एजेंसी में एक शिकायत दर्ज की गई थी। इसके बाद जांचकर्ताओं ने जांच शुरू की और इसे पूरा करने के बाद, 12 मई को मुख्य अभियोजक कार्यालय को एक रिपोर्ट सौंपी। अभियोजन पक्ष ने 135 पृष्ठों का आरोपपत्र, 8,747 पृष्ठों के दस्तावेज और ‘साक्ष्य’ के साथ प्रस्तुत किया था।

हसीना, कमाल और मामून के खिलाफ औपचारिक आरोप गत 1 जून को ट्रिब्यूनल में प्रस्तुत किए गए थे। न्यायाधिकरण ने उसी दिन मामले का संज्ञान लिया और मुकदमा शुरू करने का आदेश दिया था। इसके बाद, 10 जुलाई को उसने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए।

गत 4 अगस्त को अभियोजन पक्ष के पहले गवाह की गवाही के साथ कार्रवाई शुरू हुई। सूचीबद्ध 81 गवाहों में से, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक मामून और जांच अधिकारी सहित कुल 54 लोगों ने गवाही दी। गत 23 अक्तूबर को बहस समाप्त होने के बाद, न्यायाधिकरण ने फैसले की तारीख 13 नवंबर तय की थी। लेकिन उस दिन तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाने के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की।

नतीजे की बाबत हर एक की जबान पर बस यही सुनाई दे रहा था कि हसीना को बेशक फांसी दी जाएगी (File Photo)

जैसा पहले बताया, पहले आरोप में प्रतिवादियों पर हत्या, हत्या के प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्यों का आरोप लगाया गया था। उन पर अवामी लीग और उसके सहयोगियों के कानून प्रवर्तन और हथियारबंद कार्यकर्ताओं द्वारा नागरिकों के विरुद्ध किए गए अपराधों को बढ़ावा देने, भड़काने, सुविधा प्रदान करने, उनमें सहभागी होने और उन्हें रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया गया था।

दूसरा आरोप छात्र प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए घातक हथियारों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन के इस्तेमाल का आदेश देना था, जिसमें अभियुक्त कथित तौर पर उपद्रव की जिम्मेदारी, उसमें मिलीभगत, उसके लिए सुविधा प्रदान करने और षड्यंत्र रचने के दोषी हैं।

तीसरा आरोप 16 जुलाई को बेगम रोकेया विश्वविद्यालय के छात्र अबू सईद की हत्या से संबंधित था, जहां उन्होंने आदेश जारी किए, उकसाया और सुविधा प्रदान की, षड्यंत्र रचा और अपराध में सहभागी थे।

चौथा आरोप प्रतिवादियों पर 5 अगस्त को राजधानी के चंखरपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या की साजिश रचने का आरोप है, जिसमें प्रत्यक्ष आदेश, उकसावा, सुविधा प्रदान करना, सहभागिता और षड्यंत्र शामिल है।

पांचवां आरोप पांच प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या और एक अन्य को घायल करने से संबंधित है। इसमें तीनों पर पांच शवों और एक अन्य प्रदर्शनकारी को जिंदा जलाने का भी आरोप लगाया गया था, जिसमें प्रतिवादी कथित रूप से मिलीभगत, सुविधा और उकसावे के माध्यम से शामिल थे।

Topics: tribunalBangladeshबांग्लादेशSheikh Hasinadhakayunusपूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीनाicct
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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