भुवनेश्वर: 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन में सुधार के लिए मंदिर प्रशासन ने दो महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की है। पहला, 15 सितंबर से दर्शन के लिए कतार प्रणाली लागू की जाएगी और दूसरा, मंदिर परिसर में शिशु स्तनपान कक्ष की व्यवस्था की जाएगी।
ओडिशा के विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि बहुप्रतीक्षित कतार प्रणाली अगले महीने से प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि यह नई व्यवस्था श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के पुनर्गठन के बाद लागू की जाएगी। समिति का पुनर्गठन आगामी 3 या 4 सितंबर तक गठित होने की संभावना है। समिति की पहली बैठक में प्रमुख मुद्दों पर विचार किया जाएगा, जिनमें जगमोहन क्षेत्र से हुंडी (दानपात्र) को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे भीड़ प्रबंधन प्रक्रिया को और व्यवस्थित बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
श्री हरिचंदन ने कहा कि मंदिर प्रशासन कतार प्रणाली लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कदम न केवल भीड़ नियंत्रण को सुदृढ़ करेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को अधिक व्यवस्थित और अनुशासित ढंग से दर्शन कराने में भी सहायक होगा।
उल्लेखनीय है कि श्रीमंदिर प्रबंध समिति, जो मंदिर प्रशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अगस्त 2024 में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद से निष्क्रिय है। अधिकारियों को उम्मीद है कि कतार प्रणाली की शुरुआत से भीड़भाड़ और सुरक्षा से जुड़ी पुरानी समस्याओं का समाधान होगा।
इस बीच, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने मंदिर आने वाली स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए एक विशेष शिशु स्तनपान कक्ष स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सुविधा का उद्देश्य स्तनपान कराने वाली माताओं को एक आरामदायक, स्वच्छ और निजी स्थान उपलब्ध कराना है। शिशुओं के साथ मंदिर में आने वाले उन श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही मांग को यह निर्णय पूरा करेगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने इस संबंध में अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी साझा की।
स्तनपान कक्ष मंदिर परिसर में स्थित प्रशासन शाखा कार्यालय के पास बनाया जाएगा। माताओं और शिशुओं के लिए स्वच्छता, गोपनीयता और आराम सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। इस सुविधा के सुचारु प्रबंधन हेतु एक समर्पित महिला सहायक की नियुक्ति की जाएगी। एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढी ने अधिकारियों को परियोजना को प्राथमिकता देने और कक्ष को स्तनपान कराने वाली माताओं की ज़रूरतों के अनुरूप पूरी तरह सुसज्जित करने के निर्देश दिए हैं। मंदिर प्राधिकरणों द्वारा इस पर विस्तृत चर्चा की जा चुकी है और सुविधा के लिए उपयुक्त स्थान भी चिन्हित कर लिया गया है।

















