पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर की सुरक्षा को और सुदृढ़ किया गया है। अब मंदिर के चारों मुख्य प्रवेश द्वारों पर तैनात पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरों से लैस कर दिया गया है। यह कदम हाल के दिनों में सुरक्षा संबंधी चूक को देखते हुए उठाया गया है, जिसका उद्देश्य मंदिर परिसर की निगरानी कड़ी करना और 12वीं शताब्दी के इस पवित्र मंदिर की गरिमा की रक्षा करना है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक गेट पर दो बॉडी कैमरे लगाए गए हैं, जो पुलिसकर्मियों की वर्दी के सीने की तरफ लगे हैं। उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड करने में सक्षम इन उपकरणों में पर्याप्त भंडारण क्षमता भी होती है। ये कैमरे मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की गतिविधियों और बातचीत को रिकॉर्ड करेंगे। एकत्रित डेटा पुलिस के पास सुरक्षित रहेगा और किसी भी जाँच या घटना की स्थिति में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। पुरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रतीक सिंह ने कहा, “श्री मंदिर की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। चारों प्रवेश द्वारों पर तैनात पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरे दिए गए हैं ताकि 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जा सके। किसी भी अप्रिय घटना की जाँच में यह रिकॉर्डिंग अहम सबूत साबित होगी।”
ये कैमरे उन गैर-सेवायतों की पहचान करने में भी मदद करेंगे जो सेवायत बनकर अवैध रूप से मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं। इसके अलावा, ये श्रद्धालुओं को प्रतिबंधित वस्तुएं अंदर ले जाने से रोकने और आम जनता को प्रतिबंधित मार्गों से गुजरने से रोकने में सहायक होंगे। यह कदम हाल के महीनों में हुई कई सुरक्षा चूकों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई थी, फिर भी श्रद्धालुओं द्वारा गुप्त जासूसी कैमरे और मोबाइल फोन लेकर मंदिर में प्रवेश करने की कई घटनाएं सामने आईं। जुलाई में अज्ञात लोग बाहरी दीवार ‘मेघनाद प्राचीर’ फांदकर मंदिर के अंदर घुस आए थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
अधिकारियों का मानना है कि बॉडी कैमरों की मौजूदगी न केवल संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी बल्कि पुलिसकर्मियों में जवाबदेही भी बढ़ाएगी। सिंह ने कहा, “इन कैमरों के प्रयोग से निगरानी और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा मंदिर परिसर में समग्र सुरक्षा और मजबूत होगी।” श्री मंदिर प्रशासन को उम्मीद है कि इन तकनीकी उपायों से देश के सबसे प्रतिष्ठित तीर्थ स्थलों में से एक की सुरक्षा और भी पुख्ता होगी और श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान अधिक सुरक्षित वातावरण मिलेगा।

















