भाषा पर क्या है RSS का मत.? : सरसंघचालक जी ने बताया AI और राष्ट्रधर्म पर संघ दृष्टिकोण
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भाषा पर क्या है RSS का मत.? : सरसंघचालक जी ने बताया AI और राष्ट्रधर्म पर संघ दृष्टिकोण

RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने दिल्ली कार्यक्रम में भाषा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और राष्ट्रधर्म के प्रसार पर बड़ा बयान दिया। जानें विस्तार से...

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 29, 2025, 09:29 pm IST
inभारत, संघ @100, दिल्ली
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के तृतीय और अंतिम दिवस पर ‘जिज्ञासा समाधान’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भाषा विवाद, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) , राष्ट्रधर्म के प्रसार को लेकर किए गए प्रश्नों का उत्तर दिया।

प्रश्न – भाषा को लेकर कुछ प्रश्न उठते हैं। क्या एक नेशनल लैंग्वेज (राष्ट्रीय भाषा) आवश्यक है? बढ़ते भाषा विवादों के समय संघ का क्या मत है? साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर संघ का क्या दृष्टिकोण है? क्या युवाओं को राष्ट्रधर्म बताना केवल संघ का ही कार्य है या सबको इसमें सहभागी होना चाहिए?

उत्तर – संघ भी समय-समय पर जानकारी देगा, विशेषकर प्रेस के माध्यम से। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जब आ रहा है, तो हमें भी उसका उपयोग करना पड़ेगा। इसके लाभ, उसके एथिक्स (नैतिक पहलू), और उसका सही उपयोग कैसे हो, यह समाज को बताना हमारी ज़िम्मेदारी होगी। हम वह करेंगे।

संघ का वास्तविक उद्देश्य

वर्तमान में भी संघ का संपूर्ण कार्यक्रम युवाओं को राष्ट्र और धर्म से जोड़ने के लिए ही है। यह केवल परेड (समता) या खेल जैसा ऊपर से दिखाई देता है, पर वास्तव में उसका उद्देश्य राष्ट्र और धर्म से जुड़ाव ही है। संघ पिछले 100 वर्षों से यही कर रहा है। यदि कोई प्रश्नकर्ता स्वयं आकर देखें, तो उन्हें समझ में आएगा कि संघ का कार्य कैसे राष्ट्रधर्म से जुड़ा है।

भाषा पर संघ का मत

अब भाषा के प्रश्न पर। हमारा मत है कि भारत में उत्पन्न सभी भाषाएँ राष्ट्रीय भाषाएँ हैं। भारत के घटक जो-जो भाषा बोलते हैं, वे सभी राष्ट्रभाषाएँ हैं। हाँ, एक व्यवहार भाषा (लिंक लैंग्वेज) आवश्यक है, ताकि आपसी संवाद सुगम हो सके। और वह भाषा विदेशी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हमारे भाव विदेशी भाषा में पूर्ण रूप से व्यक्त नहीं हो पाते।

भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक संपन्नता

भारत की सभी भाषाओं में धर्म और संस्कृति के लिए उपयुक्त शब्द, अभिव्यक्तियाँ और भाव मौजूद हैं। हमारे यहाँ सब भाषाओं में कविताएँ, उपदेश और काव्य साहित्य मिलता है। जैसे तिरुक्कुरल, तुकाराम महाराज के अभंग, रामचरितमानस की चौपाइयाँ—इन सबमें जीवन-आचरण और आदर्श की समान शिक्षा है। सभी भाषाओं में रामायण और महाभारत का पठन होता है। संतों के नीति-वचन हर भाषा में समान भाव रखते हैं।

भाषाओं में विवाद का कोई अर्थ नहीं

इसलिए भाषाओं में विवाद करने का कोई अर्थ नहीं है। हमारी मातृभाषा हमें अच्छी तरह आनी चाहिए। जिस प्रदेश में रहते हैं, उस प्रदेश की भाषा का ज्ञान होना चाहिए। और एक व्यवहार भाषा भी सीखनी चाहिए। यदि संभव हो तो अन्य भाषाएँ भी सीखें। भाषा सीखने में कोई हानि नहीं है। दुनिया की सभी भाषाएँ जान लेना भी एक समृद्धि है।

न्यूनतम तीन भाषाओं का ज्ञान

लेकिन न्यूनतम तीन भाषाएँ—मातृभाषा, प्रांतीय भाषा और एक व्यवहार भाषा—तो सबको आनी ही चाहिए। इसलिए भाषा के प्रश्न पर विवाद न करके यह समझना चाहिए कि सब भाषाएँ हमारी हैं।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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