लखनऊ । उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में एक चपरासी इल्हाम शम्सी ने 8 करोड़ 15 लाख रुपये का घोटाला किया। उसने अपनी तीन बेगमों, साली, रिश्तेदार और महिला मित्रों के खातों में करोड़ों रुपये की सरकारी रकम ट्रांसफर की। इस घोटाले के खुलने पर चपरासी इलहाम शम्सी के साथ इस मामले में शामिल 7 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार महिलाओं में दो इलहाम की बेगम हैं, एक साली, एक सास, एक सलहज और दो महिला मित्र शामिल हैं। मुख्य अभियुक्त इल्हाम शम्सी तो अभी तक बचता रहा है। इलहाम की पहली पत्नी इस मामले में सबसे पहले गिरफ्तार हुई थी। वो जमानत पर बाहर है।
चपरासी से डीआईओएस कार्यालय तक पहुंच और घोटाले की शुरुआत
इल्हाम शम्सी बीसलपुर तहसील के जनता इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर कार्य कर रहा था। किसी तरह वह जिला विद्यालय निरीक्षक DIOS कार्यालय तक उसने पहुंच बना लिया। गत 7 वर्षों वे जिला विद्यालय निरीक्षक के कार्यालय में था। उसने फर्जी बेनिफिशियरी आईडी बनाकर शिक्षकों के वेतन मद से करोड़ों रुपये अपने करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर करा दिए।
बैंक की सूचना से खुला घोटाले का राज
बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर ने वेतन खातों में इस प्रकार के घपले की सूचना दी। इसके बाद जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया। इस मामले का खुलासा होने पर जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने थाना कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर दर्ज होने के बाद सबसे पहले अर्शी खातून को गिरफ्तार किया गया। विवेचना में पाया गया कि 53 संदिग्ध खातों में रूपये ट्रांसफर किये गए हैं। बैंक ने साढ़े 5 करोड़ रुपये फ्रीज कराए। इसके बाद पुलिस ने 7 महिलाओं को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आए करोड़ों के लेनदेन और आगे की कार्रवाई
विवेचना में वर्ष 2018 से लेकर अब तक विभाग में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की छानबीन की जा रही है। अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने कहा कि फरवरी में जिला विद्यालय निरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
विवेचना में पाया गया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम शम्सी ने फर्जी तरीके से सरकारी धनराशि का गबन किया है। इस मामले में 7 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है, जिनके खातों में लगभग 8 करोड़ 15 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। विवेचन अभी चल रही है, जो भी अधिकारी या अन्य व्यक्ति इस मामले में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

















