रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पुलिस और सेना की एकता पर जोर देते हुए कहा कि इन दोनों के कार्य एक ही हैं और वो है देश की सुरक्षा। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस समाज की अखंडता की रक्षा करती है तो सेना देश की भौगोलिक अखंडता की रक्षा करती है।
वह राजधानी दिल्ली में आज (21 अक्तूबर) पुलिस समृति दिवस को संबोधित कर रहे थे। उसी दौरान रक्षा मंत्री ने ये बातें कही। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नेशनल पुलिस मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने पुलिस और सेना को देश की सुरक्षा के मजबूत स्तंभ करार दिया। सिंह ने अपने गृह मंत्री रहते हुए और अब रक्षा मंत्री के तौर पर मिले अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (सीएपीएफ) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड हुई।
समाज और पुलिस के रिश्ते पर बात
सिंह ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि ये दिन हमारी पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेस की सुप्रीम सैक्रिफाइस को याद करने का है। उन्होंने उन सभी को श्रद्धांजलि दी, जो देशवासियों की रक्षा में जान गंवा चुके हैं। सिंह ने बताया कि समाज और पुलिस एक-दूसरे पर निर्भर हैं। समाज तभी शांति और तरक्की की ओर बढ़ सकता है, जब इसमें सुरक्षा, न्याय और विश्वास की मजबूत भावना हो। उन्होंने कहा, “पुलिस समाज की अखंडता की रक्षा करती है, जबकि सेना भौगोलिक अखंडता की।” बाहरी सुरक्षा के लिए आर्म्ड फोर्सेस और कोस्ट गार्ड्स हैं, लेकिन आंतरिक सुरक्षा पुलिस ही संभालती है। वो इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है।
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सेना-पुलिस: सुरक्षा के दो स्तंभ
रक्षा मंत्री ने सेना और पुलिस की एकजुटता पर बात की। उन्होंने कहा कि दोनों में वही जज्बा है, जो देश को बचाने का है। “चाहे सेना हो या पुलिस, दोनों देश की सुरक्षा के पिलर हैं।” उनके मुताबिक, अगर सेना सीमाओं पर खड़ी है, तो पुलिस समाज के हर कोने में कानून-व्यवस्था बनाए रखती है। ये दोनों मिलकर ही राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं। सिंह ने पुलिसकर्मियों की मेहनत की तारीफ की, जो रोजाना चुनौतियों का सामना करते हैं।
पुलिस स्मृति दिवस की शुरुआत कैसे हुई
इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये दिन 1959 की घटना की याद दिलाता है। 21 अक्टूबर को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों ने भारतीय पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। दस बहादुर पुलिसवाले बलिदान हो गए थे। तब से हर साल ये दिन पूरे देश में मनाया जाता है, ताकि पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कुर्बानियों को याद रखा जाए। मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित नेशनल पुलिस मेमोरियल पर होता है। 2018 में पीएम मोदी ने ही ये मेमोरियल राष्ट्र को समर्पित किया था, जो पुलिसकर्मियों के योगदान को सम्मान देता है। आजादी के बाद से अब तक हजारों पुलिसकर्मी ड्यूटी पर बलिदान हो चुके हैं।















