लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह कदम एक विवादास्पद मामले के बाद उठाया गया, जिसमें जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आवास पर मार्च में आग लगने के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी। इस घटना ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोपों को हवा दी, जिसके बाद संसद में हंगामा मचा। अब जस्टिस वर्मा को महाभियोग के जरिए हटाने के लिए जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।
146 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर किए हस्ताक्षर
ओम बिरला ने बताया कि उन्हें 146 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक प्रस्ताव मिला है, जिसमें जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव में बीजेपी के रविशंकर प्रसाद, कांग्रेस के राहुल गांधी, अनुराग ठाकुर, सुप्रिया सुले जैसे बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं। इतने सांसदों का एकजुट होना अपने आप में दुर्लभ है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 217 और 218 के तहत दायर किया गया है, जो हाईकोर्ट जज को हटाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
कमेटी का गठन
ओम बिरला ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक कमेटी गठन करने की घोषणा की है। यह कमेटी जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की गहराई से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपेगी। जांच के बाद यह तय होगा कि महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या नहीं। यह कमेटी संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत काम करेगी, जिसमें जज को हटाने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाई कोर्ट के सीनियर लॉयर बीवी आचार्य शामिल हैं।
इसे भी पढ़ें: विभाजन-विभीषिका : नेतृत्व का असमंजस और आंसुओं की बाढ़
विवाद की जड़
जस्टिस वर्मा तब सुर्खियों में आए, जब उनके दिल्ली के सरकारी आवास में आग लगने के बाद वहां से जली हुई नकदी बरामद हुई। इस घटना ने भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल खड़े किए। हालांकि, जस्टिस वर्मा ने इन आरोपों को “बेतुका” बताते हुए खारिज किया है। इसके बावजूद, सुप्रीम कोर्ट की एक आंतरिक जांच कमेटी ने मई में अपनी रिपोर्ट में उन्हें दोषी ठहराया, जिसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को यह रिपोर्ट भेजी गई।
संसद में एकजुटता
इस मामले में सत्तापक्ष और विपक्ष का एक साथ आना चर्चा का विषय बन गया है। बीजेपी, कांग्रेस, टीडीपी, जेडीयू, शिवसेना और सीपीआई(एम) जैसे दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। यह भारत के इतिहास में पहली बार है कि किसी हाईकोर्ट जज के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया इतने बड़े स्तर पर शुरू हो रही है।

















