भुवनेश्वर: पुरी स्थित 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को खोलने और उसमें सुरक्षित भगवान के आभूषण व अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की विस्तृत सूची तैयार करने के लिए श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने संशोधित दिशा-निर्देशों तथा एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव अब राज्य सरकार की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। सरकार की अनुमति मिलने के बाद रत्न भंडार खोलने के लिए एक शुभ तिथि का चयन किया जाएगा। यह निर्णय पुरी में आयोजित श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देव ने की।
रत्नभंडार के सूचीकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को मिली मंजूरी
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढी ने बताया कि समिति ने रत्न भंडार में रखे भगवान के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं के सूचीकरण और सत्यापन के लिए 11-पृष्ठीय व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है।
उन्होंने बताया कि, प्रबंधन समिति ने रत्न भंडार की सूचीकरण प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी दी है। प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है और उनकी अनुमति के बाद ही शुभ दिन पर सूचीकरण कार्य शुरू किया जाएगा।

दैनिक नीतियों और धार्मिक अनुष्ठानों को प्रभावित किए बिना होगा कार्य
पाढी ने बताया कि रत्न भंडार की पिछली सूची 48 वर्ष पहले 1978 में तैयार की गई थी। इस बार की सूचीकरण प्रक्रिया उसी रिकॉर्ड के साथ मिलान कर की जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यह कार्य मंदिर की दैनिक नीतियों और धार्मिक अनुष्ठानों को प्रभावित किए बिना किया जाएगा।
सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में की जाएगी और सभी कीमती वस्तुओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण होगा। सूचीकरण के दौरान भक्तों को बाहारकाठ क्षेत्र से दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
भगवान के लिए एक नया रत्न पलंक होगा स्थापित
समिति ने यह भी घोषणा की कि भगवान के लिए एक नया रत्न पलंक (देवताओं का शयन आसन) तैयार किया गया है, जिसे एक शुभ दिन पर स्थापित किया जाएगा। मंदिर की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह प्रतिबंध सेवायतों और मंदिर कर्मचारियों पर भी लागू होगा। साथ ही मंदिर के आंतरिक भाग में फोटोग्राफी पर भी रोक रहेगी। पाढी ने बताया कि प्रबंधन समिति ने राज्य सरकार से मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन के उपयोग और वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक लगाने के लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू करने का आग्रह किया है।
बैठक में मंदिर के वीआईपी प्रोटोकॉल दर्शन को सुव्यवस्थित करने तथा दिव्यांगजनों के लिए बेहतर सुविधा सुनिश्चित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सरल और समावेशी हो सके।
भक्त निवासों में बढ़े हुए पार्किंग शुल्क को घटाने का निर्णय
पुरी स्थित मंदिर-प्रशासित भक्त निवासों में बढ़े हुए पार्किंग शुल्क को लेकर उठी जन-चिंता के बीच समिति ने पार्किंग शुल्क 5 सौ रुपये से घटाकर 240 रुपये करने का निर्णय लिया। यह दर राज्य सरकार के नजदीकी श्री जगन्नाथ बल्लभ पार्किंग परिसर के बराबर रखी जाएगी।
पाढी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि पार्किंग शुल्क पास के सरकारी पार्किंग स्थल के समान होना चाहिए। पहले घोषित अधिक शुल्क को लेकर विभिन्न स्तरों से आपत्तियाँ प्राप्त हुई थीं।
समिति ने मंदिर परिसर के बुनियादी ढांचे और आगंतुक सुविधाओं की भी समीक्षा की। जानकारी दी गई कि नाटमंडप रैंप की संरचनात्मक खामियों को दूर कर दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन मिल सके। साथ ही ऐतिहासिक नाटमंडप (नृत्य मंडप) को वातानुकूलित (एयर-कंडीशन्ड) करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, समिति ने सेवायतों के बच्चों के लिए प्रस्तावित आदर्श गुरुकुल विद्यालय के निर्माण हेतु बिरला फाउंडेशन के साथ हुए मौजूदा समझौते को रद्द कर दिया। अब इसी उद्देश्य से किसी अन्य संस्था के साथ नया समझौता किया जाएगा। विद्यालय के लिए भूमि पुरी के माटितोटा क्षेत्र में पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है।
श्रीगुंडिचा मंदिर को शीघ्र ही श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोला जाएगा
समिति ने यह भी घोषणा की कि भगवान जगन्नाथ की जन्मस्थली माने जाने वाले श्रीगुंडिचा मंदिर को शीघ्र ही श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोला जाएगा। इसके लिए प्रति श्रद्धालु 10 रुपये का नाममात्र प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि बच्चों और दिव्यांगजनों को शुल्क से छूट दी जाएगी। मंदिर प्रशासन द्वारा जूते और मोबाइल फोन रखने की निःशुल्क सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
पाढी ने आगे बताया कि मानक मूल्यांकन के अनुसार, राज्य संचालित जगन्नाथ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के लिए दी गई भूमि के बदले मंदिर को 35 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त होगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), जो 12वीं शताब्दी के इस मंदिर का संरक्षक है, ने पिछले वर्ष अगस्त में रत्न भंडार के मरम्मत कार्य को पूरा कर लिया था। लगभग चार दशकों के अंतराल के बाद, 2024 में रत्न भंडार को नवीनीकरण और सूचीकरण की तैयारी के लिए खोला गया था।
समिति ने स्पष्ट किया कि बैठक में लिए गए सभी निर्णयों का उद्देश्य मंदिर के बेहतर प्रबंधन, संरक्षण, सेवायतों के कल्याण तथा विश्वविख्यात श्री जगन्नाथ मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना है।

















