ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार गलत जानकारियां फैलाई जा रही है। लेकिन, रक्षा मंत्रालय स्पष्ट किया है कि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर (7 से 10 मई) के दौरान छह सैन्यकर्मियों के बलिदान की खबर जनता से कभी छिपाई नहीं गई।
ऑपरेशन पाकिस्तान के खिलाफ चलाया गया था। जब ऑपरेशन रोक दिया गया, उसके ठीक एक दिन बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने प्रेस ब्रीफिंग में सैन्यकर्मियों और कुछ आम नागरिकों की मौत की जानकारी दी थी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन शहीदों को वीरता पुरस्कार भी दिए गए, और यह जानकारी 14 अगस्त 2025 को जारी प्रेस रिलीज में सार्वजनिक रूप से बताई गई। आर्मी की ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी इन बहादुरों को श्रद्धांजलि तुरंत दी गई।
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फेक खबरों का सरकार ने किया खंडन
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 28 जुलाई को संसद में दिए बयान में सैन्यकर्मियों की मौत से इनकार कर दिया था। रक्षा मंत्रालय ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये जानबूझकर गुमराह करने वाले और तथ्यों से दूर हैं। मंत्रालय ने बताया कि राजनाथ सिंह के उस बयान का संदर्भ समझना जरूरी है। उस समय मीडिया के कुछ हिस्सों और सोशल मीडिया पर एक झूठी अफवाह बहुत तेजी से फैल रही थी कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय पायलट मारे गए हैं।
यह कहानी पूरी तरह गलत थी, लेकिन इसे जानबूझकर बढ़ावा दिया जा रहा था ताकि ऑपरेशन की सफलता को कम करके दिखाया जा सके और लोगों का मनोबल गिराया जा सके।
रक्षा मंत्री का बयान ठीक इसी झूठी अफवाह के जवाब में दिया गया था। यह किसी सामान्य इनकार जैसा नहीं, बल्कि उस खास गलत प्रचार का सीधा मुकाबला था जो उस वक्त काफी तेज हो गया था। सरकार का कहना है कि शहीदों की सूचना शुरू से ही सार्वजनिक रही—चाहे DGMO की प्रेस ब्रीफिंग हो, वीरता पुरस्कारों की घोषणा हो, या आर्मी की सोशल मीडिया पोस्ट्स। छिपाने का कोई सवाल ही नहीं था।
















