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होम भारत

हमें न झुका पाएगा टैरिफ का दबाव

ट्रंप द्वारा थोपे गए टैरिफ ने भारत-अमेरिका संबंधों को सबसे खराब दौर में पहुंचा दिया है। भारत अब स्वदेशी, वैकल्पिक साझेदारों और स्वतंत्र वित्तीय ढांचे की दिशा में बढ़ सकता है

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Rajpal Singh Rawat
Sep 8, 2025, 12:48 pm IST
inभारत, स्वदेशी, विश्व, विश्लेषण, मत अभिमत

के. ए. बद्रीनाथ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाया गया टैरिफ अस्थिर और दबाव की रणनीति माना जा रहा है। इससे भारत-अमेरिका संबंध अब तक की सबसे खराब स्थिति में पहुंच गए हैं। ट्रंप का यह रवैया उनके अड़ियल स्वभाव और ‘अमेरिकी हित सर्वोपरि’ नीति को दर्शाता है। अप्रैल 2025 में अमेरिका ने भारत को सबसे पसंदीदा व्यापारिक साझेदार के ओहदे से हटाकर उन देशों की सूची में डाल दिया, जिन पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है।

पहले 25 प्रतिशत और फिर उसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना ट्रंप की पुरानी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे साझेदार देशों पर दबाव बनाते हैं। घोषित 21 दिन की समयसीमा इस बात की संकेत है कि ट्रंप एकतरफा दबाव डालते हुए भारत से जल्दबाजी में समझौता कराना चाहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है कि भारत अपने बाजार में अमेरिकी कृषि, मत्स्य और डेयरी क्षेत्रों को निर्बाध पहुंच दे, जो भारत के लिए एक ‘खराब सौदा’ साबित हो सकता है।

भारत ने ट्रंप द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को अनुचित और गैरजरूरी करार दिया है। ट्रंप का यह कहना कि ‘अभी केवल आठ घंटे ही हुए हैं, देखते हैं आगे क्या होता है’, उनके ‘वेट, वॉच और स्ट्राइक’ वाले आक्रामक रवैये को दर्शाता है। लेकिन इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर भारत की प्रतिक्रिया परिपक्व और संयमित रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इसकी भारी कीमत चुकाने को तैयार हैं, लेकिन किसानों, ग्रामीणों और श्रम-प्रधान औद्योगिक क्षेत्रों के हितों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप की टैरिफ नीति भारत के कृषि, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी।

भारत के सामने विकल्प

  •  भारत अपने सेब, अखरोट सहित 28 अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है, जैसा 2019 में अमेरिकी स्टील और एल्यूमीनियम पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक शुल्कों के जवाब में हुआ था।
  • जब तक अमेरिका अपनी व्यापार और टैरिफ नीतियों में सुधार नहीं करता, भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव जारी रह सकता है।
  • सरकार और सत्तारूढ़ दल स्थानीय उत्पादों और सेवाओं के प्रोत्साहन के लिए बड़े स्तर पर ‘मेड इन इंडिया’ अभियान चला सकते हैं।
  •  प्रधानमंत्री मोदी सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में लोगों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
  • भारत अपने व्यापार, निवेश, आर्थिक और भू-रणनीतिक संबंधों का पुनर्गठन कर सकता है। रूस, चीन व ब्राजील जैसे देशों से संबंध मज़बूत किए जा सकते हैं, जिन पर अमेरिका ने उच्च टैरिफ लगा रखा है।
  •  मौजूदा घटनाक्रम भारत को आक्रामक और रक्षात्मक हितों की सुरक्षा के लिए विदेश नीति को और सक्रिय करने का अवसर देता है, विशेषकर दक्षिण-दक्षिण व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने में।
  •  शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), क्वाड और ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय बहुआयामी संगठन भारत को वैश्विक जुड़ाव हेतु अपनी नीतियों को सुदृढ़ करने का अवसर देंगे।
  • भारत स्वतंत्र वित्तीय संरचना विकसित करने, डॉलर पर निर्भरता कम करने और ब्रिक्स मुद्रा जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है।
  •  तेल व मुद्राओं पर मध्यम और दीर्घकालिक नीतियां बनाना भारत के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों के देश विरोधी रुख और अमेरिका को लेकर राजनीतिक आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद यह स्वीकार किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। वे जानते हैं कि कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोलना न केवल आर्थिक रूप से अव्यावहारिक है, बल्कि हिंदू समाज, संघ विचार परिवार और पूरे राजनीतिक ढांचे के लिए भी स्वीकार्य नहीं होगा। वहीं, विश्लेषकों की मानें तो यदि इस वित्त वर्ष में टैरिफ 25 प्रतिशत पर बना रहता है, तो भारत की जीडीपी पर 0.2 से 0.4 प्रतिशत तक नकारात्मक असर पड़ सकता है। भारत से अमेरिका को होने वाला संपूर्ण 86.5 अरब अमेरिकी डॉलर का वार्षिक माल निर्यात गैर-प्रतिस्पर्धी या व्यावसायिक रूप से पूरा हो सकता है। भारत के लिए अमेरिका एक प्रमुख बाजार है, जो इसके वैश्विक वस्तु निर्यात में करीब 18 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 2.2 प्रतिशत का योगदान देता है। ट्रंप की टैरिफ नीति के बाद अटकलें थीं कि भारत अब अमेरिका से एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान नहीं खरीदेगा। अमेरिका की पेशकश के बावजूद इस विषय पर औपचारिक बातचीत अभी तक शुरू नहीं हुई है और संभव है कि आगे भी शुरू न हो।

(लेखक नई दिल्ली स्थित नॉन-पार्टिशन थिंक टैंक, सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड एंड होलिस्टिक स्टडीज के निदेशक और मुख्य कार्यकारी हैं

 

Topics: प्रधानमंत्री मोदीprime minister modiस्वदेशीSwadeshiटैरिफअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपtariffsUS President Donald Trumpअमेरिका राजनीतिक आलोचना - Political criticism of the United States
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