संसद का मानसून सत्र नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले कई दिनों से अटका हुआ था। अब लगता है कि कामकाज फिर से पटरी पर आ रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल से ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026’ पर आज चर्चा होने की सहमति बन गई है। सरकार और विपक्ष दोनों इस पर बात करने को तैयार हैं।
क्यों रुका था संसद का काम?
सत्र शुरू होते ही दोनों सदनों में हंगामा छा गया था। नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के बाद देशभर में छात्रों ने आंदोलन किया। पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज की घटनाओं पर भी विवाद हुआ। विपक्ष ने इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा। खासकर राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी सदस्य गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग पर अड़े रहे।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आंदोलन कर रहे छात्रों पर दर्ज मुकदमों को तुरंत वापस लेने की बात उठाई। इन सबके चलते लोकसभा और राज्यसभा में जरूरी विधायी काम रुक गए थे। कोई भी अहम बिल आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
इसे भी पढ़ें: लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 पेश, पेपर लीक पर 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
लोकसभा अध्यक्ष और मंत्री की कोशिश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं से बात की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। इसलिए राजनीति की बजाय गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार छह घंटे से ज्यादा समय चर्चा के लिए देगी और विपक्ष को अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका मिलेगा।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से अपील की। उन्होंने कहा कि देश की जनता संसद की कार्यवाही देख रही है। सरकार का मकसद सिर्फ कानून पास करना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था बनाना है जिससे आगे पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों।
एक दिन पहले ही लोकसभा में पेश किया गया था विधेयक
सरकार ने यह संशोधन विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किया। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा माफिया पर लगाम लगाना, संगठित पेपर लीक गिरोहों पर सख्त कार्रवाई करना और प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं का भरोसा वापस लाना है। सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार मान रही है। वहीं विपक्ष इसे छात्रों के अधिकारों और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है। आज से इस बिल पर चर्चा शुरू होने के साथ संसद का रुका काम फिर से आगे बढ़ने की उम्मीद है। इससे परीक्षा सुधारों पर राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत भी शुरू हो सकती है।















