टैरिफ की चुनाैती, मांगे नई रणनीति
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भारत-यूके मुक्त व्यापार संधि : टैरिफ की चुनाैती, मांगे नई रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों का हवाला देते हुए भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ के अलावा अतिरिक्त ‘दंडात्मक शुल्क’ लगाने की घोषणा की है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 7, 2025, 01:34 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों का हवाला देते हुए भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ के अलावा अतिरिक्त ‘दंडात्मक शुल्क’ लगाने की घोषणा की है। उनका तर्क है कि भारत रूस से रक्षा उपकरण और कच्चा तेल खरीद रहा है, जो अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं के खिलाफ है। हालांकि, सच्चाई यह है कि भारत वैश्विक स्तर पर रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने और घरेलू मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए जहां से संभव हो, वहीं से सस्ती दरों पर कच्चा तेल खरीदने को प्रतिबद्ध है।

अगर अमेरिका सोचता है कि वह ऐसी धमकियों से भारत पर दबाव बना सकता है, तो उसे अपनी रणनीति में बदलाव करने की आवश्यकता है। आज का भारत एक दशक पहले वाला नहीं है। यह हथियार निर्माण में एक उभरती वैश्विक शक्ति है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे सैन्य अभियानों के माध्यम से अपनी सामरिक आत्मनिर्भरता का परिचय दे चुका है। अमेरिका को यह समझना होगा कि विश्व अब एकध्रुवीय नहीं रहा।

दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब चीन वैश्विक व्यापार व आपूर्ति शृंखलाओं का हथियारीकरण कर रहा है, अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदार पर दंडात्मक कार्रवाई कर रहा है। दुर्लभ मृदा तत्वों के निर्यात पर चीन के प्रतिबंधों ने वैश्विक विनिर्माण क्षमताओं को संकट में डाल दिया है। ऐसे में भारत और अमेरिका को मिलकर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को स्थिर और लचीला बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

सरकार की प्रशंसा करनी चाहिए कि वह अमेरिकी दबाव के बावजूद द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं में अपने रुख पर अडिग रही है। 9 और 31 जुलाई की समयसीमाएं चूकने व पारस्परिक टैरिफ की धमकियों के बावजूद भारत ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) कृषि उत्पादों, डेयरी व अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के बाजार को खोलने के अमेरिकी प्रयासों का विरोध किया है। अमेरिका डब्ल्यूटीओ के नियमों का उल्लंघन कर देशों पर अपने उत्पादों पर टैरिफ कम करने का दबाव बना रहा है।

इन खबरों को भी पढ़ें-
trump tariff news: भारत पर अमेरिका का 25 प्रतिशत टैरिफ आज से लागू, जानिये किन भारतीय उत्पादों पर पड़ सकता है असर

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसानों और कृषि सुरक्षा के मद्देनजर जीएम फसलों के आयात को अनुमति नहीं देगा और न ही चिकित्सा उपकरणों पर नियमन में ढील देगा। संवेदनशील डेटा पर संप्रभु नियंत्रण भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित का विषय है। सरकार ने इस पर समझौता नहीं किया है। इस्पात, ऑटोमोबाइल और दवाओं पर अमेरिकी टैरिफ से छूट की भारत की मांग भी इसी नीति का हिस्सा है।

व्यापार समझौता हो या न हो, भारत से अमेरिका को निर्यात पारस्परिक लाभ के आधार पर चलता रहेगा। हमें ऐसी कोई रियायत नहीं देनी चाहिए जो किसानों, लघु उद्योगों या हमारी आर्थिक आत्मनिर्भरता को कमजोर करे। हाल के वर्षों ने यह दिखाया है कि भारत वैश्विक व्यापार पैटर्न में बदलाव का लाभ उठा सकता है, विशेषकर अमेरिका-चीन तनाव के बीच।

अब टैरिफ का निर्धारण विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) नियमानुसार नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति की मनमर्जी, कथित पारस्परिकता के विचार या अनैतिक गैर-व्यापारिक मुद्दों का हवाला देकर किया जा रहा है।

भारत हमेशा से अमेरिका की बौद्धिक संपदा अधिकार, निवेशक-राज्य विवाद निपटान, बहु-ब्रांड खुदरा और ई-कॉमर्स क्षेत्र में अनुचित मांगों के प्रति सतर्क रहा है। यद्यपि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत को उससे 41.8 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष है, फिर भी हमें यह समझना होगा कि अमेरिका की हर मांग को स्वीकार करना हमारे हित में नहीं है। यदि भारत कुछ मांगों को स्वीकार कर लेता है, तो इससे दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका जिन उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा रहा है, उनमें से कई भारत निर्यात करता ही नहीं। इसलिए ‘पारस्परिक शुल्क’ से भारतीय निर्यातकों को वास्तविक नुकसान सीमित होगा। 2017 से 2024 के बीच भारत ने चीन की कीमत पर अमेरिका को लगभग 38 अरब डॉलर का अतिरिक्त निर्यात हासिल किया है, जिससे यह साबित होता है कि भारत अमेरिका-चीन तनाव से लाभ उठा सकता है-बिना किसी व्यापार समझौते के भी।

आज भारत के लिए लातिनी अमेरिकी देशों सहित वैश्विक दक्षिण में अपने व्यापार का विस्तार करने का भी अवसर है। व्यापार पारस्परिक लाभ के लिए है। अमेरिका को यह समझना चाहिए कि आयात उसकी अपनी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह भारत पर कोई अहसान नहीं है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ अंततः उसके नागरिकों पर महंगाई के रूप में असर डालेंगे। भारत को अपने आत्मनिर्भर रुख पर अडिग रहना चाहिए। यह संकट भले ही अल्पकालिक हो, पर यह भारत को उन उत्पादों में आत्मनिर्भर बनने का अवसर देता है जो अब तक अमेरिका से आयात किए जाते रहे हैं। आज की आवश्यकता है कि भारत ब्रिक्स और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करे और विविधता लाए।

Topics: Bharat- UKव्यापार संधिटैरिफकृषि सुरक्षाtariffभारत रूसअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपUS President Donald Trumpऑपरेशन सिंदूरOperation SindoorTrade TreatyAgricultural SecurityIndia Russia
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