कौन हैं सनातन की साधना करने वाले राधेश्याम शुक्ला, जिनकी प्रेरक कहानी गीता प्रेस ने साझा की
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कौन हैं सनातन की साधना करने वाले राधेश्याम शुक्ला, जिनकी प्रेरक कहानी गीता प्रेस ने साझा की

शुक्ला बताते हैं कि शुरुआती दौर में गीता प्रेस की मशीनें अपेक्षाकृत छोटी थीं। चित्र उत्तरकाशी से छपकर गोरखपुर आते थे। समय के साथ काम का विस्तार हुआ, आधुनिक मशीनें स्थापित हुईं और चित्रों की छपाई भी यहीं होने लगी।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा
Jun 1, 2026, 11:20 pm IST
inधर्म-संस्कृति
राधेश्याम शुक्ला

राधेश्याम शुक्ला

कुछ लोग नौकरी को केवल आजीविका का साधन मानते हैं, जबकि कुछ अपने कार्य को सेवा और साधना का रूप दे देते हैं। गोरखपुर स्थित गीता प्रेस के कल्याण विभाग से जुड़े राधेश्याम शुक्ला ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिनके जीवन में कर्म के प्रति निष्ठा और सनातन धर्म के प्रति समर्पण की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। वर्ष 2009 में गीता प्रेस के अत्यंत महत्वपूर्ण ‘कल्याण’ विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका संस्थान से जुड़ाव समाप्त नहीं हुआ। सहकर्मियों के अनुरोध पर उन्होंने पुनः विभाग की जिम्मेदारी संभाली और तब से वह लगातार सनातन की सेवा में कार्यरत हैं।

राधेश्याम शुक्ला बताते हैं कि वर्ष 1978 में उनकी नियुक्ति गीता प्रेस के कल्याण संपादकीय विभाग में हुई थी। तभी से उनका जीवन इस संस्थान और इसके उद्देश्य के साथ जुड़ गया। वे कहते हैं, “मेरा परिवार और मेरे माता-पिता शुरू से ही सनातन धर्म के संस्कारों से जुड़े रहे हैं। मैंने कभी भी गीता प्रेस के कार्य को नौकरी नहीं माना, बल्कि इसे सेवा और साधना के रूप में किया। पढ़ने-लिखने में मेरी विशेष रुचि रही है और आज भी वही भावना बनी हुई है।”

समय के साथ बदली तकनीक

शुक्ला बताते हैं कि शुरुआती दौर में गीता प्रेस की मशीनें अपेक्षाकृत छोटी थीं। चित्र उत्तरकाशी से छपकर गोरखपुर आते थे। समय के साथ काम का विस्तार हुआ, आधुनिक मशीनें स्थापित हुईं और चित्रों की छपाई भी यहीं होने लगी। आज गीता प्रेस अत्याधुनिक प्रिंटिंग तकनीकों से लैस है, जिससे बड़ी संख्या में धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन संभव हो पा रहा है।

अनुवाद और कंपोजिंग सबसे बड़ी चुनौती

संपादकीय कार्य की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए वे बताते हैं कि अनुवाद और कंपोजिंग सबसे महत्वपूर्ण और जटिल प्रक्रियाएं हैं। किसी भी ग्रंथ के प्रकाशन से पहले उसे कई स्तरों की जांच और संपादन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। गीता प्रेस ने रामचरितमानस सहित अनेक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशन किया है। रामचरितमानस यहां चार अलग-अलग आकारों में प्रकाशित की जाती है, जिससे विभिन्न वर्गों के पाठकों की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।

शुचिता और पवित्रता सर्वोपरि

गीता प्रेस की विशेषता केवल धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन नहीं, बल्कि छपाई के दौरान सनातन धर्म की शुचिता और पवित्रता का पालन करना भी है। ऑफसेट प्रिंटिंग में आमतौर पर एल्कोहल डैम्पिंग का प्रयोग किया जाता है, जिससे छपाई अधिक स्पष्ट और आकर्षक होती है, लेकिन गीता प्रेस छपाई के लिए पारंपरिक कन्वेंशल डैम्पिंग पद्धति का उपयोग करता है। इसी प्रकार पुस्तकों की बाइंडिंग में भी विशेष सावधानी बरती जाती है। यहां ऐसी मशीनों का उपयोग नहीं किया जाता,जिनमें एनिमल जेली युक्त ग्लू हो। इसके स्थान पर सिंथेटिक एडहेसिव का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता बनी रही।

ग्रंथों से जुड़ा है श्रद्धा का भाव

राधेश्याम शुक्ला कहते हैं कि गीता प्रेस के पाठकों के लिए धार्मिक ग्रंथ केवल पुस्तकें नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था का प्रतीक हैं। लोग इन्हें भगवान की प्रतिमा के समान पूजते हैं। कई परिवारों में दशकों पुरानी रामचरितमानस या श्रीमद्भगवद्गीता आज भी सुरक्षित रखी जाती हैं और उनका नियमित पाठ किया जाता है। वे बताते हैं कि गीता प्रेस का प्रयास रहता है कि उसकी पुस्तकें इतनी मजबूत और टिकाऊ हों कि एक पीढ़ी द्वारा खरीदा गया ग्रंथ आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके। किसी परिवार की तीसरी पीढ़ी भी गर्व से कह सके कि यह पुस्तक उनके दादा के समय की है।

15 भाषाओं में 1800 पुस्तकों का प्रकाशन

आज गीता प्रेस 15 भाषाओं में लगभग 1800 प्रकार की पुस्तकों का प्रकाशन कर रहा है। संस्थान हर महीने लगभग 600 टन कागज का उपयोग कर उसे धार्मिक ग्रंथों के रूप में परिवर्तित करके देश-विदेश के पाठकों तक पहुंचाता है। यह केवल प्रकाशन का कार्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सनातन परंपरा के संरक्षण का एक सतत अभियान है। राधेश्याम शुक्ला का जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब कर्म में निष्ठा और उद्देश्य में समर्पण हो, तो सेवा ही साधना बन जाती है।

 

Topics: गीता प्रेसGita Pressराधे श्याम शुक्लाराधेश्याम शुक्ला की प्रेरक कहानीRadhe Shyam Shuklaसनातन धर्मSanatan DharmaRamcharit Manas
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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