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जर्मनी में हिंदू धर्म का उदय: 33 साल बाद ऐतिहासिक सम्मेलन

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में 30-31 अगस्त 2025 को आयोजित पहला हिंदू सम्मेलन, जिसमें 400+ लोगों ने सनातन धर्म और एकजुटता पर चर्चा की।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह — edited by कुलदीप सिंह
Sep 14, 2025, 10:08 am IST
inविश्व
Germany Hindu Summit

सम्मेलन की तस्वीरें

जर्मनी में हिंदू धर्म को मानने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए सनातन धर्म और इसके मूल्यों को संजोने के लिए 30-31 अगस्त 2025 को फ्रैंकफर्ट में 33 साल बाद पहली बार एक बड़ा हिंदू सम्मेलन हुआ। इसका थीम था “एकजुट समुदाय, मजबूत जर्मनी”। ये दो दिन का आयोजन हिंदू समुदाय को एकजुट करने और उनकी पहचान को और मजबूत करने का शानदार मौका था। इसमें 400 से ज्यादा लोग शामिल हुए, साथ ही 80 से अधिक हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि भी आए। भारत, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और जर्मनी के मूल हिंदुओं के अलावा वो लोग भी थे, जिन्होंने हिंदू धर्म अपनाया है। ये सम्मेलन भारतीय डायस्पोरा की प्रोफेशनल उपलब्धियों और सांस्कृतिक योगदान को दिखाने का एक बेहतरीन मंच साबित हुआ।

राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव

सम्मेलन की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद (VHP) जर्मनी के अध्यक्ष रमेश जैन ने की। CDU हेस्सेन के महासचिव लियोपोल्ड बोर्न ने अपने खास भाषण में कहा कि जर्मन राजनीतिक दल भारतीय डायस्पोरा के साथ जुड़ने को तैयार हैं और उनके योगदान को बहुत अहमियत देते हैं। डॉ. गुंजन भारद्वाज (पार्टेक्स एन.वी. के संस्थापक) ने पेशेवर कामयाबी और धर्म के मूल्यों को साथ-साथ जोड़ने की बात कही। वहीं, डॉ. असोका वोहरमन (पैट्रिजिया इम्मोबिलियन के सीईओ) ने यूरोप में हिंदू समुदाय को और दृश्यमान बनाने की जरूरत बताई।

स्वामी विज्ञानंद ने सभी हिंदू संगठनों और मंदिरों से HOTA फोरम (हिंदू संगठन, मंदिर और एसोसिएशन) के तहत एकजुट होने की अपील की। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और समुदाय के हितों की रक्षा के लिए एकता पर जोर दिया। साथ ही, विदेशी छात्रों को सांस्कृतिक, शैक्षिक और भावनात्मक सपोर्ट देने की बात भी कही। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अलोक कुमार ने वीडियो मैसेज के जरिए इस पहल की तारीफ की और दुनिया भर में हिंदू एकता की बात कही।

सत्र और चर्चाएँ

सम्मेलन में छह बड़े सत्र और चर्चाएँ हुईं, जिनमें 30 से ज्यादा वक्ताओं ने हिस्सा लिया:

हिंदू नेतृत्व की एकता: ISKCON, रामकृष्ण मिशन, भक्ति मार्ग, आर्ट ऑफ लिविंग, योग विद्या और कमाक्षी अम्बाल मंदिर के संतों ने अपने विचार रखे। इनके योगदान को एक खास पुस्तिका में समेटा गया।

हिंदुओं के बीच एकता: बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और भारत के प्रतिनिधियों ने आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की बात कही।

जर्मन समाज में हिंदुओं की स्थिति: विशेषज्ञों ने सुझाया कि राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, मीडिया और अंतरधार्मिक मंचों पर हिंदुओं का प्रतिनिधित्व कैसे बढ़ाया जाए।

भविष्य के नेतृत्व का निर्माण: युवाओं के लिए सत्र में धर्म, सेवा, ईमानदारी और प्रकृति के साथ तालमेल जैसे मूल्यों पर फोकस रहा। माता-पिता से घर पर हिंदू मूल्यों को बढ़ावा देने की अपील की गई।

मंदिरों और संगठनों की भूमिका: जर्मनी के मंदिरों ने दिखाया कि त्योहार, सांस्कृतिक प्रोग्राम और सेवाएँ हिंदू पहचान को कैसे मजबूत करते हैं।

HOTA फोरम की शुरुआत: आखिरी सत्र में HOTA फोरम को औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया, जिसका मकसद हिंदू संगठनों को एकजुट कर जर्मनी और बाहर साफ-सुथरी पहचान और मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करना है।

जर्मनी में बढ़ता हिंदू समुदाय

जर्मनी में आज करीब 3-4 लाख भारतीय डायस्पोरा के लोग हैं, जिनके 3,000 से ज्यादा संगठन और 80 से अधिक मंदिर हैं। कई संगठन हिंदू त्योहार मनाते हैं, लेकिन अक्सर इन्हें सांस्कृतिक इवेंट की तरह पेश किया जाता है, न कि खुलकर हिंदू रूप में। सम्मेलन में साफ हुआ कि भारत के बाहर भारतीय संस्कृति को हिंदू संस्कृति के तौर पर ही देखा जाता है। इसलिए डायस्पोरा को अपनी हिंदू पहचान को आत्मविश्वास के साथ सामने लाना चाहिए।

 

Topics: हिंदू सम्मेलन जर्मनीभारतीय डायस्पोराफ्रैंकफर्ट हिंदू सम्मेलनसनातन धर्मHOTA फोरमsanatana dharmaहिंदू एकताHindu Unityindian diasporaHindu Conference GermanyFrankfurt Hindu ConferenceHOTA Forum
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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