सोना एल्डोज़ की मौत महज़ एक आत्महत्या की खबर नहीं है, बल्कि एक दर्दनाक दास्तान है, एक ऐसे रिश्ते की, जो उसकी नजर में प्रेम से शुरू हुआ, लेकिन था वह “लव जिहाद”। जिसके चलते धर्म परिवर्तन के दबाव और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना के दलदल में डूब जाने के बाद आखिरकार उसने अपने लिए मौत को चुन लिया। देखने में लगता है कि टीचर ट्रेनिंग की छात्रा सोना ने फांसी लगाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली।
लेकिन यह निर्णय ‘सोना’ के लिए कितना कठिन रहा होगा, उसके एक सुसाइड नोट से पता चलता है, जिसमें लिखा है कि उसका प्रेमी ‘रमीज’ और उसके परिजन उसे ‘इस्लाम’ अपनाने के लिए मजबूर कर रहे थे। यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन तमाम मामलों की भयावह गूंज है, जो केरल में ‘लव जिहाद’ के नाम पर सामने आए हैं, जहां कई युवतियों की जिंदगी, सपने और अस्तित्व खत्म कर दिए गए।
क्या है मामला?
दरअसल, केरल के एर्नाकुलम जिले के कोठामंगलम कस्बे में 23 वर्षीय सोना एल्डोज़ की मौत ने एक बार फिर राज्य में “लव जिहाद” के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि उसका प्रेमी रमीज और उसके परिजन उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित कर रहे थे। इस दबाव ने न केवल सोना की मानसिक शांति छीन ली, बल्कि अंततः उसकी जान भी ले ली। यह एक योजनाबद्ध मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न का मामला है, जो मजहबी कट्टरता की परछाई में घटित हुआ। पुलिस ने रमीज को हिरासत में ले लिया है और उसके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, जबरन कन्वर्जन और अन्य गंभीर धाराओं के तहत जांच शुरू की है।
इसे भी पढ़ें: पंजाब में स्वतंत्रता दिवस पर आतंकी साजिश नाकाम, बीकेआई के 5 आतंकी गिरफ्तार
सोना ने शिक्षक बनने का सपना देखा
सोना एक साधारण परिवार से है और मां घरेलू सहायिका का काम करती है। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं, लेकिन सोना ने तमाम कठिनाइयों के बावजूद शिक्षक बनने का सपना देखा। वह मेहनती, महत्वाकांक्षी और खुशमिजाज लड़की मानी जाती थी। लेकिन उसके जीवन में रमीज की एंट्री ने सब कुछ बदल दिया। दोस्ती से शुरू हुआ रिश्ता धीरे-धीरे प्रेम में बदला। शुरू में सब कुछ सामान्य था, लेकिन जल्द ही सोना पर कन्वर्जन का दबाव बढ़ने लगा। उसके करीबी बताते हैं कि रमीज ने शादी के लिए स्पष्ट शर्त रखी, इस्लाम कबूल करो। इस शर्त के पीछे सिर्फ प्रेम का मामला नहीं था, बल्कि एक गहरी वैचारिक सोच और सामाजिक दबाव भी छिपा था।
घटना वाले दिन ये हुआ
शनिवार की सुबह सोना अपने कमरे में अकेली थी। परिवार को लगा कि वह पढ़ाई कर रही है, लेकिन जब दोपहर तक कमरे से कोई हलचल नहीं हुई तो दरवाजा तोड़ा गया। सोना का शव फांसी के फंदे पर लटका था। पुलिस को बुलाया गया, प्रारंभिक जांच में यह ‘अस्वाभाविक मौत’ का मामला माना गया। लेकिन सुसाइड नोट मिलने के बाद धाराएं बदल गईं।
सुसाइड नोट में सोना ने लिखा- “मैं अब और सहन नहीं कर सकती। मैं अपने माता-पिता का अपमान नहीं कर सकती, लेकिन वे मुझे लगातार मजबूर कर रहे हैं।” इसमें एक जगह लिखा है, “मुझ पर लगातार दबाव है कि मैं अपना धर्म बदल लूं। मैं थक चुकी हूं। मेरी गलती सिर्फ इतनी है कि मैंने ऐसे इंसान से प्रेम किया, जिसने मेरे विश्वास और मेरी पहचान को मिटाने की कोशिश की।” इस बयान ने पुलिस को मजबूर किया कि वे इसे आत्महत्या के लिए उकसाने और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में मामला दर्ज करें।
केरल में लव जिहाद का पैटर्न
केरल पुलिस और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की जांच रिपोर्ट में कई बार यह सामने आया कि यहां अंतरधार्मिक रिश्तों के माध्यम से कन्वर्जन के मामले बार-बार हुए हैं। 2010 के बाद से यह बहस तेज़ हुई, जब कई हिंदू और ईसाई लड़कियों के लापता होने और विदेश, खासकर सीरिया और अफगानिस्तान भेजे जाने की खबरें सामने आईं। पिछले एक दशक से केरल ‘लव जिहाद’ की बहस का केंद्र बना हुआ है।
चर्च, हिंदू संगठनों और यहां तक कि राज्य पुलिस की कुछ रिपोर्टों में यह स्वीकार किया गया है कि अंतरधार्मिक प्रेम और विवाह के मामलों में कन्वर्जन का दबाव कई बार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डाला जाता है, जिसमें कि इस्लामिक कट्टरा सामने आई है। केरल में पिछले एक दशक में ऐसी कई घटनाएं हुईं, जहां गैर-मुस्लिम लड़कियों को प्रेम और विवाह के बहाने कन्वर्जन के लिए मजबूर किया गया और कई मामलों का अंत मौत पर जाकर खत्म हुआ है।
उल्लेखनीय है कि केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ने 2019 में सार्वजनिक बयान दिया था कि राज्य में ईसाई लड़कियों को संगठित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। कई मामलों में यह पाया गया कि पहले प्रेम संबंध बनाए जाते हैं, फिर शादी के नाम पर कन्वर्जन कराया जाता है, और कुछ मामलों में लड़कियों को दुर्व्यवहार या हत्या का शिकार बनाया गया। इन सभी घटनाओं में पैटर्न लगभग एक जैसा है- शुरुआत में प्रेम संबंध, फिर शादी का प्रस्ताव। इसके बाद कन्वर्जन का दबाव और फिर शादी के बाद अलगाव, हिंसा या हत्या का किया जाना।
अन्य प्रमुख घटनाएं, जिनमें मौत हुई
निमिषा फातिमा उर्फ़ मेरिन जैकब का मामला (2016) — मूल रूप से एक ईसाई लड़की, जिसने मुस्लिम युवक से शादी के बाद इस्लाम अपनाया। बाद में पति के साथ आईएसआईएस में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान चली गई। वहां उसकी मौत हो गई।
अथिरा का मामला (2018) — पलक्कड़ की हिंदू लड़की, जिसे मुस्लिम युवक से संबंध बनाने और इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। परिवार ने अपहरण और ब्रेनवॉश का आरोप लगाया।
बेन्सी का मामला (2019) — कोट्टायम की ईसाई युवती, जिसने शादी के बाद इस्लाम अपनाया। कुछ महीने बाद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
सोनिया सेरिन का मामला (2021) — तिरुवनंतपुरम की नर्स, जिसने शादी के लिए कन्वर्जन किया, लेकिन बाद में पति द्वारा प्रताड़ित की गई और मौत के घाट उतार दी गई।
मल्लपुरम की 21 वर्षीय निरंजना ने आत्महत्या कर ली थी। उसके परिजनों का आरोप था कि मुस्लिम प्रेमी ने शादी के लिए इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया।
कोझिकोड की वैशाली को सोशल मीडिया पर मिले एक मुस्लिम युवक ने पहले प्रेम जाल में फंसाया, फिर कन्वर्जन का दबाव बनाया। वैशाली ने इस दबाव के चलते पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने अपने अपहरण और मजबूरी से धर्म बदलवाने की कोशिश का भी खुलासा किया।
त्रिशूर की अनुश्री की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी मुस्लिम युवक ने अनुश्री पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया, और मना करने पर उसकी हत्या कर दी गई। यहां यह सभी घटनाएं दर्शाती हैं कि प्रेम संबंध में जब धार्मिक कट्टरता और पहचान बदलने का दबाव जुड़ जाता है, तो उसका असर कितना घातक हो सकता है। यह केरल में लव जिहाद के चल रहे पैटर्न को एक बार फिर उजागर करता है।
यहां सवाल उठता है कि अन्य राज्यों की तरह ही केरल सरकार जबरन कन्वर्जन रोकने के लिए पर्याप्त कानूनी कदम क्यों नहीं उठा रही है? उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन विरोधी कानून लागू किए गए हैं। लेकिन केरल में इस तरह का सख्त कानून नहीं है, जबकि इस तरह के मामलों की संख्या काफी अधिक बताई जाती है। एनआईए और केरल पुलिस की संयुक्त रिपोर्ट में भी कहा गया है कि धार्मिक कट्टरपंथी नेटवर्क सक्रिय रूप से सोशल मीडिया और कॉलेज परिसरों में गैर-मुस्लिम युवतियों को निशाना बना रहे हैं।
सोना की मौत समाज को चेतावनी
सोना एल्डोज़ की मौत पूरे समाज के सामने एक चेतावनी है। यह घटना बता रही है कि कैसे “लव जिहाद” के मामलों में भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक दबाव के चलते युवा इस राज्य में अपने जीवन को खत्म कर रहे हैं। न सिर्फ केरल बल्कि देश भर में “लव जिहाद” के चलते रोज कई जानें जा रही हैं। श्रद्धा वॉकर–आफताब पूनावाला केस, अंकिता भंडारी केस (उत्तराखंड), निकिता तोमर केस (बल्लभगढ़, हरियाणा), आरती शर्मा केस (कर्नाटक ), प्रियंका चौधरी केस (उत्तर प्रदेश) जैसे अनगिनत उदाहरण मौजूद हैं।
















