Puri Jagannath Temple: रत्न भंडार के आभूषणों की गणना, तौल और डिजिटल दस्तावेजीकरण पूरा
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Puri Jagannath Temple: रत्न भंडार के आभूषणों की गणना, तौल और डिजिटल दस्तावेजीकरण पूरा

पुरी में रथयात्रा के दौरान, जब महाप्रभु जगन्नाथ अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) में विराजमान हैं, उसी अवधि श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में सुरक्षित पवित्र आभूषणों की गणना और तौल की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jul 20, 2026, 02:11 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: पुरी में रथयात्रा के दौरान, जब महाप्रभु जगन्नाथ अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) में विराजमान हैं, उसी अवधि श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में सुरक्षित पवित्र आभूषणों की गणना और तौल की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई। यह पहल मंदिर की बहुमूल्य धरोहरों के व्यवस्थित अभिलेखीकरण, सत्यापन और संरक्षण के उद्देश्य से चलाए जा रहे व्यापक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रक्रिया में उन सभी आभूषणों को शामिल किया गया, जिन्हें देवताओं द्वारा धारण किया जाता है, साथ ही वे आभूषण भी सम्मिलित हैं जो हाल ही में सम्पन्न स्नान पूर्णिमा के अवसर पर अर्पित किए गए थे।
इस दौरान कई महत्वपूर्ण और पवित्र आभूषणों की जांच की गई, जिनमें राहु रेखा, स्वर्ण चिता (मस्तक आभूषण) और रजत रसिका सहित अन्य वस्तुएं शामिल थीं। ये सभी आभूषण महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा से संबंधित हैं। प्रत्येक आभूषण की सावधानीपूर्वक गणना, तौल और पहचान की गई।

साथ ही पूरी प्रक्रिया को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और आधुनिक 3डी मैपिंग तकनीक के माध्यम से दर्ज किया गया। श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) मुख्य प्रशासक डा अरविंद पाढी ने बताया कि आभूषणों की पहचान रत्न और आभूषण विशेषज्ञों द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि सभी आभूषणों का सावधानीपूर्वक सत्यापन किया गया और उन्हें वर्ष 1978 की सूची (इन्वेंट्री) के साथ मिलान किया गया, जिससे उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस प्रक्रिया में उन रत्नजड़ित चिताओं को भी शामिल किया गया, जिन्हें देव स्नान पूर्णिमा के दौरान तीनों देवताओं द्वारा धारण किया गया था।

गणना और सत्यापन के बाद इन आभूषणों को मंदिर परंपरा के अनुसार भंडार मेकाप सेवायतों को वापस सौंप दिया गया। इसके अतिरिक्त ‘सुआ ठांटिया’ और रजत ‘रसिका सुआ ठांटिया’ जैसे दुर्लभ आभूषणों की भी गणना और तौल की गई, जिन्हें आम श्रद्धालु शायद ही कभी देख पाते हैं। रत्न भंडार निरीक्षण समिति के अध्यक्ष जस्टिस विश्वनाथ रथ ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं के अनुरूप संपन्न की गई। उन्होंने बताया कि 23 मई से रुकी हुई यह प्रक्रिया पुनः शुरू की गई और इसमें उन आभूषणों को शामिल किया गया, जिन्हें ‘अंग लागी’ (देह पर धारण किए जाने वाले) श्रेणी में रखा जाता है और जो आमतौर पर आंतरिक भंडार से बाहर रखे जाते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि निरीक्षण टीम सुबह लगभग 11:36 बजे निर्धारित स्थल में प्रवेश की और दोपहर 1:58 बजे तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इस दौरान राहु रेखा, रजत सुआ ठांटिया और चिता लागी जैसे आभूषणों की भी जांच की गई। यह कार्य सरकार द्वारा निर्धारित अतिरिक्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत किया गया। न्यायमूर्ति रथ ने यह भी स्पष्ट किया कि भीतरी रत्न भंडार के अधिकांश आभूषणों की गणना पूरी हो चुकी है, हालांकि ‘झोबा’ नामक एक आभूषण अभी शेष है, क्योंकि वह वर्तमान में देवता द्वारा धारण किया जा रहा है। इसे बाद में, जब यह पुनः भंडार में रखा जाएगा, तब सूचीबद्ध किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, भीतरी रत्न भंडार में रखे शेष आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की गणना अभी बाकी है। मंदिर प्रशासन जल्द ही अगले चरण की तिथि तय करेगा। यह पूरी पहल मंदिर की पवित्र संपत्तियों के संरक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

गुंडिचा मंदिर में आडप दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
उधर आडप बीजे के बाद अब महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा श्रीगुंडिचा मंदिर के जन्मवेदी पर विराजमान किया गया है, जहां मान्यता है कि महाप्रभु जगन्नाथ अपनी दिव्य लीलाओं का पुनर्सृजन करते हैं। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को आडप मंडप में आडप दर्शन का दुर्लभ अवसर मिला, जिससे वे अत्यंत भाव-विभोर और आनंदित दिखाई दिए।
रविवार को चतुर्धा विग्रह—महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन—के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। नौ दिवसीय यात्रा के दौरान यह विशेष दर्शन होने के कारण भीड़ काफी अधिक रही। श्रद्धालुओं की कतारें बड़शंख क्षेत्र तक पहुंचने की खबर है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा व्यापक बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी और दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को नाकचाना द्वार से बाहर निकाला गया।

हालांकि श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिला, लेकिन कई लोग आडप अबढ़ा (महाप्रसाद) ग्रहण करने से वंचित रह गए। इसका कारण मंदिर की नीतियों में देरी बताया गया। सूर्य पूजा के बाद भोजन पकाने की प्रक्रिया शुरू हुई और सकाल धूप लगभग शाम 4:10 बजे समाप्त हुई, जिसके बाद महाप्रसाद वितरण प्रारंभ किया गया। सुआर महा सुआर नियोग के सचिव नारायण महासुआर ने बताया कि लगभग 50 से 60 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद तैयार किया गया, जबकि अतिरिक्त 40 हजार लोगों के लिए भी व्यवस्था की गई थी। कुल मिलाकर करीब एक लाख श्रद्धालुओं के लिए भोजन उपलब्ध कराया गया।
रविवार से अन्न भोग की परंपरा शुरू हुई, जिसके तहत श्रद्धालुओं को आडप अबढ़ा प्राप्त हुआ। विशेष रूप से ‘अमृत अन्न’ जैविक चावल से तैयार किया गया, जिसे कोठ भोग में अर्पित किया गया। इसके साथ मूंग दाल और उड़द दाल का भी उपयोग पारंपरिक व्यंजनों के लिए किया गया।

दूसरे भोग मंडप के बाद बनकलागी नीति के कारण दर्शन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इस दौरान दत्ता महापात्र सेवायतों द्वारा भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। इससे पहले, देवताओं ने तीन दिनों तक रथों पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए थे, जिसके बाद वे पहंडी विधि से आडप मंडप में प्रवेश किए। सुबह की नीतियां, जैसे मंगल आरती, पूर्ण होने के बाद सुबह लगभग 10 बजे दर्शन शुरू हुआ। हालांकि, बनकलागी नीति देर रात तक चलने के कारण रात 9 बजे के बाद दर्शन बंद कर दिया गया।

Topics: रत्न भंडारपुरी जगन्नाथ मंदिरPuri Jagannath TempleRATNA BHANDARजगन्नाथ मंदिर ओडिशाडिजिटल दस्तावेजीकरणJagannath Temple OdishaDigital Documentation
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