ऊर्जा : न झुलसे ई-20 ईंधन योजना
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ई-20 ईंधन : भ्रम बनाम हकीकत

इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई-20) के बारे में गलत धारणाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें सरकार ने दूर कर दिया है

Written byवैभव डांगेवैभव डांगे
Aug 19, 2025, 02:18 pm IST
inभारत, विश्लेषण

भारत में 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई-20) की पहल प्रकृति और मानवीय विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन देश में इसको लेकर जिस तरह की धारणा बनाने का प्रयास हो रहा है उस वजह से इसकी पूरी तस्वीर साफ करने का यही समय है। यह भारत सरकार का राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। आई.ओ.सी.एल., ए.आर.ए.आई., एस.आई.ए.एम. और नीति आयोग द्वारा किए गए शोध में इस बात की पुष्टि होती है कि ई-10 की तुलना में ई-20 कार्बन उत्सर्जन को लगभग 30 प्रतिशत कम करता है।

नीति आयोग के एक अध्ययन में पाया गया है कि गन्ना-आधारित इथेनॉल से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 65 प्रतिशत और मक्का-आधारित इथेनॉल से 50 प्रतिशत तक कम होता है। पिछले 11 वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर 1.44 लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बचाई है और 736 लाख टन कार्बन-डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन घटाया, जो 30 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। यह 245 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का विकल्प बना है, जो पर्यावरण बचाने की दिशा में भारत के सकारात्मक योगदान को दर्शाता है।

ई-20 का ऑक्टेन नंबर (108.5) पेट्रोल (84.4) से ज्यादा है, जिससे गाड़ियों के वेग में वृद्धि हो जाती है। पहले भारत में बिकने वाले पेट्रोल का रिसर्च ऑक्टेन नंबर 88 था, जो अब बी.एस.-VI मानकों के तहत 91 हो गया है। ई-20 मिलाने से यह बढ़कर 95 हो गया है, जिससे गाड़ियों के चाल-चलन में सुधार हुआ है। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से ई-20 को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है कि इससे गाड़ियां ज्यादा पेट्रोल पीने लगी हैं।

इस भ्रम को दूर करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि गाड़ी का ‘माइलेज’ चलाने के हुनर, रखरखाव, पहियों में हवा और एयर कंडीशन के इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है। मंत्रालय ने कहा कि कई निर्माता 2009 से ई-20 से चलने वाली गाड़ियां बना रहे हैं, जिनमें ‘माइलेज’ पर कोई खास असर नहीं पड़ता। मंत्रालय चाहता है कि वाहन मालिकों की ‘माइलेज’ संबंधी आशंका दूर हो और इसके लिए वे बेहिचक अधिकृत सर्विस सेंटर में जाएं। सर्विस सेंटर का पूरा नेटवर्क उनकी मदद के लिए तैयार है।

कुछ लोगोें ने यह भी प्रचारित करने का प्रयास किया कि जिन गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल किया जाएगा, उसके नुकसान का खर्च इंश्योरेंस कंपनियां नहीं उठाएंगी। वास्तविकता यह है कि एक इंश्योरेंस कंपनी के ट्वीट को भ्रम फैलाने वाले तंत्र की तरफ से तोड़-मरोड़कर इस तरह से प्रस्तुत किया गया जिससे लोगों के मन में यह बात घर कर जाए कि इंश्योरेंस कंपनियां ई-20 ईंधन वाली गाड़ियों से पल्ला झाड़ रही हैं।

वास्तव में ऐसा है नहीं। इसके बाद भी देश में एक ऐसा तंत्र सक्रिय है, जो हर तरह से ई-20 ईंधन को गलत ठहराने पर तुला हुआ है। उसी तंत्र की तरफ से नया शिगूफा यह छोड़ा गया कि जब इथेनॉल सस्ता है तो ई-20 की कीमत भी कम होनी चाहिए। लोगों को यह जानना जरूरी है कि जब 2020-21 में नीति आयोग की रिपोर्ट बनी थी, तब इथेनॉल सस्ता था। अब इसकी खरीद कीमत पेट्रोल से ज्यादा है, जो औसतन 71.32 रु. प्रति लीटर है, जिसमें ट्रांसपोर्ट और जीएसटी भी शामिल है। मक्का-आधारित इथेनॉल 71.86 रु. प्रति लीटर है।

ई-20 की रूपरेखा 2021 में बनी थी। यह पहल भारत सरकार के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई.बी.पी.) कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका उद्देश्य है, देश की तेल पर निर्भरता कम करना और वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन को स्वच्छ बनाना। पहले इथेनॉल मिश्रण का औसत 12.06 प्रतिशत था, जो बढ़कर 14.6 प्रतिशत हो गया था।

फरवरी, 2025 में यह 19.6 प्रतिशत तक पहुंच गया और थोड़े समय बाद ही 20 प्रतिशत का लक्ष्य भी पार कर लिया गया है। हमें बहुत गहराई से समझना होगा कि इथेनॉल-पेट्रोल का मिश्रण जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता के स्थान पर किसान द्वारा उत्पादित ईधन का सेतु है। हमें भारत की प्रगति में अड़चन पैदा करने की कोशिश को समझना होगा।

लेखक – विशेषज्ञ, बुनियादी ढांचा, सतत गतिशीलता और जैव ऊर्जा

Topics: पेट्रोलियम मंत्रालयEthanol Blended Petrolवैभव डांगेऊर्जापाञ्चजन्य विशेषcarbon emissionsकार्बन उत्सर्जनई-20 ईंधनE-20 Fuelभारत सरकार की पहलनीति आयोगविदेशी मुद्रा की बचतNITI AayogForeign Exchange Savingsइथेनॉल मिश्रित पेट्रोल
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