गुजरात एटीएस और कोस्ट गार्ड ने लक्षद्वीप के समुद्र में एक साहसिक ऑपरेशन को अंजाम दिया। करीब 3 हजार करोड़ की 536 किलो ड्रग्स ले जा रही नाव जब्त की गई। मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल 5 पाकिस्तानियों को भी गिरफ्तार किया गया। ये जानना ज्यादा दिलचस्प है कि गुजरात पुलिस और कोस्ट गार्ड ने इस साहसिक ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया।
इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स पकड़ने के लिए गुजरात पुलिस, तटरक्षक बल और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों सहित समुद्री और हवाई मार्गों पर एजेंसियों द्वारा किए गए प्रयासों को जानने से पहले, आइए पूरी घटना को समझते हैं।
ड्रग्स से भरी नाव जब्त, 5 पाकिस्तानियों को पकड़ा गया
गुजरात एटीएस और कोस्टगार्ड ने एक संयुक्त अभियान में लक्षद्वीप के उत्तर-पश्चिम में 160 समुद्री मील और मुंबई के दक्षिण-पश्चिम में 490 समुद्री मील दूर ईरानी नाव “आजाद” से 536 किलोग्राम मेथमफेटामाइन और हेरोइन जब्त की। नाव पर सवार पांच पाकिस्तानियों, मोहम्मद याकूब बलूची, शकीउल्लाह, फरीदुल्ला, अहमद खान और वहीदुल्ला खान को गिरफ्तार कर लिया गया। ये पांचों पाकिस्तान के पेशावर के मूल निवासी हैं। सभी से पूछताछ में पता चला कि आजाद नाव ईरान के कोनारक से रवाना हुई थी, जिसमें पाकिस्तान के ग्वादर से दूसरी नाव के जरिए ड्रग्स लोड की गई थी। आजाद नाव पर सवार इन पांचों पाकिस्तानियों को गिरफ्तार कर इनके खिलाफ गुजरात एटीएस में शिकायत दर्ज की गई है। सभी आरोपियों को एटीएस ने रिमांड के लिए कोर्ट समक्ष पेश करने पर कोर्टने 13 दिन के रिमांड मंजूर किया है।

अहमदाबाद में हुई पहली बैठक की खबर मिली
दरअसल इस साहसिक ऑपरेशन की नींव गुजरात एटीएस को मिली जानकारी के आधार पर 10 सितंबर 2026 को रखी गई थी। गुजरात एटीएस के एक पुलिस अधिकारी को 10 सितंबर को सूचना मिली कि अहमदाबाद में एक नाइजीरियाई युवक ने ड्रग डीलिंग मामले में मीडियेटर के माध्यम से गुजरात के एक वॉन्टेड आरोपी के साथ बैठक की है। जानकारी मिली कि आजाद नाम की नाव के जरिए करीब 500 किलोग्राम ड्रग्स मंगाया गया है। बताया गया कि ड्रग्स की मात्रा के लिए हवाला के जरिए एडवांस पैसे देकर ईरान से ड्रग्स भेजा जाना था। पुलिस अधिकारी ने इसकी जानकारी गुजरात एटीएस के उच्च अधिकारियों को दी तो गुजरात एटीएस ने दिल्ली स्थित भारतीय तटरक्षक मुख्यालय से संपर्क किया। बाद में, गुजरात एटीएस के शीर्ष अधिकारियों की एक टीम कोच्चि, केरलम के लिए रवाना हुई और इस तरह दिलधड़क ऑपरेशन का पहला चरण शुरू हुआ।
गुजरात एटीएस और कोस्ट गार्ड ने कोच्चि से संयुक्त अभियान चलाया
कोच्चि पहुंचने के बाद गुजरात एटीएस के अधिकारियों ने तटरक्षक अधिकारियों के साथ एक संयुक्त टीम बनाई और तटरक्षक बल की नाव से गहरे समुद्र में नाव की तलाश शुरू की। 14 सितम्बर,2026 को शुरू किए गए इस ऑपरेशन के दौरान 25 सितम्बर,2026 को लक्षद्वीप के पश्चिम में भारतीय जल सीमा में संदिग्ध बोट दिखने पर कोस्टगार्ड ने इस “आजाद” बोट को रोक लिया। “आजाद” तलाशी लेने पर उसमें से 536 किलोग्राम ड्रग्स पाए गए और उसमें सवार पांच पाकिस्तानियों को मुंबई ले जाया गया। इस प्रकार ऑपरेशन 14 सितंबर को शुरू हुआ और 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुआ। यह ऑपरेशन 17 दिनों तक चला।
गुजरात के क्षेत्रफल से भी ज्यादा क्षेत्रफल में नाव की तलाश की
लक्षद्वीप के समुद्र तट के करीबसे पाकिस्तानी तस्करों से भरी नाव मिली। यदि लक्षद्वीप के तटीय क्षेत्र पर विचार किया जाए तो तटीय क्षेत्र गुजरात राज्य के कुल क्षेत्रफल से 1.96 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक है। जब इतने बड़े इलाके में बहुत सारी नावें चल रही हों, तो उन सभी नावों के बीच एक संदिग्ध नाव को ढूंढना बहुत मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, गुजरात एटीएस और कोस्ट गार्ड ने मिलकर इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
यह खेप अंतरराष्ट्रीय तस्कर द्वारा भेजी गई थी
अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर और भगोड़े हाजी सलीम ने ड्रग्स की खेप भेजी थी। ये सभी 536 किलोग्राम ड्रग्स एक नाइजीरियाई युवक के जरिए पंजाब पहुंचाई जानी थी, ऐसा आरोपियों से शुरुआती पूछताछ में पता चला है। इस नाव में ईरान के बंदरगाह से ग्वादर के पास एक छोटी नाव के जरिए ड्रग्स लादी गई थी। “आजाद” नाव को माल तमिलनाडु के तटों पर उतारना था और वहां से विभिन्न वाहनों में नाइजीरियाई युवक के माध्यम से पंजाब पहुंचना था। जब्त किए गए ड्रग्स में 400 किलोग्राम मेथमफेटामाइन और 126 किलोग्राम हेरोइन शामिल है।
तस्कर स्टारलिंक के सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे
आमतौर पर समुद्र में मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करते हैं, लेकिन जो पांच पाकिस्तानी ड्रग्स की खेप लेकर निकले थे, वे आजाद नाव में स्टारलिंक सैटेलाइट डिवाइस के जरिए बीच समुद्र में भी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे। इस तरह तस्कर समुद्र में रहते हुए भी अपने वरिष्ठों और अंतरराष्ट्रीय आकाओं के संपर्क में रहते थे।

















