जिहादी हाफिज सईद के पॉलिटिकल विंग में 'मीटिंग' करने गया शाहबाज का मंत्री तलाल? इस्लामाबाद और आतंक के मेल का एक और सबूत
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जिहादी हाफिज सईद के पॉलिटिकल विंग में ‘मीटिंग’ करने गया शाहबाज का मंत्री तलाल? इस्लामाबाद और आतंक के मेल का एक और सबूत

अमेरिका समेत कई देशों ने सईद के संगठन पर लाखों डॉलर के ईनाम घोषित किए, लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार या तो उसे राजनीतिक मंच मुहैया कराया या फिर केवल अंतरराष्ट्रीय दबाव में ही कुछ सख्त दिखावे की कार्रवाई की

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Nov 8, 2025, 12:17 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और जिहादी सरगना हाफिज सईद (Representational Image)

प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और जिहादी सरगना हाफिज सईद (Representational Image)

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की सरकार में गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी अभी दो दिन पहले 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की राजनीतिक शाखा पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के दफ्तर में गया था, जहां उसने वहां उस ‘पार्टी’ के नेताओं के साथ मीटिंग की। तलाल की इस हरकत से एक बार फिर साफ हो गया है कि पाकिस्तानी हुकूमत के आतंकवाद के साथ गहरे संबंध हैं और इस्लामाबाद आतंक को लेकर दोगला रवैया अपनाए हुए है। इस घटना ने न केवल पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी दावों की पोल खोली है, बल्कि सरकारी संरक्षण में पल रहे आतंकी नेटवर्कों को भी उजागर कर दिया है।

शाहबाज शरीफ का बहुत करीबी माना जाने वाला मंत्री तलाल चौधरी फैसलाबाद स्थित PMML दफ्तर में जाकर वहां पार्टी नेताओं से मिला है। इस बाबत पीटीआई की रिपोर्ट पूरा ब्योरा प्रस्तुत करती है। यह पीएमएमएल वही संगठन है जिसे आतंकी संगठन जमात-उद-दावा की राजनीतिक शाखा के रूप में जाना जाता है। तलाल की वहां मीटिंग को पाकिस्तानी मीडिया के एक वर्ग और निष्पक्ष राजनीतिक विश्लेषकों ने सीधे-सीधे आतंक को सरकारी संरक्षण का सबूत बताया है।

मंत्री तलाल चौधरी (File Photo)

तलाल के इस दौरे को लेकर शरीफ सरकार की यह कहकर आलोचना हो रही है कि भारत और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हाफिज सईद और उससे जुड़ी संस्थाओं को ‘सीधे राजनीति में भागीदारी’ दी जा रही है।

मिलती रही है आतंक को सरकारी पनाह
तलाल का हाफिज सईद की ‘पार्टी’ के दफ्तर में जाना और वहां मीटिंग करना कोई पहली घटना नहीं है जो सरकार और आतंक में साठगांठ दिखाती है। 2019 में टेरर फंडिंग के आरोप में जब हाफिज सईद को पाकिस्तान में ‘सजा’ सुनाई गई और वह लाहौर की जेल भेजा गया, तब भी उसके संगठन की गतिविधियां पाकिस्तान में बेरोकटोक चलती रही थीं।

उससे भी पहले, पंजाब विधानसभा के स्पीकर मलिक अहमद खान ने भी PMML की कसूर में हुई रैली में भाग लिया था और खुलकर हाफिज सईद की प्रशंसा की थी।हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है, बावजूद इसके इन पर अक्सर पाकिस्तान में ‘कानूनी कार्रवाई’ एक दिखावे तक सीमित रहती है।

2019 में टेरर फंडिंग के आरोप में जब हाफिज सईद को पाकिस्तान में ‘सजा’ सुनाई गई और वह लाहौर की जेल भेजा गया, तब भी उसके संगठन की गतिविधियां पाकिस्तान में बेरोकटोक चलती रही थीं (File Photo)

पाकिस्तान की राजनीति में ऐसे कई उदाहरण हैं जब प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े नेता खुलेआम राजनीतिक आयोजन करते रहे हैं और चुनावों में अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेते रहे हैं। हाफिज सईद की बात करें तो उसे पिछले एक दशक से पाकिस्तान सरकार और उसकी एजेंसियों से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष पनाह मिलती रही है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर लगातार आतंकवादी संगठनों को प्रशिक्षण, हथियार व वित्तीय सहायता देने के आरोप लगते ही रहे हैं।

पाकिस्तान ने भारत और अन्य देशों की ओर से भारत में अपराध करने के जिम्मेदार आतंकवादियों के प्रत्यर्पण संबंधी डोसियर का बार-बार खारिज किया है। मुंबई हमलों की जांच में भी पाकिस्तान सरकार और उसकी एजेंसियों पर लगातार जानकारी छुपाने और सहयोग देने से बचने के आरोप लगे थे।

वैश्विक दबाव के चलते पाकिस्तान कभी-कभी आतंकवाद पर ‘कड़ी’ कार्रवाई का दावा करता है, जैसे-आतंकी संगठनों की फंडिंग रोकना या कुछ जिहादी सरगनाओं को दिखावे के लिए जेल में डालना, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट रहती है।आतंकवाद को सरकारी संरक्षण हमेशा मिलता रहता है। रमजान के समय फंडिंग पर रोक और आतंकी संगठनों के खिलाफ बयानबाजी की जाती है।

दरअसल आतंकी फंडिंग, उन्हें हथियारों की सप्लाई और पीओजेके में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को लेकर पाकिस्तान के पूरे ईकोसिस्टम की भूमिका बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर होती रही है।

पंजाब विधानसभा के स्पीकर मलिक मोहम्मद अहमद खान (बाएं), लश्करे तैयबा के कमांडर और पहलगाम के साजिशकर्ता सैफुद्दीन खालिद (मध्य में) और आतंकवादी हाफिज सईद के बेटे तलहा सईद (सबसे दांए) के साथ (File Photo)

लेकिन पाकिस्तान के रीढ़हीन नेताओं और प्रशासन के आतंकवादियों के प्रति नरम और समर्थन भरे रवैये के चलते हाफिज सईद जैसे आतंकी लगातार सियासत और अवाम में अपने प्रभाव का विस्तार करते रहे हैं। अमेरिका समेत कई देशों ने सईद के संगठन पर लाखों डॉलर के ईनाम घोषित किए, लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार या तो उसे राजनीतिक मंच मुहैया कराया या फिर केवल अंतरराष्ट्रीय दबाव में ही कुछ सख्त दिखावे की कार्रवाई की। तलाल चौधरी का PMML के दफ्तर में जाकर हाफिज के साथियों से मुलाकात करना महज एक उदाहरण है, जो पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति ‘दोगली नीति’ और सरकारी संरक्षण को उजागर करता है।

पीएमएमएल और जमात उद दावा के बीच संबंध
इन दोनों संगठनों के बीच कानूनी और सांगठनिक संबंध पूरी तरह से स्थापित हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने गए हैं। PMML, पहले Milli Muslim League (MML) के नाम से शुरू हुआ था, जिसे सीधे तौर पर जमात और इसके प्रमुख सरगना हाफिज सईद ने स्थापित किया था। अमेरिकी विदेश विभाग और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा MML/PMML को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का राजनीतिक फ्रंट माना गया है।

पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने इसका पंजीकरण बार-बार खारिज किया है और इसे चुनावी राजनीति में आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। अमेरिका ने 2018 में MML और उससे संबद्ध संगठनों को “आतंकी संगठन” के रूप में नामित किया था और उन्हें लश्करे तैयबा के छद्म नाम ठहराया था।

हाफिज सईद का बेटा तलहा सईद, PMML का अध्यक्ष है, जबकि संगठन के कई अन्य बड़े सरगना भी लश्कर या जमात उद दावा से सीधे जुड़े रहे हैं। जमात की राजनीतिक योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए ही PMML/MML का गठन हुआ, ताकि आतंकी संगठन को राजनीतिक वैधता मिल सके और वे चुनावों में भाग ले सकें।

Topics: islamistlashkar e tayybaहाफिज सईदपाकिस्तानHafiz SaeedPakistanshahbaz sharifआतंकवादUNterrorismfatf
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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